कोला कम्पनियों की करतूतें
November 20, 2006 by अफ़लातून
लेखक : अफ़लातून
”उपभोग जीवन की बुनियादी जरूरत है . इसके बगैर न जीवन सम्भव है और न वह सब जिससे हम जीवन में आनन्द का अनुभव करते हैं.
इसके विपरीत ऐसी वस्तुएं , जो वास्तव में मनुष्य की किसी मूल जरूरत या कला और ग्यान की वृत्तियों की दृष्टि से उपयोगी नहीं हैं लेकिन व्यावसायिक दृष्टि से प्रचार के द्वारा उसके लिए जरूरी बना दी गयी हैं ,उपभोक्तावादी संस्कृति की देन हैं . “
- सच्चिदानन्द सिन्हा
कोला पेय पूरी तरह उपभोक्तावादी संस्कृति की देन हैं . पूरी तरह अनावश्यक और नुकसानदेह होने के बावजूद इनका एक बहुत बडा बाजार है . वर्ष २००२ में कोका - कोला कम्पनी की शुद्ध आय ३०५ करोड डॊलर थी और पेप्सीको की १९७ करोड डॊलर . शुद्ध आय में इन कम्पनियों के प्रमुखों को मिलने वाली धनराशि शामिल नही होती . शेयर , बोनस तथा अन्य मुआवजों को जोडने पर सन १९९८ के पेप्सीको प्रमुख रोजर एनरीको की वार्षिक आमदनी ११,७६७,४२१ डॊलर थी जबकि उनका ‘वेतन’ मात्र एक डॊलर था . अपने - अपने वेतन या मजदूरी के बल पर इस रकम की बराबरी करने में अमरीकी राष्ट्रपति को ५८ वर्ष लगते,औसत अमरीकी मजदूरी पाने वाले अमरीकी मजदू ४६१ वर्ष लगते तथा अमेरिका न्यूनतम मजदूरी पाने वाले मजदूर को १०९८ वर्ष लग जाते . १९९१ में कोका कोला के प्रमुख डगलस आईवेस्टर की वार्षिक आय ३३,५९३,५५२ डॊलर थी.अमेरिका में न्यूनतम मजदूरी पाने वाले मजदूर को यह रकम कमाने में ३१३६ वर्ष लगते ,औसत मजदूरी पाने वाले को १३१७ वर्ष तथा अमरीकी राष्ट्रपति को १६७ वर्ष लगते . कोका - कोला के प्रमुख डगलस डाफ़्ट को हजारों कर्मचारियों की छंटनी करने के पुरस्कारस्वरूप ३० लाख डॊलर बोनस के रूप में दिए गये.समाजवादी चिन्तक सच्चिदानन्द सिन्हा के शब्दों में ‘उदारीकरण के आर्थिक दर्शन में मजदूरों की छंटनी औद्योगिक सक्षमता की अनिवार्य शर्त है’ . भारत में इन दोनों कम्पनियों के उत्पादो के प्रचार हेतु बनी चन्द मिनट की एक व्ग्यापन फिल्म का खर्च करोडों रुपये में आता है . इनमें काम करने वाले क्रिकेट खिलाडियों और सीने कलाकारों को कुच करोड रुपए तक मिल जाते हैं .जाहिर है इन कम्पनियों की शुद्ध आय इन खर्चों को काटने के बाद की है .इन पेयों की जो कीमत ग्राहकों से वसूली जाती है उसमें कम्पनी की आय और खर्च दोनों शामिल हैं. ( अगले अंक में ” शैशव में अतिक्रमण “)


वैश्वीकरण के विरुद्ध आपके लेखों की यह प्रतिबद्ध श्रृंखला बहुत महत्वपूर्ण है। आँकड़ों एवं तथ्यों से पूर्ण ये लेख अपना असर छोड़ते हैं।