Posted on May 30, 2008 by अफ़लातून
दस वर्षों तक चरखा फीचर सेवा के सम्पादक रह चुके अमन नम्र ने अपने जज्बात इसी नाम के चिट्ठे पर प्रकट करना शुरु किया है । हिन्दी चिट्ठाजगत के लिए यह अत्यन्त लाभकारी सिद्ध होगा , मुझे पूरा यक़ीन है । अमन नम्र की भाषा , पकड़ और सरोकार आकर्षक हैं । आप सब से [...]
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Posted on May 23, 2008 by अफ़लातून
१. पत्रकारीय लेखन किस हद तक साहित्य है ? : महादेव देसाई
२. पत्रकारिता दुधारी तलवार
३. खबरों की शुद्धता
४. ” क्या गांधीजी को बिल्लियाँ पसन्द हैं ? ”
५. ‘ उस नर्तकी से विवाह हेतु ५०० लोग तैयार ‘
६. हक़ीक़त भी अपमानजनक हो, तब ?
७. समाचारपत्रों में गन्दगी
८. क्या पाठक का लाभ अखबारों की चिन्ता है ?
९. समाचार : व्यापक [...]
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