कविता : इतिहास में जगह : राजेन्द्र राजन
January 22, 2008 by अफ़लातून
वे हर वक्त पिले रहते हैं
इतिहास में अपनी जगह बनाने में
सिर्फ उन्हें मालूम है
कितनी जगह है इतिहास में
शायद इसीलिए वे एक दूसरे को
धकियाते रहते हैं हर वक्त
उनकी धक्कामुक्की
मुक्कामुक्की से बनता है
उनका इतिहास
इस तरह
इतिहास में अपनी जगह बना
लेने के बाद
वे तय करते हैं
इतिहास में दूसरों की जगह
जो इतिहास में उनकी बतायी
हुई जगह पर
रहने को राजी नहीं होते
उन्हें वे रह रहकर
इतिहास से बाहर कर देने की धमकियाँ देते हैं
उनकी धमकियों का असर होता है
तभी तो इतिहास में
उचित स्थान पाने के इच्छुक
बहुत-से लोग
जहां कह दिया जाता है
वहीं बैठे रहते हैं
कभी उठकर खड़े नहीं होते ।
- राजेन्द्र राजन
स्रोत : सामयिक वार्ता/जनवरी २००८
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अरे भाई! इन राजेन्द्र जी से तो मेल-मुलाकात करवाइए . इनका लिखा इतना भाने लगा है कि क्या कहा जाए !
bahut khub
अच्छी कविता. धन्यवाद!
बहुत सही!!
achchhi vishay vastu ko achchhe shilp men prastut kiya hai.
ये शिमला वाले राजेन्द्र राजन जी हैं क्या ?
@ Pratyaksha, Rajendra Rajan Banaras waley hain aur Dilli Janasatta ke sampadakeey prabhag mein hain.