कविता / इतिहास पुरुष अब आएं / राजेन्द्र राजन

काफी दिनों से रोज़ – रोज़ की बेचैनियां इकट्ठा हैं
हमारे भीतर सीने में भभक रही है भाप
आंखों में सुलग रही हैं चिनगारियां हड्डियों में छिपा है ज्वर
पैरों में घूम रहा है कोई विक्षिप्त वेग
चीज़ों को उलटने के लिए छटपटा रहे हैं हाथ

मगर नहीं जानते किधर जाएं क्या करें
किस पर यक़ीन करें किस पर सन्देह
क्या कहें [...]

मतगणना नहीं जनगणना में भाग लेना न भूलें

हिन्दी में चिट्ठेकारी करने वाले समस्त मित्रों,
हिन्दी चिट्ठेकारी में फिलहाल सर्च इंजनों की तुलना में ब्लॉगवाणी से अधिक पाठक पहुँचते हैं । ब्लॉगवाणी शुरु करते वक्त मैथिलीजी ने घोषित किया था कि यह प्रकल्प धन्धे के लिए नहीं , हिन्दी के लिए है । यह वचन नहीं उनकी निष्ठा है और उन्होंने इसे निभाया है । नए [...]

नेपाल के माओवादियों से कुछ बुनियादी सवाल/सुनील

पिछले भाग : एक , दो    । गाँधी के प्रति उन्हें एलर्जी हो सकती है । लेकिन माओवादियों को इस पर तो विचार करना पडेगा कि आखिर क्यों स्वयं माओ को चीन के लिए यूरोपीय और सोवियत औद्योगीकरण से अलग तकनालाजी एवं विकास का रास्ता चुनना पड़ा ? और उस राह को छोड़ कर वैश्वीकरण और [...]

‘सुरक्षित फौज’ और नेपाली समाजवाद का भविष्य/ सुनील

पिछला भाग (नेपाली माओवादियों के समाजवाद की सीमा)।
कृषि के क्षेत्र में माओवादी भूमि – सुधारों और आधुनिकीकरण पर जोर देते हैं । भट्टराई कहते हैं कि हम अनुपस्थित जमींदारों को खतम करेंगे और जोतनेवाले को जमीन का मालिक बनाएंगे । गरीब किसानों की सहकारी समितियाँ बनाएंगे । विश्व बैंक और खाद्य एवं कृषि संगठन की [...]

नेपाली माओवादियोँ की दुविधा और नजरिए का दोष / सुनील

(नेपाली) माओवादियोँ के समाजवाद की सीमायेँ / सुनील

यह एक इतिहास का चमत्कार माना जाएगा कि जब पूरी दुनिया मेँ साम्यवादी धारा का पराभव हो चुका है या हो रहा है , नेपाल मेँ एक माओवादी कम्युनिस्ट पार्टी बड़ी ताकत के रूप में उभर कर आई है और सत्ता पर काबिज हुई है | नेपाल में [...]

चिट्ठेकारी का दूसरा साल

१५ अगस्त २००६ को हिन्दी का चिट्ठा शुरु किया था । एक साल पूरा होने पर मूल्यांकन किया था । इस चिट्ठे पर पिछले साल कुल १२५ पोस्ट और ३४१ टिप्पणीयाँ थीं  , इस साल ७३ पोस्ट लेकिन टिप्पणियाँ ३४१ ही हैं । अन्य दो चिट्ठे : यही है वह जगह पर इस साल ५७ [...]

महादेव देसाई (२) : प्रभाकर माचवे

पिछला भाग । महादेव देसाई का एक सुन्दर वर्णन ‘ हसीदे एदीब ‘ की ‘ इनसाइड इण्डिया’ ( भारत में ) नामक पुस्तक में ‘ रघुवर तुमको मेरी लाज ‘ नाम के चौथे अध्याय में मिलता है । जब वे महात्माजी से बातें कर रहीं थीं , महादेव देसाई नोट ले रहे थे । उन्हीं [...]

तत्वज्ञानी महादेव देसाई : प्रभाकर माचवे

[आठ अगस्त १९४२ को मुम्बई के ग्वालिया टैक के मैदान में अपने ऐतिहासिक भाषण में महात्मा गाँधी ने ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो - करो या मरो’ का नारा दिया । ९ अगस्त की भोर में महात्मा गाँधी , श्रीमती सरोजनी नायडू और महादेव देसाई को गिरफ़्तार कर पुणे के आगा खाँ महल में बन्द कर दिया [...]

चेर्नोबिल यत्र तत्र सर्वत्र

पिछला भाग    दुनिया को दुर्घटना की सूचना इससे फैले विकिरण ने ही दी । स्वीडन के बाल्टिक सागर के तट पर एक परमाणु संयंत्र स्थापित है ।इस संयंत्र से सुरक्षित स्तर से अधिक विकिरण तो नहीं हो रहा है इसकी पड़ताल के लिए करीब चार किलोमीटर दूर ‘रेडिएशन डिटेक्टर’ स्थापित है । विकिरण की मात्रा [...]

फिर न हों हिरोशिमा ,नागासाकी ,चेर्नोबिल(बीबीसी डॉक्युमेन्टरी)

६ अगस्त १९४५ को जापान के हिरोशिमा और ९ अगस्त को नागासाकी शहर पर अमेरिका ने परमाणु बम गिराए थे । स्वीडन के नोबेल पुरस्कार विजेता भौतिकवादी हेनेस आल्फवे ने इसे प्रलयंकारी बीमार मानसिकता का द्योतक बताया था । मेगाटन , मेगावाट  की [...]