Posted in poem on December 31, 2006 | 9 Comments »
मैं जितने लोगों को जानता हूँ
उनमें से बहुत कम लोगों से होती है मिलने की इच्छा
बहुत कम लोगों से होता है बतियाने का मन
बहुत कम लोगों के लिए उठता है आदर-भाव
बहुत कम लोग हैं ऐसे
जिनसे कतरा कर निकल जाने की इच्छा नहीं होती
काम-धन्धे, खाने-पीने, बीवी-बच्चों के सिवा
बाकी चीजों के लिए
बन्द हैं लोगों के दरवाजे
बहुत कम [...]
Read Full Post »
गत प्रविष्टी से आगे : आन्ध्रप्रदेश में काकिनाडा में तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग के विशेष आर्थिक क्षेत्र एवं तेलशोधक कारखाने के लिए १०,००० एकड़ खेती की उपजाऊ भूमि ली जा रही है , जिसे छोड़ने के लिए किसान तैयार नहीं है। हरियाणा में रिलायन्स का विशेष आर्थिक क्षेत्र भी विवादों से घिर गया है। हरियाणा [...]
Read Full Post »
[मुम्बई के पास नवी मुम्बई से लगा ३५००० एकड़ का रिलायन्स का ' महामुम्बई विशेष आर्थिक क्षेत्र ' तो इतना विशाल है कि यह मुम्बई महानगर के एक तिहाई क्षेत्रफल के बराबर है। ]
गतांक से आगे
इसी प्रकार , विशेष आर्थिक क्षेत्र कानून में विनिर्माण की परिभाषा इतनी व्यापक रखी गयी है कि उसमें रेफ्रिजरेशन ( [...]
Read Full Post »
[ महानगरों के पास सस्ती जमीन , करों में छूट और बाहर से सीमेंट, इस्पात , लिफ़्ट , बिजली उपकरण आदि नि:शुल्क आयात करने की सुविधा के कारण कई जमीन - जायदाद का धन्धा करने वाली निर्माण कंपनियों के लिए भी ' विशेष आर्थिक क्षेत्रों ' का आकर्षण बढ़ गया है। ]
पिछली प्रविष्टि से आगे :
[...]
Read Full Post »
Posted in Uncategorized on December 27, 2006 | No Comments »
भारत भूमि पर विदेशी टापू : लेखक सुनील , यहाँ पढ़ें
Read Full Post »
सामयिक वार्ता/नवंबर,२००६ से लिया गया .
व्यंग्य
मुझे लगता है , भारत सरकार हमेशा अधूरा काम करती है . उसने राजनीतिक आजादी दी , पर आर्थिक आजादी देना भूल गयी .दलितों और पिछड़ों को आरक्षण दिया , पर पिछड़े वर्गों को इससे वंचित रखा . हिन्दी को राजभाषा बनाया , पर अंग्रेजी को छुआ तक नहीं . [...]
Read Full Post »
Posted in Gujarat, half pant on December 15, 2006 | No Comments »
#18 Today 11:31:20
neerajdiwan
समझदार बंधु
From: दिल्ली
Registered: 14-05-2006
Posts: 370
E-mail PM Website
Re: अहमदाबाद में प्रेमी युगलों की पिटाई
आंख बन्द कर लेने से मुसीबतें टल नहीं जाती.. संस्कृति के ठेकेदार कल हमारे घर की दीवारें लांघकर हमें धमकाने लगेंगे कि हम अपने जीवनसाथी के साथ भी मुहूर्त देखकर ही हमबिस्तर हों. प्यार करने के तौर-तरीक़े सीखाने [...]
Read Full Post »
Posted in Gujarat, half pant on December 15, 2006 | 1 Comment »
पिछली प्रविष्टी पर टिप्पणियां , आईं , कम से कम तीन चिट्ठों पर घटना पर केन्द्रित प्रविष्टियां आयीं और घुघुटीबसूती द्वारा एक सुन्दर चर्चा ‘परिचर्चा ‘ पर शुरु की गयी . इनमें सब कोंण ‘परिचर्चा’ में अच्छी तरह आये हैं . यहां उन्हें पूरा दिया जा रहा है . ‘परिचर्चा’ तथा सभी हिस्सेदार लोगों के प्रति [...]
Read Full Post »
Posted in Gujarat, half pant on December 10, 2006 | 2 Comments »
गनीमत है कि द्वारिका मोदी के गुजरात में है, मथुरा या बृन्दावन नहीं . मोदी का राज यदि मथुरा-वृन्दावन में होता तब राधा-कृष्ण का क्या हाल होता ? वह भी भारतीय संस्कृति के कथित रक्षकों के हाथों . विडम्बना है कि ‘रक्षकों’ में कुछ गोपियां भी पीछे नही हैं .
काश इन ‘संस्कृति रक्षकों’ का भीम [...]
Read Full Post »
Posted in gandhi on December 7, 2006 | 4 Comments »
तथागत की सिखाई बौद्ध दर्शन की विशिष्ट शैली में आलोचना का महत्व है , आत्मालोचना का महत्व तो अनुपम है . सामयिक दलित आन्दोलन के वजूद में बाबासाहब का योगदान पितृतुल्य है . आज के दलित आन्दोलन के संकट को समझने के लिए उनकी और गांधी जी की राजनैतिक व दार्शनिक यात्रा की आलोचना मददगार [...]
Read Full Post »