कविता : इतिहास में जगह : राजेन्द्र राजन

वे हर वक्त पिले रहते हैं
इतिहास में अपनी जगह बनाने में
 
सिर्फ उन्हें मालूम है
कितनी जगह है इतिहास में
शायद इसीलिए वे एक दूसरे को
धकियाते रहते हैं हर वक्त
 
उनकी धक्कामुक्की
मुक्कामुक्की से बनता है
उनका इतिहास
 
इस तरह
इतिहास में अपनी जगह बना
लेने के बाद
वे तय करते हैं
इतिहास में दूसरों की जगह
 
जो इतिहास में उनकी बतायी
हुई जगह पर
रहने को राजी नहीं [...]

भोगवाद और ‘ वामपंथ का व्यामोह ‘ (३) : ले. सुनील

  पिछले भाग : प्रथम , द्वितीय 
सोवियत संघ जैसी व्यवस्था की वकालत करने वाले प्रभात पटनायक को इस बात का भी जवाब देना होगा कि आखिर क्यों सोवियत संघ एवं अन्य साम्यवादी देश ताश के पत्तों की तरह बिखर गए ? उनमें क्या अन्तर्विरोध थे ?क्या ऐसा नहीं है कि पूंजीवादी देशों जैसा ही औद्योगीकरण करने के [...]

वामपंथ का व्यामोह (२) : ले. सुनील

Technorati tags: वामपंथ, व्यामोह, बुद्धदेव, प्रभात पटनायक, औद्योगीकरण
   भाग एक यहाँ पढ़ें
 पश्चिम बंग की सरकार जिस प्रकार का औद्योगीकरण कर रही है , उसके खिलाफ यह एक स्पष्ट बयान है । पश्चिम बंग सरकार और माकपा नेतृत्व के इस तर्क को पटनायक अस्वीकार कर देते हैं कि पश्चिम बंगाल के विकास के लिए एवं बेरोजगारी की [...]