कोला कम्पनियों की करतूतें

”उपभोग जीवन की बुनियादी जरूरत है . इसके बगैर न जीवन सम्भव है और न वह सब जिससे हम जीवन में आनन्द का अनुभव करते हैं.
  इसके विपरीत ऐसी वस्तुएं , जो वास्तव में मनुष्य की किसी मूल जरूरत या कला और ग्यान की वृत्तियों की दृष्टि से उपयोगी नहीं हैं लेकिन व्यावसायिक दृष्टि से प्रचार [...]

दो वर्षों में यूरेनियम ७ डॉलर से १५० डॉलर प्रति पाउन्ड

पिछले भाग : एक , दो । अब जब भारत सरकार और उससे ज्यादा परमाणु बिजली उद्योग जोर – शोर से कह रहे हैं कि सन २०५२ तक भारत की परमाणु बिजली क्षमता २७५००० MW होगी तब उन्हें यह भी पता है कि भारत के पास यूरेनियम नहीं है । तारापुर-१ और २ की ईंधन की [...]

परमाणु बिजली की कीमत के बारे में बेवकूफ़ बनाते हैं

पिछला हिस्सा । परमाणु बिजली की कारखाने बनाने में आज कोयले से लगभग दुगुना तथा गैस से ढाई गुना खर्च होता है । परमाणु बिजली बनाने में प्रति मेगावाट आठ करोड़ खर्च आता है जबकि कोयले में ३.७५ करोड़ तथा गैस में ३ करोड़ । परमाणु बिजली घरों को बनाने में अन्य बिजली घर बनाने [...]

‘बिजली मुफ़्त बँटेगी’

लेखक - डॉ. एम.वी रमणा तथा डॉ. संघमित्रा देसाई गाडेकर
‘यह गौरतलब है कि जो चीजें तथा उपकरण यूरोप के लोग इस्तेमाल करना छोड़ देते हैं वही चीजें हमारे यहाँ फैशन में आ जाती हैं । उनके प्रबुद्ध लोग लगातार परिवर्तन करते रहते हैं । हम अनजाने उनकी फेंकी हुई चीजों से चिपके रहते हैं ।’ – [...]

परमाणु बिजली न सस्ती है,न सुरक्षित,न स्वच्छ

परमाणु बिजली कत्तई सस्ती नहीं है । पूँजी का फँसे रहना , परमाणु – ईंधन प्रसंस्करण , परमाणु – कचरे का निपटारा , समग्र बिजली घर की ‘उमर बीत जाने’ पर उसकी कब्र का खर्चा इत्यादि प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तथा आनुषंगिक सभी खर्चों का हिसाब करने पर परमाणु बिजली अत्यन्त मंहगी पड़ती है। आज कुल [...]

जल्दी में : कुंवर नारायण

प्रियजन
मैं बहुत जल्दी में लिख रहा हूं
क्योंकि मैं बहुत जल्दी में हूं लिखने की
जिसे आप भी अगर
समझने की उतनी ही बड़ी जल्दी में नहीं हैं
तो जल्दी समझ नहीं पायेंगे
कि मैं क्यों जल्दी में हूं ।
 
जल्दी का जमाना है
सब जल्दी में हैं
कोई कहीं पहुंचने की जल्दी में
तो कोई कहीं लौटने की …
 
हर बड़ी जल्दी को
और [...]

मिथुन दर्शनं मंगलम्

हमारी संस्कृति में सूर्य को पूरे जीवन के साथ गूँथ लिया गया है । सूर्य को परम मित्र कहा , सचराचर की आत्मा कहा, जीवन के सर्व रसों का दाता कहा । इसलिए हमारे यहाँ अनेक छोटे – बड़े सूर्य मन्दिर भी बने हैं । लोगों ने सोचा होगा कि उत्पत्ति , स्थिति और लय [...]

प्रकाश व ऊष्मा , ज्ञान व कर्म, बुद्धि व भावना,शक्ति व भक्ति

पिछला भाग  । सूर्य की किरणों में प्रकाश है और ऊष्मा भी है । सूर्य में दोनों साथ रहते हैं , भले ही आप अपनी कल्पना में उन्हें अलग करते हों । तार्किक पृथक्करण करके आप दोनों के विषय में अलग अलग विचार कर सकते हैं । परंतु जहां प्रकाश होता है वहां ऊष्मा उसके [...]

उसका सौन्दर्य रोज नया – नया ही लगता है

पिछले भाग से आगे :
सूर्य हमारा मित्र है तथा हमारा अत्यंत उपकार करता है , इसमें कोई शक नहीं है । जो सूर्य न होता तो माटी न तपती , बरसात न होती , अन्न न उगता , प्राण न रहते , क्योंकि शरीर में ऊष्मा न होती । इस प्रकार सूर्य द्वारा उपकार की कोई [...]

सूर्य हमारा परम मित्र

[ अजित वडनेरकर और विनोबा नामक  पोस्ट में कई सुधी पाठकों ने रुचि ली। इससे प्रेरित होकर गुजराती पाक्षिक भूमिपुत्र से कांति शाह द्वारा संकलित , विनोबा रचित 'सूर्य-उपासना '  के अंश यहां दे रहा हूँ । अनुवाद मेरा है । अफ़लातून ]
सूर्य माने उत्तम प्रेरणा देने वाला । सु = ईर् । ‘ईर्’ अर्थात प्रेरणा [...]