Posted on January 22, 2008 by अफ़लातून
वे हर वक्त पिले रहते हैं
इतिहास में अपनी जगह बनाने में
सिर्फ उन्हें मालूम है
कितनी जगह है इतिहास में
शायद इसीलिए वे एक दूसरे को
धकियाते रहते हैं हर वक्त
उनकी धक्कामुक्की
मुक्कामुक्की से बनता है
उनका इतिहास
इस तरह
इतिहास में अपनी जगह बना
लेने के बाद
वे तय करते हैं
इतिहास में दूसरों की जगह
जो इतिहास में उनकी बतायी
हुई जगह पर
रहने को राजी नहीं [...]
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Posted on January 3, 2008 by अफ़लातून
पिछले भाग : प्रथम , द्वितीय
सोवियत संघ जैसी व्यवस्था की वकालत करने वाले प्रभात पटनायक को इस बात का भी जवाब देना होगा कि आखिर क्यों सोवियत संघ एवं अन्य साम्यवादी देश ताश के पत्तों की तरह बिखर गए ? उनमें क्या अन्तर्विरोध थे ?क्या ऐसा नहीं है कि पूंजीवादी देशों जैसा ही औद्योगीकरण करने के [...]
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Posted on January 1, 2008 by अफ़लातून
Technorati tags: वामपंथ, व्यामोह, बुद्धदेव, प्रभात पटनायक, औद्योगीकरण
भाग एक यहाँ पढ़ें
पश्चिम बंग की सरकार जिस प्रकार का औद्योगीकरण कर रही है , उसके खिलाफ यह एक स्पष्ट बयान है । पश्चिम बंग सरकार और माकपा नेतृत्व के इस तर्क को पटनायक अस्वीकार कर देते हैं कि पश्चिम बंगाल के विकास के लिए एवं बेरोजगारी की [...]
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