उपभोक्तावाद का परिष्कार या निसर्गोपचार ?

अपनी जड़ें जमाने के बाद उपभोक्तावाद को नफ़ीस बनाने की माँग व्यापक होने लगती है । यूरोप और अमेरिका में सशक्त बन चुका उपभोक्ता आन्दोलन अक्सर सेहत और नैतिकता से जुड़े सवाल कारगार ढंग से उठाता है । पश्चिम के पर्यावरणवादी आन्दोलन में भी यूरोपवासियों की यह चिन्ता मुख्य है – ‘प्राकृतिक संसाधनों के सीमित [...]

खाद्य संकट पर पहल करें

विश्व खाद्य संकट परवान पर है – लगातार बढ़ रही  खाद्यान्न कीमतों ने जनता की टेंट से अरबों रुपए निचोड़ लिए हैं और यह माना जा रहा है कि १० करोड़ लोग भूख का सामना कर रहे हैं ।
  इस परिस्थिति पर विचार करने के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा दुनिया के नेताओं का एक सम्मेलन इसी [...]