निजी जेल कंपनियों के कारनामे : दीपा फर्नाण्डीज़ : प्रस्तुति – अफ़लातून

करेक्शन्स कॉर्पोरेशन ऑफ़ अमेरिका (सी सी ए )
    पिछली प्रविष्टी से आगे :कुप्रबन्ध और कलंक के इतिहास के बावजूद निजी जेल उद्योग की कंपनियों को नई जेलों के ठेके लगातार मिलते आए हैं। इनसे जुड़ी समस्याएं भी बदस्तूर जारी हैं ।आप्रवासी बन्दियों के वकील अब भी अपने मुवक्किलों से दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाते हैं। इन [...]

ये परदेसी जिन्दगी : आप्रवासियों के लिए निजी जेल : दीपा फर्नाण्डीज़ : प्रस्तुति – अफ़लातून

[ कम्पनियों द्वारा संचालित जेलें ? जी , हाँ । इसकी कल्पना भी नहीं की थी। पत्रकार दीपा फर्नाण्डीज़ की ताजा किताब 'टार्गेटेड़' में ऐसी जेलों और उन कम्पनियों और जेल-उद्योग का तफ़सील से विवरण हैं । मैंने उनकी किताब के आधार पर लिखे गए एक लेख को हिन्दी में प्रस्तुत करने  की उनसे और 'कॉर्पवॉच' नामक जाल-स्थल से [...]

‘दो तिहाई आबादी को होगी पानी की किल्लत’

 साभार : -  
 
संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी ने चेतावनी दी है कि अगले बीस वर्षों में दुनिया की दो तिहाई आबादी को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ेगा.
संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन का कहना है कि दुनिया की आबादी जिस गति से बढ़ रही है, उससे दोगुनी दर से पानी की खपत बढ़ [...]

आयात – निर्यात और मीडिया : किशन पटनायक

‘ हम निर्यात करेंगे तो हमारा विकास होगा ।’ मीडिया के लिए यह एक मंत्र है । विश्व बैंक से यह मंत्र आया है । हमारे विद्वानों में यह साहस नहीं है कि इस गलत धारणा को देश के दिमाग से हटाने की कोशिश करें । भारतीय अर्थनीति में निर्यात की भूमिका के बारे में [...]

जे.पी. और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

[ सवालों के लिखित उत्तर जयप्रकाश नारायण ने 'सामयिक वार्ता' के लिए सितम्बर १९७७ के पहले सप्ताह में दिये ।निम्नलिखित सवाल-जवाब का स्रोत - सामयिक वार्ता , १६ सितम्बर,१९७७ है ।]
प्रश्न : आपके आन्दोलन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और भारतीय मजदूर संघ ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और जनसंघ के साथ भाग लिया ।जनता पार्टी [...]

चीन और विदेशी पूंजी : किशन पटनायक

    हम कह चुके हैं कि चीन में भारत की तुलना में बहुत ज्यादा विदेशी पूंजी का प्रवेश हो रहा है । चीन के एक निर्धारित इलाके में सघन रूप से पूंजीवादी विकास किया जा रहा है । वहाँ आधुनिक उद्योगों का विकास तीव्रता से हो रहा है । उसको देख कर चीन के औद्योगिक भविष्य के बारे [...]

बैंक बीमा और पेटेंट : किशन पटनायक

राष्ट्र की सारी बचत राशि बैंकों और बीमा के पास जाती है । वहाँ हमारी राष्ट्रीय पूंजी संचित है । उस पर भी विदेशी कंपनियों को वर्चस्व चाहिए । इसलिए भाजपा सरकार कांग्रेस का समर्थन पाकर इससे संबंधित कानूनों को बदल रही है । पेटेंट कानून भी बदल रहा है । दुनिया से सीखकर नयी [...]

आर्थिक संप्रभुता क्या है ? : किशन पटनायक

    इतिहास की उथल – पुथल से , युद्ध – संधि , विकास और विद्रोह से राष्ट्रों का निर्माण तथा नवनिर्माण होता है । एक बहुत बड़े उथल – पुथल से भारतीय राष्ट्र का नवगठन १५ अगस्त १९४७ को हुआ । बीसवीं सदी के इस काल खण्ड में आज के अधिकांश विकासशील देशों का नये [...]

जगतीकरण क्या है ? : किशन पटनायक

सब दल लेकर हैं खड़े , अपने – अपने जाल
हे साधो ! कुछ चेतिए , देश बड़ा बेहाल .(१)
हल्दी ,तुलसी , नीम के , बाद जूट पेटेण्ट
ये भारत की सम्पदा , वो ग्लोबल मर्चेण्ट.(२)
भारत बस बाजार है , विस्तृत और समग्र
सिर्फ मुनाफे के लिए,मल्टीनेशनल व्यग्र.(३)
सम्प्रभुता,गौरव कहाँ,कहाँ आत्मसम्मान
अजी छोड़िए, आइए, करना है उत्थान.(४)
-  शिव कुमार ‘पराग’ [...]

वैश्वीकरण : देश रक्षा और शासक पार्टियाँ : किशन पटनायक

गत प्रविष्टी से आगे : देश – रक्षा में हथियारों का प्रमुख स्थान नहीं । अगर आप राजनीतिमें , कूटनीति में , अर्थनीतिमें सब कुछ समर्पित करते जाएंगे , तो लड़ने के लिए क्या रह जाता है ? आप अपने उद्योगों को , खदानों को , व्यापार को , भूमि और बंदरगाहोंपर अधिकार को , [...]