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	<title>Comments on: शिक्षा , मलाईदार परतें और गैर आरक्षित क्रीमी लेयर</title>
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	<description>वैश्वीकरण विरोध हेतु</description>
	<pubDate>Sun, 20 Jul 2008 08:04:21 +0000</pubDate>
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		<title>By: ghughutibasuti</title>
		<link>http://samatavadi.wordpress.com/2008/04/11/creamy_layer_highereducation/#comment-1244</link>
		<dc:creator>ghughutibasuti</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 16 Apr 2008 16:46:39 +0000</pubDate>
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		<description>कृपया इस विषय पर बहुत विस्तार से लिखिये । तभी शायद आप मुझ जैसे लोगों को समझा पाएँगे कि ओ बी सी आरक्षण सही है, विशेषकर दूसरी, तीसरी पीढ़ी व अच्छे पदों पर आसीन लोगों व रूपये पैसे वाले लोगों के बच्चों के लिए  । अन्यथा हम जैसों के मन में कड़ुवाहट भरी रहेगी, जो कि समाज के लिए सही नहीं है ।
घुघूती बासूती</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>कृपया इस विषय पर बहुत विस्तार से लिखिये । तभी शायद आप मुझ जैसे लोगों को समझा पाएँगे कि ओ बी सी आरक्षण सही है, विशेषकर दूसरी, तीसरी पीढ़ी व अच्छे पदों पर आसीन लोगों व रूपये पैसे वाले लोगों के बच्चों के लिए  । अन्यथा हम जैसों के मन में कड़ुवाहट भरी रहेगी, जो कि समाज के लिए सही नहीं है ।<br />
घुघूती बासूती</p>
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		<title>By: हर्षवर्धन</title>
		<link>http://samatavadi.wordpress.com/2008/04/11/creamy_layer_highereducation/#comment-1230</link>
		<dc:creator>हर्षवर्धन</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 12 Apr 2008 01:55:23 +0000</pubDate>
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		<description>अफलातून जी
‘खुला दाखिला ,सस्ती शिक्षा । लोकतंत्र की यही परीक्षा’
यानी कम से कम इस परीक्षा में तो लोकतंत्र पास नहीं हो पाया है। वैसे सुप्रीमकोर्ट ने क्रीमीलेयर को बाहर निकालकर आरक्षण की विसंगति और जरूरत को धीरे धीरे खत्म करने का रास्ता दिखाया है। बस सवाल यही है कि कहीं सरकारें और नेता इसका भी इस्तेमाल आगे आरक्षण को जिंदा रखने में न कर लें।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अफलातून जी<br />
‘खुला दाखिला ,सस्ती शिक्षा । लोकतंत्र की यही परीक्षा’<br />
यानी कम से कम इस परीक्षा में तो लोकतंत्र पास नहीं हो पाया है। वैसे सुप्रीमकोर्ट ने क्रीमीलेयर को बाहर निकालकर आरक्षण की विसंगति और जरूरत को धीरे धीरे खत्म करने का रास्ता दिखाया है। बस सवाल यही है कि कहीं सरकारें और नेता इसका भी इस्तेमाल आगे आरक्षण को जिंदा रखने में न कर लें।</p>
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		<title>By: सृजन शिल्पी</title>
		<link>http://samatavadi.wordpress.com/2008/04/11/creamy_layer_highereducation/#comment-1229</link>
		<dc:creator>सृजन शिल्पी</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Apr 2008 17:01:12 +0000</pubDate>
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		<description>आरक्षण लागू करने को लेकर सरकार के इरादे कभी नेक नहीं रहे, इसलिए वह उसके लाभ से वंचित वर्गों में सदभाव और भरोसा नहीं जगा सकी। दलितों, आदिवासियों और पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण के मानदंड अलग-अलग हैं। क्रीमीलेयर की परिभाषा त्रुटिपूर्ण है और उसके दायरा अत्यंत अयथार्थवादी। 

इस संबंध में मेरी विस्तृत टिप्पणी कृपया निम्न लिंक पर देखें -
http://srijanshilpi.com/?p=160</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आरक्षण लागू करने को लेकर सरकार के इरादे कभी नेक नहीं रहे, इसलिए वह उसके लाभ से वंचित वर्गों में सदभाव और भरोसा नहीं जगा सकी। दलितों, आदिवासियों और पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण के मानदंड अलग-अलग हैं। क्रीमीलेयर की परिभाषा त्रुटिपूर्ण है और उसके दायरा अत्यंत अयथार्थवादी। </p>
<p>इस संबंध में मेरी विस्तृत टिप्पणी कृपया निम्न लिंक पर देखें -<br />
<a href="http://srijanshilpi.com/?p=160" rel="nofollow">http://srijanshilpi.com/?p=160</a></p>
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		<title>By: दीपक भारतदीप</title>
		<link>http://samatavadi.wordpress.com/2008/04/11/creamy_layer_highereducation/#comment-1228</link>
		<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Apr 2008 16:14:00 +0000</pubDate>
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		<description>आप अपनी स्पष्ट राय नहीं रख पाए या मैं समझा नहीं.
दीपक भारतदीप</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आप अपनी स्पष्ट राय नहीं रख पाए या मैं समझा नहीं.<br />
दीपक भारतदीप</p>
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		<title>By: सुजाता</title>
		<link>http://samatavadi.wordpress.com/2008/04/11/creamy_layer_highereducation/#comment-1227</link>
		<dc:creator>सुजाता</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Apr 2008 15:24:39 +0000</pubDate>
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		<description>आरक्षण केवल रास्ता हो सकता है ...मंज़िल नही । लेकिन आरक्षण उस मंज़िल तक ले जा भी पायेगा या ले जा पा रहा है  ?सवाल ही सवाल हैं अभी तो मन में । बहुत जल्दबाज़ी में आरक्षण पर राय भी नही कायम की जा सकती ।
कृपया इस विषय पर विस्तार से लिखिये कुछ !</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आरक्षण केवल रास्ता हो सकता है &#8230;मंज़िल नही । लेकिन आरक्षण उस मंज़िल तक ले जा भी पायेगा या ले जा पा रहा है  ?सवाल ही सवाल हैं अभी तो मन में । बहुत जल्दबाज़ी में आरक्षण पर राय भी नही कायम की जा सकती ।<br />
कृपया इस विषय पर विस्तार से लिखिये कुछ !</p>
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	<item>
		<title>By: manish joshi</title>
		<link>http://samatavadi.wordpress.com/2008/04/11/creamy_layer_highereducation/#comment-1226</link>
		<dc:creator>manish joshi</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Apr 2008 12:22:02 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://samatavadi.wordpress.com/?p=284#comment-1226</guid>
		<description>बात सही है - उम्मीद कम है - सस्ती शिक्षा का अधिकार सही है लेकिन काफी नहीं है  समता के सही माने बनाने की ज़रूरत प्राथमिक स्तर से है पर विवाद स्नातक, स्नातकोत्तर है - गरीब बच्चा (हमारे देश में) अपना समय कमाने में डालता है - शिक्षा लेने के पैसे दीजिये उसे पूरा परिवार चलाने के -  तब शायद आए -  सीताराम का वाकया याद आता है -  बीस एक  साल पहले का - परिवार चलाने के लिए सपरिवार करीब सारे दिन मशक्कत करने के साथ साथ कॉलेज करना चाहता था - आरक्षण भी मिला - कुछ छात्रवृत्ति भी - (जिसका हिस्सा दफ्तर के बाबू को देना पड़ता था) -  परिवार को भी मनाया - लेकिन गुरुजनों ने पास ही नहीं होने दिया -  शायद सच कहा कि कमज़ोर है -  सहपाठी हीन बनाते रहे - पर बताएं वह मेधावी, हुसियार होता तो होता कैसे ? जैसे पला बढ़ा - उसे रत्ती भर मौका नहीं था - ऐसे कुछ बनने का समझने का -  जो जहाँ तक पहुंचा जिउ जान लगा कर - अंत में सारे सपने बुहार कर बहुत टूटा - ऐसे बहुत सारे होंगे - इसमें सरकार का दोष था पर कम - हम जैसे पढे लिखे सामाजिक जागरूक लोगों को यह समझ नहीं थी -  तर्क ही करते रहे अपने मध्यमवर्गीय मंसूबों को खाद देते  कि इट्स नॉट फेयर, ही इज नॉट कॉम्पीटेंट  -  शिक्षा के साथ साथ और पहले अवसर की समानता दे समाज, सरकार -  समझे समझाये मद मुग्धा  सरंचना को कि आरक्षित कहाँ से आता है, और क्यों है - (- और ये भी कि कुछ अपवाद हर जगह होंगे) -  पहल के लिए कोई सामाजिक संरचना है बची ? - कौन नेता चुनाव और पद छोड़ कर समाज बदलने निकलेगा ?  सस्ती शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, सड़कें, कानून सुरक्षा व्यवस्था और बिजली पानी  -इसके अलावा सरकारी पैसे का उपयोग व्यवसायिक उपक्रमों के कामों में कम करें तो बेहतर है 
सादर - मनीष</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>बात सही है - उम्मीद कम है - सस्ती शिक्षा का अधिकार सही है लेकिन काफी नहीं है  समता के सही माने बनाने की ज़रूरत प्राथमिक स्तर से है पर विवाद स्नातक, स्नातकोत्तर है - गरीब बच्चा (हमारे देश में) अपना समय कमाने में डालता है - शिक्षा लेने के पैसे दीजिये उसे पूरा परिवार चलाने के -  तब शायद आए -  सीताराम का वाकया याद आता है -  बीस एक  साल पहले का - परिवार चलाने के लिए सपरिवार करीब सारे दिन मशक्कत करने के साथ साथ कॉलेज करना चाहता था - आरक्षण भी मिला - कुछ छात्रवृत्ति भी - (जिसका हिस्सा दफ्तर के बाबू को देना पड़ता था) -  परिवार को भी मनाया - लेकिन गुरुजनों ने पास ही नहीं होने दिया -  शायद सच कहा कि कमज़ोर है -  सहपाठी हीन बनाते रहे - पर बताएं वह मेधावी, हुसियार होता तो होता कैसे ? जैसे पला बढ़ा - उसे रत्ती भर मौका नहीं था - ऐसे कुछ बनने का समझने का -  जो जहाँ तक पहुंचा जिउ जान लगा कर - अंत में सारे सपने बुहार कर बहुत टूटा - ऐसे बहुत सारे होंगे - इसमें सरकार का दोष था पर कम - हम जैसे पढे लिखे सामाजिक जागरूक लोगों को यह समझ नहीं थी -  तर्क ही करते रहे अपने मध्यमवर्गीय मंसूबों को खाद देते  कि इट्स नॉट फेयर, ही इज नॉट कॉम्पीटेंट  -  शिक्षा के साथ साथ और पहले अवसर की समानता दे समाज, सरकार -  समझे समझाये मद मुग्धा  सरंचना को कि आरक्षित कहाँ से आता है, और क्यों है - (- और ये भी कि कुछ अपवाद हर जगह होंगे) -  पहल के लिए कोई सामाजिक संरचना है बची ? - कौन नेता चुनाव और पद छोड़ कर समाज बदलने निकलेगा ?  सस्ती शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, सड़कें, कानून सुरक्षा व्यवस्था और बिजली पानी  -इसके अलावा सरकारी पैसे का उपयोग व्यवसायिक उपक्रमों के कामों में कम करें तो बेहतर है<br />
सादर - मनीष</p>
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		<title>By: सागर नाहर</title>
		<link>http://samatavadi.wordpress.com/2008/04/11/creamy_layer_highereducation/#comment-1225</link>
		<dc:creator>सागर नाहर</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Apr 2008 11:16:18 +0000</pubDate>
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		<description>पिछड़ों को आगे लाने का यह तरीका सही नहीं लगता, पिछड़ों का फायदा हो ना हो नेताओं ने तो अपनी फसलें तैयार करली। 
 बहुत जल्दी इसके दुषपरिणाम सामने आयेंगे।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>पिछड़ों को आगे लाने का यह तरीका सही नहीं लगता, पिछड़ों का फायदा हो ना हो नेताओं ने तो अपनी फसलें तैयार करली।<br />
 बहुत जल्दी इसके दुषपरिणाम सामने आयेंगे।</p>
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		<title>By: Isht Deo Sankrityaayan</title>
		<link>http://samatavadi.wordpress.com/2008/04/11/creamy_layer_highereducation/#comment-1224</link>
		<dc:creator>Isht Deo Sankrityaayan</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Apr 2008 07:51:20 +0000</pubDate>
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		<description>सबसे पहले तो आरक्षण की इन दिनों वकालत करने वाले कांग्रेस में नेतृत्वकर्ता के आरक्षण को ख़त्म करें. क्या कांग्रेस का मुखिया कोई दलित-पिछड़ा नहीं हो सकता? क्या ऎसी कोई अनिवार्य ज़रूरतहै कि यह पार्टी दस जनपथ का कब्जा ख़त्म हो. यह बात केवल कांग्रेस के ही बारे में नहीं है उन सभी पार्टियों के बारे में है जहाँ आतंरिक लोक तंत्र का सख्त अभाव है. बाकी जहाँ तक सवाल आरक्षण के प्रभाव का है, इस बारे में मैं अपने ही एक पोस्ट का लिंक आपको भेज रहा हूँ. हो सके तो देख लें.
http://iyatta.blogspot.com/2007/06/blog-post.html</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सबसे पहले तो आरक्षण की इन दिनों वकालत करने वाले कांग्रेस में नेतृत्वकर्ता के आरक्षण को ख़त्म करें. क्या कांग्रेस का मुखिया कोई दलित-पिछड़ा नहीं हो सकता? क्या ऎसी कोई अनिवार्य ज़रूरतहै कि यह पार्टी दस जनपथ का कब्जा ख़त्म हो. यह बात केवल कांग्रेस के ही बारे में नहीं है उन सभी पार्टियों के बारे में है जहाँ आतंरिक लोक तंत्र का सख्त अभाव है. बाकी जहाँ तक सवाल आरक्षण के प्रभाव का है, इस बारे में मैं अपने ही एक पोस्ट का लिंक आपको भेज रहा हूँ. हो सके तो देख लें.<br />
<a href="http://iyatta.blogspot.com/2007/06/blog-post.html" rel="nofollow">http://iyatta.blogspot.com/2007/06/blog-post.html</a></p>
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