Technorati tags: jose bove, corporatisation, globalisation [ मुकेश अम्बानी द्वारा सब्जी-फल बेचने के लिए रिलायन्स फ़्रेश नामक एक कम्पनी की शुरुआत हुई है । राँची और इन्दौर में रिलायन्स फ़्रेश की दुकानों पर शहर में पटरियों पर और ठेले पर फल - सब्जी बेचने वाले लोगों ने इसका तीखा प्रतिकार किया । [...]
Archive for मई, 2007
गांधी से प्रभावित किसान नेता के बहाने
Posted in globalisation , privatisation on मई 31, 2007 | 12 Comments »
‘खुले विश्व’ के बन्द होते दरवाजे
Posted in internet on मई 26, 2007 | 6 Comments »
Technorati tags: internet, censorship [ १८ मई २००७ को 'इंटरनेट की सेंसरशिप पर जोर ' विषयक एक खबर बी बी सी हिन्दी पर आई है । ३० दिसम्बर , २००२ के 'हिन्दुस्तान' के सम्पादकीय पृष्ट पर इस मसले पर मेरा लेख 'खुले विश्व' के बंद होते दरवाजे छपा था । हिन्दुस्तान के संजाल संस्करण के इस तिथि [...]
ईसाई और मुसलमान क्यों बनते हैं ? – स्वामी विवेकानन्द
Posted in brahminism, vivekanda on मई 20, 2007 | 14 Comments »
Technorati tags: vivekanand, brahminism अगर हमारे देश में कोई नीच जाति में जन्म लेता है , तो वह हमेशा के लिए गया – बीता समझा जाता है , उसके लिए कोई आशा – भरोसा नहीं । ( पत्रावली भाग २ , पृ. ३१६ ) आइए , देखिए तो सही , त्रिवांकुर में जहाँ पुरोहितों [...]
‘राष्ट्र की रीढ़’ : स्वामी विवेकानन्द
Posted in Uncategorized on मई 19, 2007 | 12 Comments »
Technorati tags: vivekanand, brahminism जिनके रुधिर-स्राव से मनुष्यजाति की यह जो कुछ उन्नति हुई है ,उनके गुणों का गान कौन करता है ? लोकजयी धर्मवीर , रणवीर , काव्यवीर , सब की आँखों पर , सब के पूज्य हैं ; परंतु जहाँ कोई नहीं देखता , जहाँ कोई एक वाह वाह भी नहीं करता [...]
"हिटलर के नाजियों और मुसोलिनी के फासिस्टों ने भी यही किया था"
Posted in gandhi, half pant on मई 17, 2007 | 11 Comments »
Technorati tags: hindu nationalism, communalism, gandhi गतांश से आगे : गांधी जी के सचिव प्यारेलाल ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक पूर्णाहुति में सितम्बर , १९४७ में संघ के अधिनायक गोलवलकर से गांधीजी की मुलाकात , विभाजन के बाद हुए दंगों में तथा गांधी – हत्या में संघ की भूमिका का विस्तार से वर्णन किया है । [...]
हम इस आवाज का मतलब समझें
Posted in gandhi, half pant on मई 16, 2007 | 13 Comments »
Technorati tags: mahatma gandhi, communalism, hindu nationalism मेरा यह लेख धर्मयुग , १६ फरवरी १९९१ में छपा था । आज गुजरात के कई गाँवों में ‘हिन्दू राष्ट्र नू माणसा गाम’. हिन्दू राष्ट्र का माणसा ( नाम ) ग्राम जैसी तख्तियाँ लगायी गयी हैं । मध्यप्रदेश के बस अड्डों पर ‘ हिन्दू राज्य ‘ में [...]
मौजूदा चुनाव के लोकतंत्र विरोधी संकेत
Posted in politics, samajwadi janparishad on मई 9, 2007 | 2 Comments »
Technorati tags: assembly elections, election commission, fascism उत्तर प्रदेश का जनादेश स्पष्ट है । मुख्यधारा के किसी दल को बहुमत न देने के मामले में जनता भ्रमित नहीं है । १९९३ में सपा – बसपा गठबन्धन को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद हुए सभी चुनावों के परिणामों से मौजूदा चुनाव अलग नहीं हुए हैं । [...]
सलमान खुर्शीद और चुनाव आयोग का मनमानापन , विभेद
Posted in politics, samajwadi janparishad on मई 7, 2007 | 5 Comments »
Technorati tags: eci, uttar pradesh, electoral roles मुख्य निर्वाचन आयुक्त , भारत का निर्वाचन आयोग , नई दिल्ली . महाशय , २२५ वाराणसी कैन्टोनमेन्ट विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची से हजारों वैध मतदाताओं के नाम गायब होने के सन्दर्भ में मैंने उप चुनाव आयुक्त,मुख्य निर्वाचन अधिकारी तथा जिला निर्वाचन अधिकारी को मतदान की [...]
