बम धमाके : सच के अंश वाली अफवाहें
November 23, 2007 by अफ़लातून
अफवाहों में सच का अंश होता है । कुछ ऐसा तत्व जो अफवाह को विश्वसनीय बना देता है । उत्तर प्रदेश के तीन जिला मुख्यालयों की कचहरियों में एक साथ हुए बम विस्फोटों के बाद हाल ही में हुईं दो घटनाओं से जनता ने इनका सम्बन्ध जोड़ा । आतंकी घटनाओं के पक्ष में कोई तर्क नहीं दिया जा सकता परन्तु आज हुई अमानुषिक कारगुजारी से जनता ने दो घटनाओं को जोड़ा।
लखनऊ की कचहरी में पेश कुछ आतंकवादियों की वकीलों द्वारा पिटायी पहली घटना है । बनारस में इस ‘कारण’ से ज्यादा महत्व एक अन्य घटना को मिला । आज से तीन दिन पहले बनारस की अदालत में हत्या के एक मामले में एक विधायक - माफिया-अभियुक्त के खिलाफ़ एक अन्य माफिया-विधायक द्वारा गवाही दिया जाना - दूसरी घटना है। आज के धमाकों के समय गवाही देने वाले विधायक के कचहरी परिसर में मौजूद होने की चर्चा से इस अफवाह को और बल मिला।
जनता यह मानती है कि हत्या अभियुक्त विधायक तीनों शहरों में एक साथ धमाके करवाने की औकात रखता है । हत्या अभियुक्त विधायक है सपा समर्थित विधायक मुख़्तार अन्सारी जिस पर लगे अवधेश राय हत्याकाण्ड में भाजपा विधायक अजय राय ने गवाही दी है । अवधेश अजय के भाई थे ।


वाह रे मेरे अफलातून,क्या उन आतंकवादियों से ठेका मिला है आपको इमेज सुधारने का,ये तो बेशर्सी की हद है.क्या फोन आया था आपके पास
पर उनका ई मेल जरूर मिल चुका है
वाह रे, मिहिरभोज ! भाजपा विधायक अजय राय का वक्तव्य पढ़ लो - यह कहने लगो कि ‘तमाम अखबार भी आतंकवादियों की इमेज सुधार रहे थे’ तो बात अलग है। कल की घटना से अजय राय के बयान को अपने कालराज मिश्र ने भी जोड़ा है ।
तब तीन जगह धमाके करवाने की क्या जरूरत थी?
मिहिरभोज, आप ऐसे क्यों बात करते हैं। हमेशा अंधराष्ट्रवाद के पैमाने पर चीज़ों को नहीं तौला करते भाई। शक तो हमेशा किया जाना चाहिए। चाहे वो इराक पर अमेरिकी हमला क्यों न हो, और गुजरात में मोदी के इशारे पर मुसलमानों के क़त्लेआम की घटना क्यों न हो। मैं अफलातून जी के साथ हूं।