दस वर्षों तक चरखा फीचर सेवा के सम्पादक रह चुके अमन नम्र ने अपने जज्बात इसी नाम के चिट्ठे पर प्रकट करना शुरु किया है । हिन्दी चिट्ठाजगत के लिए यह अत्यन्त लाभकारी सिद्ध होगा , मुझे पूरा यक़ीन है । अमन नम्र की भाषा , पकड़ और सरोकार आकर्षक हैं । आप सब से अपील है कि जज्बात पर जाँए , सुन्दर लेखों को पढ़ें और इस नई विधा को अपनाने वाले इसे मंजे हुए युवा लेखक / विचारक / पत्रकार को प्रोत्साहित करें ।
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नम्र जी से परिचय कराने के लिए आपका धन्यवाद
aman ka swagat hai.
अमन नम्र जी को पढ़ा है मैने,
शुक्रिया उनके ब्लॉग से परिचय करवाने के लिए!
हिन्दी ब्लागरी अभी भी चीन्ह कर पढ़ने के दौर से गुजर रही है. यह दौर अभी रहेगा. और जब तक यह दौर रहेगा ब्लागरी से कन्टेट गायब ही रहनेवाला है.
अमन नम्र जैसे लोग टिकें तो बड़ा अच्छा रहेगा.
श्री अफलातून जी
मेरा परिचय इस अद़भुत अंदाज से कराने के लिए आपका बेहद शुक्रिया। दरअसल मामला ये है कि 10 साल चरखा में विकास पत्रकारिता करने के बाद मुख्य धारा मीडिया में लौटने की उत्कट इच्छा व मध्यमवर्गीय परिवार की आर्थिक जरूरतें पूरा करने की जिम्मेदारियों के चलते मैं भोपाल, भास्कर में हूं। अब ऐसा लग रहा है कि पत्रकारिता के अलावा बाकी सब हो रहा है। ऐसे में लेखन न कर पाने की पीड़ा लंबे समय तक भोगना संभव नहीं है, इसीलिए डरते-डरते ब्लाग शुरू किया, लेकिन जैसा विश्वास और उत्साह जगाने वाला प्रोत्साहन मिला है मैं भरोसा दिलाता हूं कि यह प्रक्रिया जारी रहेगी। बस कदम दर कदम टोकते रहिएगा।
अमन