‘शेक्सपियर गुजर गए ,कीट्स नहीं रहे,मेरी तबीयत भी कुछ नासाज़-सी है’-मार्क ट्वेन

आपात-काल के आखिरी दौर में लोकनायक जयप्रकाश के गुर्दों के बिगड़ने के बाद उन्हें कुछ दिन चंडीगढ़ के स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान में रखा गया फिर मुम्बई ले आया गया ।जसलोक अस्पताल में डाइलिसिस होती और गैर-डाइलिसिस दिनों में वे अपने मित्र अखबार मालिक रामनाथ गोयनका के  एक अतिथि गृह में आराम करते । दोनों ही [...]