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Archive for January, 2007

साभार बीबीसी :
बुधवार, 17 जनवरी, 2007 को 14:48 GMT तक के समाचार
पाणिनी आनंद
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

“वेब पत्रकारिता में अंग्रेज़ी का प्रभुत्व बहुत दिन नहीं रहने वाला है. क्षेत्रीय और स्थानीय भाषा में बन रहे वेब पोर्टलों और वेबसाइटों का प्रभाव बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है और इनका भविष्य उज्ज्वल दिखाई देता है.”
यह कहना है बीबीसी वर्ल्ड [...]

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एक भारतीय - मूल के अमरीकी नागरिक ने गांधीजी पर एक ‘व्यंग्य - विडियो ‘ बना कर यू-ट्यूब पर डाल दिया । भारत के कम - से - कम दो टेलिविजन चैनलों ने इस वीडियो को भरपूर दिखाया । इस सन्दर्भ में केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री प्रियरंजन दासमुंशी ने कहा है कि सरकार [...]

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एक भाषा हुआ करती है
जिसमें जितनी बार मैं लिखना चाहता हूँ ‘आँसू’ से मिलता-जुलता कोई शब्द
हर बार बहने लगती है रक्त की धार
 
एक भाषा है जिसे बोलते वैज्ञानिक और समाजविद और तीसरे दर्जे के जोकर
और हमारे समय की सम्मानित वेश्याएँ और क्रांतिकारी सब शर्माते हैं
जिसके व्याकरण और हिज्जों की भयावह भूलें ही
कुलशील , वर्ग और [...]

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    डॊलर -रुपये की लूट
    अंतर्राष्ट्रीय विनिमय में अमरीका जैसे देश एक और तरीके से भारत जैसे देशों को लूट रहे हैं । वह है डॊलर और रुपए का विनिमय दर । बीस साल पहले एक डॊलर आठ-दस रुपये का था , आज वह ४८ रुपये का हो गया है। लेकिन क्रयशक्ति समता ( Purchasing [...]

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देश हित से ऊपर विदेशी पूंजी
    विदेशी पूंजी का मोह इतना ज्यादा है कि देश हित , जन स्वास्थ्य , पर्यावरण सबको धता बताई जा रही है । शीतल पेय की कोका कोला - पेप्सी कंपनी की बोतलें नुकसानदायक हैं , यह प्रमाणित हो चुका है । फिर भी उन्हें प्रतिबन्धित करने की हिम्मत भारत [...]

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” पृथ्वी से अच्छा बरताव करो ।पृथ्वी तुम्हें माँ-बाप ने नहीं दी है,आगे आने वाली पीढियों ने उसे तुम्हे कर्ज के रूप में दिया है ।हमें अपने बच्चों से उधार में मिली है पृथ्वी ।”
    आधुनिक औद्योगिक सभ्यता के प्रथम शिकार ‘रेड इन्डियन’ लोगों की यह प्रसिद्ध कहावत प्लाचीमाडा के कोका-कोला विरोधी आन्दोलन की जुझारू [...]

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     निजीकरण-उदारीकरण के घोटाले
    निजीकरण के पीछे एक और दलील थी कि सरकारी काम में काफी भ्रष्टाचार है । लेकिन जिस तरीके से निजीकरण और उदारीकरण हो रहा है , उसने तो भ्रष्टाचार की सारी मर्यादाएं तोड़ दी हैं ।पिछले कुछ सालों में इतने घोटाले हुए हैं और इतने बड़े घोटाले हुए हैं कि ‘घोटाला’ शब्द के मायने बदल गये [...]

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विदेशी कंपनियों का हड़पो अभियान
गतांक से आगे : दूसरे प्रकार की विदेशी पूंजी-प्रत्यक्ष विदेशी निवेश- वास्तव में देश के अन्दर आती है । इसे दो भागों में बांटा जा सकता है - (एक) विलय और अधिग्रहण ( Merger & Acquisition ) तथा (दो) हरित निवेश ( Greenfield investment ) । भारत में प्रत्यक्ष पूंजी निवेश [...]

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विदेशियों का हुक्म सिर-आँखों पर ( गत प्रविष्टी से आगे )
    देशप्रेम के स्थान पर विदेश प्रेम तथा आम जनता के स्थान पर कंपनियों के हितों को बढ़ाना - यही भूमंडलीकरण की नई व्यवस्था का मर्म है । इस अंधे विदेश प्रेम ने हमारे मंत्रियों , अधिकारियों , विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों की सोचने की शक्ति को भी [...]

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    लगभग सात वर्ष पहले की बात है । दूरसंचार क्षेत्र में निजी कंपनियों को लाइसेन्स दिये हुए कुछ वर्ष हो चुके थे । किन्तु इन कंपनियों ने सरकार को लाइसेन्स शुल्क का नियमित भुगतान नहीं किया था और उनके ऊपर अरबों रुपया बकाया हो गया था । जब उनको नोटिस दिए जाने लगे , [...]

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