एक सभा में प्रश्नोत्तरी
प्रश्न : स्वराज के मार्ग में मुख्य विघ्न क्या है ?
उत्तर : अंग्रेज सत्ताधारी सत्ता छोड़ना चाहते नहीं अथवा हम उनके हाथसे बलपूर्वक सत्ता छीन नहीं सकते ।
प्रश्न : आप हिंदुस्तान को साम्राज्य से किस हद तक अलग करेंगे ?
उत्तर : साम्राज्य से पूर्णत: , ब्रिटिश प्रजा से तनिक भी नहीं ।
प्रश्न : क्या आप यह मानते हैं कि हिन्दुस्तान अपना भावि इंग्लैण्ड के साथ अभेद्यरूप से जोड़ेगा ?
उत्तर : हाँ , जब तक वह भागीदार रहेगा तब तक । लेकिन जब वह यह देखेगा कि यह भागीदारी राक्षस और बौने के बीच की है , या उस भागीदारी का उपयोग दूसरी प्रजाओं को लूटने के लिए हो रहा है , तो वह भागीदारी तोड़ देगा ।
प्रश्न : आपको स्वराज देने में हमारी भूल नहीं होगी ?
उत्तर : मेरे खयाल से आप अगर किसी को स्वराज दें तो वह भूल हो सकती है , सही ।
प्रश्न : (इंग्लैण्ड निवासी भारतीयों को ): हिन्दुस्तान की उत्तम सेवा किस प्रकार हो सकती है ?
उत्तर :आपकी बुद्धि को पैसों में भुनाने के बदले उसे देश सेवामें इस्तेमाल करने से ।
( मारूं जीवन ए ज मारी वाणी खण्ड ३ से उद्धृत )
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अफलातून जी
एकदम अलहदा छवि है यहा बापू की….
फुटकर में कब तक पढ़ना पड़ेगा…..
अब तक के सब लेख पढ़े। एक व्यक्ति शासक के देश जाकर भी इतना आदर सम्मान पा सके और अर्धनग्न अवस्था में भी इतने लोगों का हृदय सम्राट बने, यह अद्भुत बात है। आम तौर पर लोग पैसे,समाज में अपने रुतबे, रूप, वस्त्रों , वैभव , शक्ति आदि के कारण जाने जाते हैं ।
इस व्यक्ति में ऐसा क्या था कि इन सबके बिना ही उनका व्यक्तित्व लोगों को उनकी राह पर चलने को मजबूर कर देता था ?
बड़ी बातें तो सब राजनेता कर लेते हैं । जो बात इन्हें और सब से अलग करती है वह शायद इनकी कथनी व करनी में कोई विरोध ना होना था।
यदि आप यह बता सकें कि इस पुस्तक को कैसे प्राप्त किया जा सकता है तो आपका आभार होगा।
( मैं गाँधी जी की हर बात से सहमत नहीं हूँ । किन्तु असहमति के लिये तो उनके विषय में और अधिक जानना और भी अधिक आवश्यक है। )
घुघूती बासूती