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	<title>Comments on: कोला कम्पनियों की करतूतें</title>
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	<description>वैश्वीकरण विरोध हेतु</description>
	<pubDate>Wed, 14 May 2008 00:18:57 +0000</pubDate>
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		<title>By: कमल शर्मा</title>
		<link>http://samatavadi.wordpress.com/2008/02/01/colacompanieskartoot/#comment-1175</link>
		<dc:creator>कमल शर्मा</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 02 Feb 2008 06:33:53 +0000</pubDate>
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		<description>” अधिक मात्रा में शीतल पेय पीने से उत्पन्न स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए स्कूल बोर्डों को एहतियात के तौर पर इनकी बिक्री पर रोक लगानी चाहिए.बच्चों की रोजाना खुराक में ये पेय अतिरिक्त चीनी का मुख्य स्रोत हैं . इन पेयों के १२ आउन्स के एक टिन अथवा मशीन से परोसी गयी इतनी ही मात्रा में १० चम्मच चीनी का प्रभाव रहता है . ५६ से ८५ प्रतिशत स्कूली बच्चे हर रोज कम से कम एक बार यह पेय अवश्य पीते हैं . शीतल पेय पीने की मात्रा बढने के साथ - साथ दूध पीने की मात्रा घटती जाती है . इन चीनीयुक्त शीतल पेयों के पीने से मोटापा बढने का सीधा सम्बन्ध है.

आपने बिलकुल सही कहा है। आजकल कोई भी बच्‍चा भारतीय पौष्टिक खाने की जगह पिजा, बर्गर और कोक ही चाहता है। इससे स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी बीमारियों के अलावा याददाशत पर भी असर पड़ता है। साथ ही हमेशा बच्‍चे को पेट दर्द की पीड़ा झेलनी पड़ती है। मैं ने बुरी तरह पीछे पड़कर अपनी बेटी की आदत छुड़ाई है सो मुझे पता है। इन पेय और खानों पर रोक लगनी चाहिए। कोई भी डॉक्‍टर आपको यदि यह सिफारिश करता मिले की कोक रोज पिये, पिजा खाएं या बर्गर पेट में डाले तो मुझे बताना। संभवत: ये कंपनियां दुनिया भर से एक भी ऐसा डाक्‍टर खोज कर नहीं बता सकती जो इनहें खाने पीने की सलाह देता हो।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>” अधिक मात्रा में शीतल पेय पीने से उत्पन्न स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए स्कूल बोर्डों को एहतियात के तौर पर इनकी बिक्री पर रोक लगानी चाहिए.बच्चों की रोजाना खुराक में ये पेय अतिरिक्त चीनी का मुख्य स्रोत हैं . इन पेयों के १२ आउन्स के एक टिन अथवा मशीन से परोसी गयी इतनी ही मात्रा में १० चम्मच चीनी का प्रभाव रहता है . ५६ से ८५ प्रतिशत स्कूली बच्चे हर रोज कम से कम एक बार यह पेय अवश्य पीते हैं . शीतल पेय पीने की मात्रा बढने के साथ - साथ दूध पीने की मात्रा घटती जाती है . इन चीनीयुक्त शीतल पेयों के पीने से मोटापा बढने का सीधा सम्बन्ध है.</p>
<p>आपने बिलकुल सही कहा है। आजकल कोई भी बच्‍चा भारतीय पौष्टिक खाने की जगह पिजा, बर्गर और कोक ही चाहता है। इससे स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी बीमारियों के अलावा याददाशत पर भी असर पड़ता है। साथ ही हमेशा बच्‍चे को पेट दर्द की पीड़ा झेलनी पड़ती है। मैं ने बुरी तरह पीछे पड़कर अपनी बेटी की आदत छुड़ाई है सो मुझे पता है। इन पेय और खानों पर रोक लगनी चाहिए। कोई भी डॉक्‍टर आपको यदि यह सिफारिश करता मिले की कोक रोज पिये, पिजा खाएं या बर्गर पेट में डाले तो मुझे बताना। संभवत: ये कंपनियां दुनिया भर से एक भी ऐसा डाक्‍टर खोज कर नहीं बता सकती जो इनहें खाने पीने की सलाह देता हो।</p>
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		<title>By: - लावण्या</title>
		<link>http://samatavadi.wordpress.com/2008/02/01/colacompanieskartoot/#comment-1174</link>
		<dc:creator>- लावण्या</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 01 Feb 2008 20:52:10 +0000</pubDate>
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		<description>बिलकुल सही विश्लेषण किया है आपने !
आपकी पोस्ट का इन्तज़ार रहेगा -</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>बिलकुल सही विश्लेषण किया है आपने !<br />
आपकी पोस्ट का इन्तज़ार रहेगा -</p>
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