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	<title>Comments on: गीकों की &#8216;गूँगी कबड्डी&#8217;</title>
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	<description>वैश्वीकरण विरोध हेतु</description>
	<pubDate>Sun, 20 Jul 2008 07:56:44 +0000</pubDate>
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		<title>By: एग्रीगेटरों के बहाने से at नुक्ताचीनी</title>
		<link>http://samatavadi.wordpress.com/2007/07/07/geekshindi-blogs/#comment-718</link>
		<dc:creator>एग्रीगेटरों के बहाने से at नुक्ताचीनी</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 11 Jul 2007 04:32:34 +0000</pubDate>
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		<description>[...] जी ने गीकी अहंकार की बात की और मैं उससे काफी हद तक सहमत [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] जी ने गीकी अहंकार की बात की और मैं उससे काफी हद तक सहमत [...]</p>
]]></content:encoded>
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		<title>By: arun</title>
		<link>http://samatavadi.wordpress.com/2007/07/07/geekshindi-blogs/#comment-703</link>
		<dc:creator>arun</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 08 Jul 2007 08:33:16 +0000</pubDate>
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		<description>रजनीश मंगला
एक बात तो है, हिन्दी के तकनीकी ज्ञाता से बड़ा हिन्दी का साहित्यकार है, भले ही उसे कंप्युटर के बारे में कुछ भी न पता हो। आपने हिन्दी साहित्य के लिए काम किया है, बड़ा काम है।
भाइ जी ये टाईप राईटर कूटने वाला टैक्नीकल नही होता है,
&lt;b&gt;हमे तो आपकी पोस्ट ही नही समझ मे आयी, किसी भाई को समझ मे आयी हो तो बता दें। मुझ मूढ को तो कुछ पल्ले ही नही पड़ा।&lt;/b&gt;
अरे जीतू भाइ आप कब से सत्य बोलने लगे ,अगर हम मूढ कह देते तो आप बुरा मान जाते,चलो आप ने मान तो लिया,और साथ साथ प्रमाण भी दे दिया मूढ होने का,भाइ ये परि चरचा से भी है काफ़ी सारा और ई मेल को सार्व जनिक करने पर आप नाराज हो अरे ये तो आपके फ़ेमेस होने के घटिया तरीको मे हमेशा शामिल रहा है,भुल गये हो तो सारी मेल मै चिपका दू क्या
मतलब आप कही भी बदतमीजी दिखाओ उसकी छुट दूसरा तमीज तहजीब के साथ बात करे और आप के पास जवाब ना हो तो आप मूढ ,समझ मे नही आया,भाइ रवीश और अविनाश असे पूरी ट्रेनिंग पाये हॊ....
हा हा हा हा हा हा</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>रजनीश मंगला<br />
एक बात तो है, हिन्दी के तकनीकी ज्ञाता से बड़ा हिन्दी का साहित्यकार है, भले ही उसे कंप्युटर के बारे में कुछ भी न पता हो। आपने हिन्दी साहित्य के लिए काम किया है, बड़ा काम है।<br />
भाइ जी ये टाईप राईटर कूटने वाला टैक्नीकल नही होता है,<br />
<b>हमे तो आपकी पोस्ट ही नही समझ मे आयी, किसी भाई को समझ मे आयी हो तो बता दें। मुझ मूढ को तो कुछ पल्ले ही नही पड़ा।</b><br />
अरे जीतू भाइ आप कब से सत्य बोलने लगे ,अगर हम मूढ कह देते तो आप बुरा मान जाते,चलो आप ने मान तो लिया,और साथ साथ प्रमाण भी दे दिया मूढ होने का,भाइ ये परि चरचा से भी है काफ़ी सारा और ई मेल को सार्व जनिक करने पर आप नाराज हो अरे ये तो आपके फ़ेमेस होने के घटिया तरीको मे हमेशा शामिल रहा है,भुल गये हो तो सारी मेल मै चिपका दू क्या<br />
मतलब आप कही भी बदतमीजी दिखाओ उसकी छुट दूसरा तमीज तहजीब के साथ बात करे और आप के पास जवाब ना हो तो आप मूढ ,समझ मे नही आया,भाइ रवीश और अविनाश असे पूरी ट्रेनिंग पाये हॊ&#8230;.<br />
हा हा हा हा हा हा</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: arun</title>
		<link>http://samatavadi.wordpress.com/2007/07/07/geekshindi-blogs/#comment-702</link>
		<dc:creator>arun</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 08 Jul 2007 07:45:21 +0000</pubDate>
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		<description>भाइ जी कहा लपाडियो के चक्कर मे पडे हो,ये जीतू साहब को यहा कष्ट हो रहा है पर जब ये खुद दूसरो के लिये एन ठीक यही करते है तो इन्हे ठीक लगता है,तब जवाब ऐसे ही देते है बदतमीजी और दंभ से भरे..छोडिये भी अब सितारो के आगे जहा और भी है ,कुये से बाह्र निकल आईये .अब्डी सुहानी बयार आ रही है...:०</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>भाइ जी कहा लपाडियो के चक्कर मे पडे हो,ये जीतू साहब को यहा कष्ट हो रहा है पर जब ये खुद दूसरो के लिये एन ठीक यही करते है तो इन्हे ठीक लगता है,तब जवाब ऐसे ही देते है बदतमीजी और दंभ से भरे..छोडिये भी अब सितारो के आगे जहा और भी है ,कुये से बाह्र निकल आईये .अब्डी सुहानी बयार आ रही है&#8230;:०</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: afloo</title>
		<link>http://samatavadi.wordpress.com/2007/07/07/geekshindi-blogs/#comment-701</link>
		<dc:creator>afloo</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 08 Jul 2007 05:57:57 +0000</pubDate>
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		<description>@ जीतू , इस पोस्ट में आप और अमित द्वारा दिए गए कथन निजी ईमेल के नही हैं।या 'चिट्ठाकार' समूह के हैं अथवा 'परिचर्चा' के। गूगल समूह की पोस्ट संजाल पर भी उपलब्ध होती हैं। इसीलिए इन्हें उद्धृत करने के लिए अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है । आप लोगों की महानता से लोग सावधान होते जा रहे हैं ।
@ मेरे बचकाने पर गौर फरमाने के लिए धन्यवाद। कुछ अपनी परिपक्वता पर भी ध्यान दें , समूह हित में ।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>@ जीतू , इस पोस्ट में आप और अमित द्वारा दिए गए कथन निजी ईमेल के नही हैं।या &#8216;चिट्ठाकार&#8217; समूह के हैं अथवा &#8216;परिचर्चा&#8217; के। गूगल समूह की पोस्ट संजाल पर भी उपलब्ध होती हैं। इसीलिए इन्हें उद्धृत करने के लिए अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है । आप लोगों की महानता से लोग सावधान होते जा रहे हैं ।<br />
@ मेरे बचकाने पर गौर फरमाने के लिए धन्यवाद। कुछ अपनी परिपक्वता पर भी ध्यान दें , समूह हित में ।</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: अनूप शुक्ल</title>
		<link>http://samatavadi.wordpress.com/2007/07/07/geekshindi-blogs/#comment-700</link>
		<dc:creator>अनूप शुक्ल</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 08 Jul 2007 05:29:43 +0000</pubDate>
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		<description>अफलातूनजी, मुझे ताज्जुब और वाकई अफ़सोस होता है आपकी इस तरह की बेसिर-पैर की पोस्ट पढ़कर। न कोई सिलसिला न कोई तारतम्य।किसी की कभी कही गयी, कहीं की बात कहीं जोड़ना यह बेहद बचकानापन है। आपकी इस अदा से मुझे बहुत तकलीफ़ होती है। अब तो प्रतिवाद करने और सफ़ाई देने का भी मन नहीं होता।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अफलातूनजी, मुझे ताज्जुब और वाकई अफ़सोस होता है आपकी इस तरह की बेसिर-पैर की पोस्ट पढ़कर। न कोई सिलसिला न कोई तारतम्य।किसी की कभी कही गयी, कहीं की बात कहीं जोड़ना यह बेहद बचकानापन है। आपकी इस अदा से मुझे बहुत तकलीफ़ होती है। अब तो प्रतिवाद करने और सफ़ाई देने का भी मन नहीं होता।</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: Jitu</title>
		<link>http://samatavadi.wordpress.com/2007/07/07/geekshindi-blogs/#comment-699</link>
		<dc:creator>Jitu</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 08 Jul 2007 04:57:58 +0000</pubDate>
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		<description>सबकुछ आप ही कह लीजिए।आरोप भी लगा दीजिए, जवाब भी दे दीजिए, गालियां भी दे दीजिए, फिर अगर हम कुछ कहे तो आप ये पोस्ट लिख दीजिए। बहुत सही।

आपने इतने लोगों का नाम लिया है, वो आपको खुद समझेंगे। वैसे किसी भी व्यक्ति द्वारा भेजी गयी इमेल व्यक्तिगत होती है, आप उसे बिना पूछे सार्वजनिक कर रहे है, इसका मतलब है, सभी लोग सावधान हो जाएं, कि आगे भी आप उनकी इमेल को किसी और सन्दर्भ और किसी और स्थान पर सार्वजनिक कर देंगे। कितने महान है आप!

कंही की ईट और कंही का रोड़ा वाली पोस्ट दिखे है मुझे।हमे तो आपकी पोस्ट ही नही समझ मे आयी, किसी भाई को समझ मे आयी हो तो बता दें। मुझ मूढ को तो कुछ पल्ले ही नही पड़ा।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सबकुछ आप ही कह लीजिए।आरोप भी लगा दीजिए, जवाब भी दे दीजिए, गालियां भी दे दीजिए, फिर अगर हम कुछ कहे तो आप ये पोस्ट लिख दीजिए। बहुत सही।</p>
<p>आपने इतने लोगों का नाम लिया है, वो आपको खुद समझेंगे। वैसे किसी भी व्यक्ति द्वारा भेजी गयी इमेल व्यक्तिगत होती है, आप उसे बिना पूछे सार्वजनिक कर रहे है, इसका मतलब है, सभी लोग सावधान हो जाएं, कि आगे भी आप उनकी इमेल को किसी और सन्दर्भ और किसी और स्थान पर सार्वजनिक कर देंगे। कितने महान है आप!</p>
<p>कंही की ईट और कंही का रोड़ा वाली पोस्ट दिखे है मुझे।हमे तो आपकी पोस्ट ही नही समझ मे आयी, किसी भाई को समझ मे आयी हो तो बता दें। मुझ मूढ को तो कुछ पल्ले ही नही पड़ा।</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: masijeevi</title>
		<link>http://samatavadi.wordpress.com/2007/07/07/geekshindi-blogs/#comment-698</link>
		<dc:creator>masijeevi</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 08 Jul 2007 01:19:06 +0000</pubDate>
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		<description>इस बहस की तार्किक परिणति है कि यह यह यहां तक पहुँचती। हम बार बार इशारों में बार बार इस बात को कह रहे हैं कि भाई ये गीकोसेपियंस इतनी आसान सी बात को समझें कि वे कीबोर्डों और मदरबोर्डों से ही नहीं इंसानों से वयवहार कर रहे हैं, और भाषा की दुनिया में हैं- पर अमितों को अपनी कार्यसूची तय न करने दें।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>इस बहस की तार्किक परिणति है कि यह यह यहां तक पहुँचती। हम बार बार इशारों में बार बार इस बात को कह रहे हैं कि भाई ये गीकोसेपियंस इतनी आसान सी बात को समझें कि वे कीबोर्डों और मदरबोर्डों से ही नहीं इंसानों से वयवहार कर रहे हैं, और भाषा की दुनिया में हैं- पर अमितों को अपनी कार्यसूची तय न करने दें।</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: रजनीश मंगला</title>
		<link>http://samatavadi.wordpress.com/2007/07/07/geekshindi-blogs/#comment-697</link>
		<dc:creator>रजनीश मंगला</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 07 Jul 2007 16:17:00 +0000</pubDate>
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		<description>एक बात तो है, हिन्दी के तकनीकी ज्ञाता से बड़ा हिन्दी का साहित्यकार है, भले ही उसे कंप्युटर के बारे में कुछ भी न पता हो। आपने हिन्दी साहित्य के लिए काम किया है, बड़ा काम है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>एक बात तो है, हिन्दी के तकनीकी ज्ञाता से बड़ा हिन्दी का साहित्यकार है, भले ही उसे कंप्युटर के बारे में कुछ भी न पता हो। आपने हिन्दी साहित्य के लिए काम किया है, बड़ा काम है।</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: एक गीक</title>
		<link>http://samatavadi.wordpress.com/2007/07/07/geekshindi-blogs/#comment-696</link>
		<dc:creator>एक गीक</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 07 Jul 2007 15:19:18 +0000</pubDate>
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		<description>हर गीक दंभी नहीं होता... घमंड तो एक व्यक्तिगत समस्या है. 

न जाने कितने ही गीक्स चुपचाप अपने काम मैं लगें हुयें हैं. वो नहीं बोलते, सिर्फ उनका काम बोलता है. जो गाल बजाते हैं, वो ज्यादा जाने जाते हैं. लेकिन अगर कुछेक लोग ऐसे हों, तो उनकी वजह से क्यों हम उन हज़ारों-लाखों गीको को इस श्रेणी में शामिल करें जो अपने कमरे मैं बैठे बस अपने काम से मतलब रखते हैं. 

चाहे उनका काम दुनिया ने देखा हो, लेकिन शायद ही कोई उनका नाम जाने.

अगर किसी शब्द की ही जरुरत हो... तो क्यों न कोई नया शब्द सोचा जाये. गीक नहीं.

ऐसा इसलिये कहा की ये शब्द गीक... कुछ अपना सा लगता है.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>हर गीक दंभी नहीं होता&#8230; घमंड तो एक व्यक्तिगत समस्या है. </p>
<p>न जाने कितने ही गीक्स चुपचाप अपने काम मैं लगें हुयें हैं. वो नहीं बोलते, सिर्फ उनका काम बोलता है. जो गाल बजाते हैं, वो ज्यादा जाने जाते हैं. लेकिन अगर कुछेक लोग ऐसे हों, तो उनकी वजह से क्यों हम उन हज़ारों-लाखों गीको को इस श्रेणी में शामिल करें जो अपने कमरे मैं बैठे बस अपने काम से मतलब रखते हैं. </p>
<p>चाहे उनका काम दुनिया ने देखा हो, लेकिन शायद ही कोई उनका नाम जाने.</p>
<p>अगर किसी शब्द की ही जरुरत हो&#8230; तो क्यों न कोई नया शब्द सोचा जाये. गीक नहीं.</p>
<p>ऐसा इसलिये कहा की ये शब्द गीक&#8230; कुछ अपना सा लगता है.</p>
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