अपनी जड़ें जमाने के बाद उपभोक्तावाद को नफ़ीस बनाने की माँग व्यापक होने लगती है । यूरोप और अमेरिका में सशक्त बन चुका उपभोक्ता आन्दोलन अक्सर सेहत और नैतिकता से जुड़े सवाल कारगार ढंग से उठाता है । पश्चिम के पर्यावरणवादी आन्दोलन में भी यूरोपवासियों की यह चिन्ता मुख्य है – ‘प्राकृतिक संसाधनों के सीमित [...]
Filed under: chikitsa, consumerism, gandhi, nature cure, refined consummerism | Tagged: गोत्री, निसर्गोपचार, परिष्कृत उपभोक्तावा, gotri, nature cure, refined consummerism | 2 Comments »


RSS - Posts