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Archive for September, 2006

 “गुलामी में एक सुरक्षा है.अनुकरण और निर्भरता में एक सुरक्षा है -खासकर बौद्धिक निर्भरता में.इसलिए इसकी लत लग जाती है.जो लोग,व्यक्ति या समूह लम्बे समय तक गुलाम बने रहते हैं,उनके स्वभाव में कुछ परिवर्तन आ जाता है.ज्यादा समय तक गुलाम रहने वाले देशों और कम समय तक या न के बराबर गुलाम रहने वाले देशों [...]

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जन्म ५नवंबर १९११ ,
निधन २३ अगस्त २००६
 दिनेश दासगुप्त : एक परिचय , लेखक - अशोक सेकसरिया
     अगर सच्चे अर्थों में किसी को क्रांतिकारी समाजवादी कहा जा सकता है तो दिनेश दासगुप्त के नाम का स्मरण आयेगा ही . १६ वर्ष की उम्र में वे मास्टरदा सूर्य सेन के क्रांतिकारी दल से जुडे तो  अंत तक [...]

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राज्य निर्वाचन आयोग,उ.प्र., की एक वेब साइट है.उस पर जो ई-पता है वह डाक स्वीकार नहीं कर रहा है .

Aflatoon <aflatoon@gmail.com>
28 September 2006 10:37

To: stateelectioncommssion@yahoo.co.inCc: rbhattacharya@eci.gov.in, rajeshaggarwal@eci.gov.in

श्री अपरमिता प्रसाद सिंह,मुख्य चुनाव आयुक्त,राज्य निर्वाचन आयोग(पंचायत व स्थानीय निकाय),
पी.सी.एफ़. भवन,३२ स्टेशन रोड ,
लखनऊ - २२६००१ .
सन्दर्भ : भारत के निर्वाचन आयोग में पंजीकृत राजनैतिक दल ‘समाजवादी [...]

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कृपया इस प्रविष्टि को नीचे से ऊपर पढें
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खालीपीली
आसक्त
सिर्फ एक ही बात कहना चाहुंगा ! मातृभाषा का सम्मान जरूरी है। हिन्दी का सम्मान करना चाहिये ज्यादा से ज्यादा उपयोग करना चाहिये। लेकिन इसकी आड मे किसी और भाषा का विरोध सही नही है।
आमतौर पर हिन्दी समर्थक अंग्रेजी विरोध पर उतर आते है जो कि गलत है। [...]

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अब ‘परिचर्चा’ पर चर्चा को डालने के बाद :

बिल्कुल जी बिल्कुल, रुचि है, आप अपने और गांधीजी के विचारों को पूरी तरह से व्यक्त करदें बाद में इस विषय को आगे बढ़ाते हैं।

सागर चन्द नाहर
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कलम को चलने दें “अफ़लातूनजी”॰॰॰
grjoshee
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अफलातून जी,साधुवाद!! गाँधी जी के भाषा पर विचारों से अवगत कराने के लिये..भाषा की इस उलझन मे [...]

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हिन्दी दिवस पर मैंने गांधी जी के दो उद्धरण अपने चिट्ठों के अलावा ‘गूगल समूह’ ‘चिट्ठाकार’ पर भी डाले थे.सात लोगों ने चर्चा में विचार व्यक्त किये.अन्तत: यह कहा गया कि बहस को ‘परिचर्चा’ पर डाला जाए.यहां चिट्ठाकार की बहस को दिया जा रहा है.आशा है पाठक बहस को जारी रखेंगे.
From:
अफ़लातून -Date:
Thurs, Sep 14 2006 [...]

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  मेरा यह विश्वास है कि राष्ट्र के जो बालक अपनी मातृभाषा के बजाय दूसरी भाषा में शिक्षा प्राप्त करते हैं , वे आत्महत्या ही करते हैं . यह उन्हें अपने जन्मसिद्ध अधिकार से वंचित करती है . विदेशी माध्यम से बच्चों पर अनावश्यक जोर पडता है . वह उनकी सारी मौलिकता का नाश कर [...]

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मालेगांव में आतंकी घटना के बाद वहां की जनता ने आतंकियों के प्रतिक्रिया फैलाने के मक़सद को अपनी सूझ - बूझ से नाकामयाब कर दिया . उसे सलाम !
इस मौके पर काशी में हुए ऐसे ही काण्ड के बाद ‘ साझा संस्कृति मंच ‘ द्वारा निकाले गये जुलूस में वितरित पर्चे को देना उचित [...]

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साझा संस्कृति मंच तथा जनान्दोलनों के राष्ट्रीय समन्वय द्वारा आयोजित ‘ पानी की जंग ‘ विषयक राष्ट्रीय सम्मेलन में पारित लोक संकल्प दिनांक ३० जून ,२००६, स्थान - सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ,वाराणसी
हमारी अमूल्य जल - निधि को लूटने वाली ,प्रदूषणकारी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों से पीडित किसानों ,महिलाओं ,बुनकरों तथा सामाजिक - राजनैतिक कार्यकर्ता , समर्थक समूहों [...]

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