राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने पिछले साल नवम्बर की छह तारीख को पश्चिम बंगाल के नन्दीग्राम में हुई मौतों के लिए राज्य की बुद्धदेव सरकार की ढील को जिम्मेदार ठहराया है। इस सम्बन्ध में अपनी रिपोर्ट जारी करते हुए एनएचआरसी ने कहा है कि राज्य सरकार को खुद उस हिंसा की जिम्मेदरी लेनी चाहिए और यदि वह ऐसा नहीं करती तो उसे इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।
नन्दीग्राम में नवम्बर की बहुचर्चित हिंसा के दौरान लोगों के मारे जाने तथा सम्पत्ति के नुकसान को दुर्भाज्ञपूर्ण करार देते हुए एनएचआरसी ने माकपा की अगुआई वाली प्रदेश की वामपंथी सरकार को ही समग्र रूप से इसके लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि नंदीग्राम में माकपा कार्यकर्ताओं ने हमला किया। उसके बाद हिंसा में कई जानें गयीं और सम्पत्ति का नुकसान हुआ। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है ‘‘ऐसा लगता है कि पश्चिम बंगाल सरकार माकपा कार्यकर्ताओं के हमले को रोकने में नाकाम रही है और इस तरह अपने दायित्व के निर्वाह में विफल रही है।’’ रिपोर्ट में कहा गया है ‘‘हमले के बाद भड़की हिंसा और उसमें लोगों के मारे जाने तथा उनकी सम्पत्ति के नुकसान की जिम्मेदारी वाम मोर्चा सरकार को लेनी चाहिए।’’
आयोग ने कहा कि मरने वाले लोगों के निकटतम सम्बन्धियों को मुआवजा दिया जाना चहिए। इस घटना के पीड़ितों को भी कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार ही मुआवजा राशि दी जानी चाहिए। उल्लेखनीय है कि पिछले साल 14 मार्च को नन्दीग्राम में मारे गये लोगों के निकटतम परिजनों को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पांच-पांच लाख रूपये मुआवजा दिये जाने का आदेश दिया था। न्यायालय ने घटना में घायल होने वाले लोगों को एक एक लाख रूपये तथा बलात्कार पीड़ितों को दो-दो लाख रूपये मुआवजा देने के आदेश दिये थे।
आयोग ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है ‘‘हमले के दौरान पूर्ण रूप से तथा आंशिक रूप से मकानों की क्षति के लिए जो मुआवजा तय किया है वह अपर्याप्त है और मुआवजे की राशि और बढ़ायी जानी चहिए।’’ आयोग ने संजय पारिख नामक व्यक्ति की शिकायत के बाद प्रदेश सरकार से 6 नवम्बर 2007 की घटना पर जवाब तलब किया था।
राज्य के मुख्य सचिव ने आयोग को दिये अपने जवाब में कहा था कि इसमें 560 घर पूर्ण रूप से तथा 399 घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 10 हजार रूपये तथा आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए पांच हजार रूपये मुआवजा देने का प्रस्ताव है। प्रत्येक प्रभावित परिवार को बर्तन तथा घरेलू सामान खरीदने के लिए भी एक हजार रूपये मुआवजा दिये जाने का प्रस्ताव है।
आयोग के जांच दल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 6 नवम्बर की घटना के बाद माकपा कार्यकर्ताओं ने भूमि उच्छेद प्रतिरोध समिति (बीयूपीसी) के समर्थकों के मकानों पर कब्जा कर लिया है और वे इन घरों के मालिक होने का दावा कर मुआवजे की मांग कर रहे हैं। आयोग ने ‘‘क्षति के लिए मुआवजा तय करने के वास्ते एक समिति का गठन करने को आवश्यक बताया है। इससे सुनिश्चित किया जा सकेगा कि मुआवजे की राशि सही लोगों को मिले।’’
मीडिया में आयी इन खबरों पर आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया। पुलिसिया कार्रवाई पर हाईकोर्ट ने भी जांच केन्द्रीय जांच ब्यूरो से कराने का आदेश दिया था। ( आयोग के ८ फरवरी, २००८ के आदेश के आधार पर )
नन्दीग्राम पर मानवाधिकार आयोग
February 10, 2008 by अफ़लातून


18 जून 2008 को नन्दीग्राम से होकर लौटा हूँ.
अभी भी हालात नहीं बदले