हमने मोदी को वोट क्यों दिया : त्रिदिप सुहृद का यह लेख आज ‘हिन्दुस्तान’ में प्रकाशित हुआ है तथा यहाँ उसकी पी.डी.एफ़. फ़ाइल साभार प्रस्तुत है ।
इस लेख को यहाँ प्रस्तुत करते वक्त कुछ टिप्पणियाँ की जा रही हैं ।
चिट्ठेकार संजय बेंगाणी और सागरचन्द नाहर मुख्यमन्त्री नरेन्द्र मोदी से बेहतर गुजराती बोलते हैं । दोनों चिट्ठेकारों को सुना है अथवा गुजराती में चैटियाया है । मुख्यमन्त्रीश्री की ‘गुजराती’ को भी सुना है । इससे क्या फर्क पड़ता है? ओड़िसा के मुख्यमन्त्री नवीन पटनायक से मैं बेहतर ओड़िया बोल लेता हूँ और मुमकिन है कि चिट्ठेकार प्रमोद सिंह भी । अब आती है गुजरात-गौरव की बात ! त्रिदिप सुहृद के गुजरात के प्रति गौरव और मोदी की जीत पर अमेरिका में शैम्पेन की बोतलें खोलने वाले अनिवासी गुजरातियों और गुजु नवधनाढ्यों के गौरव में जो फर्क है वह इस सुन्दर आलेख से स्पष्ट है ।
त्रिदिप जी गुजरात के एक प्रमुख प्रबन्ध संस्थान में प्रोफ़ेसर हैं और गाँधी प्रेमी हैं। केन्द्र में राजग की सरकार के शासन काल में सम्पूर्ण गांधी वांग्मय के इलेक्ट्रॉनिक संस्करण को ‘सम्पादित ‘ कर दिया गया था, तब त्रिदिप जी ने इकॉनॉमिक एण्ड पॉलिटिकल वीकली में लिखे लेख में एक तालिका बना कर इस कुकृत्य के बेनकाब करने में अहम भूमिका निभाई थी । गुजरात के त्रिदिप सुहृद सरीखे सम्मानित नागरिकों से उस सूबे की लाज बचती है !
