नौ ऑनलाइन पुस्तिकाएँ

नीचे प्रस्तुत पुस्तिकाएँ मैंने अपने चिट्ठों समाजवादी जनपरिषद , तथा  यही है वह जगह पर समय-समय पर धारावाहिक तौर पर पेश की थीं। यहाँ इनमें से नौ पुस्तिकाओं को पी.डी.एफ़ फाइल के तौर पर प्रस्तुत करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है । पुस्तिकाओं और प्रस्तुति पर सुझाव और प्रतिक्रिया का स्वागत है ।

विदेशी पूँजी से विकास का अन्धविश्वास : सुनील  ,

 भारत भूमि पर विदेशी टापू  ,

क्या वैश्वीकरण का मानवीय चेहरा संभव है ? - सुनील

औद्योगीकरण से विकास का अन्धविश्वास : सुनील

बातचीत के मुद्दे : किशन पटनायक

हिन्दू बनाम हिन्दू

राम , कृष्ण , शिव : राममनोहर लोहिया

कृष्ण : डॉ. राममनोहर लोहिया

उपभोक्तावादी संस्कृति : गुलाम मानसिकता की अफ़ीम

4 Responses

  1. अफलातून जी, इन पुस्तिकाओं का एक ही स्थान पर उपलब्ध होना पाठक के लिए बहुत सुविधाजनक होगा । मैंने पहली पुस्तिका खोलकर देखी, पढ़ना बहुत सुविधाजनक लगा । अन्य बातें तो जानकार लोग ही बता सकते हैं । मैं केवल इतना समझ सकती हूँ कि इन्हें उपलब्ध कराने में बहुत मेहनत व अपने विचारों जो इन लेखकों के भी रहे होंगे, में प्रगाढ़ विश्वास की आवश्यकता रही होगी ।
    आपको बहुत बहुत बधाई ।
    घुघूती बासूती

  2. बहुत आभार,
    पहले भी पढे हुये थे लेकिन अब सहेजकर रख लिया है ।

  3. लोहिया का पूरा साहित्य अभी प्रकाशित हुआ है. बहुत महंगा है. पूरा यहां आ जाये तो ठीक रहेगा.

  4. इन पुस्तिकाओं को एक स्थान पर उपलब्ध करवा कर आपने पाठकों को एक अनूठा उपहार दिया है . पढने-पढवाने और लिंक देने में इससे इतनी सुविधा हुई है कि क्या कहूं .

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