गांधी बनाम अम्बेडकर की बहस में गांधी जी की धारा के दो प्रमुख उत्तराधिकारियों - डॉ. लोहिया और जयप्रकाश नारायण के आन्दोलनों में सामाजिक परिवर्तन के कार्यक्रमों को नजरअन्दाज करने पर बहस अपूर्ण रहेगी । संपूर्ण क्रांति के आन्दोलन के बीच लोकनायक जयप्रकाश की उपस्थिति में तोड़ी गयी जनेऊ का ढेर लग जाता था तथा हजारों नवयुवकों [...]
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‘हरिजन’ शब्द शाश्वत रहे , यह गांधी जी नहीं चाहते थे । ‘अछूत’ शब्द के प्रति उनका विरोध था , इसीलिए वे यहाँ तक मानते थे कि ‘ स्वराज्य में दफ़ा १२४ राजद्रोह के लिए नहीं होगी , परन्तु हरिजनों को अछूत कहने वाले के विरुद्ध होगी।’ ( महादेवभाई की डायरी , खण्ड दो , [...]
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गांधी जी और कांग्रेस ने दूसरी गोलमेज वार्ता के बाद पहली बार डॉ. अम्बेडकर को दलितों के प्रतिनिधियों के रूप में मान्यता दी । इसी लिए पूना करार में डॉ. अम्बेडकर को एक पक्ष बनाया गया । ये दोनों विभूतियाँ दलित समस्या के प्रति एक दूसरे के दृष्टिकोण से अच्छी तरह वाकिफ़ थीं । [...]
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जहाँ तक मनुस्मृति , गीता आदि ग्रन्थों के दलित विरोध को पुष्ट करने का प्रश्न है , गांधी जी का दृष्टिकोण स्पष्ट है ।उन्हें यह विश्वास था कि वे हिन्दू धर्म का एक सुधरा स्वरूप भारतीय समाज से ग्रहण करवा लेंगे । उनके दृष्टिकोण को प्रकट करने वाला निम्नलिखित पत्र अलीगढ़ विश्वविद्यालय के संस्कृत के [...]
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लोकनायक जयप्रकाश और महात्मा गांधी के जीवन और विचार यात्राओं के विकासक्रम को नजरअन्दाज करके विसंगतिपूर्ण उद्धरण प्रस्तुत किए जाँए तो बहुत आसानी से जे.पी को मार्क्सवादी और गांधीजी को जाति - प्रथा का पक्षधर होने के भ्रामक निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं । गांधी जी को इस प्रकार की विसंगतियों की परवाह नहीं [...]
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Technorati tags: गांधी, अम्बेडकर, gandhi, ambedkar
भाग एक
गांधीजी पर कांशीराम ने कानपुर में हुए एक पिछड़ी जाति सम्मेलन में एक आरोप लगाया था कि उन्होंने सरदार पटेल की उपेक्षा करके पंडित जवाहरलाल नेहरू को प्रधानमन्त्री की कुर्सी दिलवाई थी । इस आरोप की छानबीन करना गैरजरूरी है लेकिन इस आरोप के पीछे जो मक़सद छिपा [...]
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[ मेरे नेता किशन पटनायक ने मुझसे ' गांधी - अम्बेडकर ' पर गहराई से अध्ययन करने के लिए कहा था। फलस्वरूप मैंने 'गांधी - अम्बेडकर और मिट्टी की पट्टियाँ' शीर्षक से लम्बा लेख लिखा । दल की पत्रिका 'सामयिक वार्ता' में यह अक्टूबर १९९४ में प्रकाशित हुआ तथा अन्य भाषाओं में इसका अनुवाद भी [...]
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Posted in Uncategorized on April 15, 2008 | 6 Comments »
पिछला हिस्सा
” आप कहेंगे यह कहानी तो पुरानी है । पन्द्रह दिन पहले की घटना बताऊँ ? सोपाला में हमारा एक सम्मेलन था । हमने एक टैक्सीवाले को रोका था , उसे पेशगी भी दी थी । उसने पैसे हजम कर लिए और दर्शन ही नहीं दिए । टांगे वालों की खुशामद की लेकिन [...]
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[ आज बाबासाहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जन्म तिथि है । १९३२ में पुणे के यरवड़ा जेल में उनकी और गाँधीजी की अंग्रेजों द्वारा घोषित पृथक निर्वाचन मन्डल पर वार्ता चली जिसके फलस्वरूप प्रसिद्ध पूना समझौता हुआ । इसी दौर में बाबासाहब ने अपने जीवन की आपबीती गांधीजी के सचिव और 'हरिजन' पत्र के सम्पादक महादेव देसाई को [...]
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शिक्षा की अपनी एक दुनिया है । वहीं शिक्षा-जगत व्यापक विश्व का एक हिस्सा भी है - एक उप व्यवस्था । उप व्यवस्था होने के कारण व्यापक विश्व के- मूल्य , विषमतायें , सत्ता सन्तुलन आदि के प्रतिबिम्ब आप यहाँ भी देख सकते/सकती हैं । हर जमाने की शिक्षा व्यवस्था उस जमाने के मूल्य [...]
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