चिट्ठेकारी का दूसरा साल
अगस्त 14, 2008 अफ़लातून अफलू द्वारा
१५ अगस्त २००६ को हिन्दी का चिट्ठा शुरु किया था । एक साल पूरा होने पर मूल्यांकन किया था । इस चिट्ठे पर पिछले साल कुल १२५ पोस्ट और ३४१ टिप्पणीयाँ थीं , इस साल ७३ पोस्ट लेकिन टिप्पणियाँ ३४१ ही हैं । अन्य दो चिट्ठे : यही है वह जगह पर इस साल ५७ पोस्ट और २२ टिप्पणियां हैं तथा शैशव पर ६४ पोस्ट तथा १८७ टिप्पणियाँ हैं । सुरे – बेसुरे गीत-संगीत का एक नया चिट्ठा पिछले साल शुरु किया उसमें ४३ पोस्ट और १७२ टिप्पणियाँ हैं ।
इस चिट्ठे पर गत एक वर्ष में निम्न स्थानों से पाठक पहुँचे , जिनके रचनाकारों का मैं शुक्रगुजार हूँ :
इस चिट्ठे पर मौजूद निम्नलिखित कड़ियों पर उनके सामने लिखी संख्या में पाठक यहाँ से गए :
2007-08-15 to Today
इन शब्दों को खोजते हुए ,सामने लिखी तादाद में लोग पिछले एक साल में इस चिट्ठे पर आए :
2007-08-15 to Today
| Search |
Views |
| कविताएँ |
265 |
 |
| अम्बेडकर |
163 |
 |
| तुलसीदास |
160 |
 |
| स्वामी विवेकान |
137 |
 |
| नारी |
99 |
 |
| विवेकानन्द |
78 |
 |
| भीमराव अम्बेडक |
73 |
 |
| गांधी |
68 |
 |
| उत्तर प्रदेश |
64 |
 |
| हिटलर |
56 |
 |
| tulsidas |
54 |
 |
| उपभोक्तावादी स |
46 |
 |
| विवेकानन्द साह |
44 |
 |
| industralisation |
42 |
 |
| मायावती |
39 |
 |
| ऑनलाइन |
35 |
 |
| खेती |
34 |
 |
| पानी की कमी |
34 |
 |
| उपभोक्तावाद |
28 |
 |
| महात्मा गांधी |
28 |
 |
| गोस्वामी तुलसी |
27 |
 |
| महिला दिवस |
27 |
 |
| globalisation |
27 |
 |
| आरक्षण |
22 |
 |
| वैश्वीकरण |
22 |
 |
| विवेकानन्द स्व |
21 |
 |
| गाँधी |
19 |
 |
| पत्रकारिता |
18 |
 |
| vivekanand |
18 |
 |
| हिन्दी दिवस |
18 |
 |
| राष्ट्रीय स्वय |
17 |
 |
| harda |
17 |
 |
| मित्र |
16 |
 |
| उदय प्रकाश |
16 |
 |
| नेता |
16 |
 |
| asterix |
15 |
 |
| उपभोक्तावादी |
15 |
 |
| रघुवीर सहाय |
15 |
 |
| गांधीजी के बार |
14 |
 |
| नरेन्द्र मोदी |
14 |
 |
| भविष्य |
14 |
 |
| पानी |
13 |
 |
| rangoli |
13 |
 |
| bbc hindi.com |
13 |
 |
| कहानी |
12 |
 |
| नेहरू |
12 |
 |
| राधा |
11 |
 |
| स्वामी विवेकान |
11 |
 |
| वेब पत्रकारिता |
10 |
 |
| मानवाधिकार |
10 |
 |
सर्च इन्जनों में इस्तेमाल किए गए उपर्युक्त शब्दों ,नामों , पदों में अम्बेडकर + भीमराव अम्बेडकर अथवा स्वामी विवेकानन्द + विवेकानन्द + vivekanand + विवेकानन्द साह अथवा गोस्वामी तुलसीदास+ तुलसीदास + tulsidas खोजने वालों की तादाद काएदे से जोड़ कर बतायी जानी चाहिए ।
मुझे यक़ीन है कि सर्च इन्जनों के माध्यम से भविष्य में भी लोग इन महत्वपूर्ण शब्दों , नामों , पदों को खोजते इस चिट्ठे पर मँडराएंगे ।
पिछले एक साल की पोस्टों को वर्गीकृत कर ‘विषय सूची’ में डालने का काम अतिशीघ्र हो जाएगा। पिछले साल यह काम किया गया था । इससे ब्लॉग के अलावा ब्लॉग में छुपी वेब साइट को भी लोग देख सकते हैं । पिछले एक साल में प्रस्तुत ऑनलाइन पुस्तिकाओं को भी एक साथ प्रस्तुत कर दिया जाएगा , ऐसे ।
पिछले एक वर्ष में मेरी कौन सी पोस्ट्स कितनी पढ़ी गयीं ?
2007-08-15 to Today
| Title |
Views |
|
| ‘राष्ट्र की रीढ़’ |
323 |
 |
| रघुवीर सहाय : ती |
314 |
 |
| गोस्वामी तुलसी |
307 |
 |
| डॊ. भीमराव अम्ब |
256 |
 |
| ‘नारी के सहभाग ब |
226 |
 |
| ऑनलाइन पुस्तिक |
218 |
 |
| उदय प्रकाश की क |
182 |
 |
| औद्योगीकरण का |
173 |
 |
| मोदी की जीत गुज |
165 |
 |
| परिचय |
164 |
 |
| इस चिट्ठे की वि |
163 |
 |
| भारत भूमि पर वि |
159 |
 |
| नारोदनिक,मार्क |
157 |
 |
| मायावती और चरख |
149 |
 |
| नौ ऑनलाइन पुस् |
133 |
 |
| ‘लोकतंत्र का जि |
132 |
 |
| ईसाई और मुसलमा |
129 |
 |
| औद्योगिक सभ्यत |
121 |
 |
| पूर्वी उत्तर प |
111 |
 |
| ‘वेब पत्रकारित |
108 |
 |
| “हिटलर के नाज |
107 |
 |
| महिला दिवस का ऐ |
103 |
 |
| औद्योगिक सभ्यत |
101 |
 |
| हिन्दी दिवस ( १४ |
100 |
 |
| ‘शेक्सपियर गुज |
100 |
 |
| खेती की अहमियत |
99 |
 |
| ‘पूंजी’,रोज़ा लक् |
98 |
 |
| असल कश्मीरियत |
98 |
 |
| ‘आरक्षण की व्यव |
93 |
 |
| ‘ नारी हानि विसे |
90 |
 |
| बाबा साहब डॉ . भ |
88 |
 |
| हमने मोदी को वो |
87 |
 |
| नई राजनीति के न |
84 |
 |
| तेलुगु कहानी : म |
82 |
 |
| कविता : इतिहास म |
80 |
 |
| चरम गुलामी : जब |
80 |
 |
| पानी की जंग : ले. |
78 |
 |
| बौद्धिक साम्रा |
75 |
 |
| शिक्षा , मलाईदा |
73 |
 |
| गांधी – अम्बेडक |
71 |
 |
| परमाणु बिजली न |
71 |
 |
| ‘बिजली मुफ़्त बँ |
69 |
 |
| गांधी , अम्बेडक |
69 |
 |
| कत विधि सृजी ना |
68 |
 |
| गांधी , अम्बेडक |
67 |
 |
| गांधी से प्रभा |
66 |
 |
| तेलुगु कहानी (२) |
66 |
 |
| गांधी , अम्बेडक |
66 |
 |
| बम धमाके : सच के |
63 |
 |
| डॉ. अम्बेडकर : ए |
63 |
 |
| गांधी , अम्बेडक |
62 |
 |
| भारत का कुलीकर |
62 |
 |
| बौद्धिक साम्रा |
57 |
 |
| सूर्य हमारा पर |
55 |
 |
| उपभोक्तावादी स |
55 |
 |
| क्या वैश्वीकरण |
54 |
 |
| अमृत घूंट : ले. न |
54 |
 |
| परमाणु बिजली क |
51 |
 |
| अहमद पटेल के भर |
50 |
 |
| वाल मार्ट पर लि |
50 |
 |
| शब्द , शब्द को प |
48 |
 |
| वामपंथ का व्या |
48 |
 |
| गाँधी – नेहरू चि |
47 |
 |
| गांधी , अम्बेडक |
45 |
 |
| कम्युनिस्ट देश |
44 |
 |
| नन्दीग्राम पर |
44 |
 |
| भारत का कुलीकर |
42 |
 |
| यह सिर्फ शब्दो |
41 |
 |
| पत्रकारीय लेखन |
41 |
 |
| कोला कम्पनियों |
41 |
 |
| मनुष्यता के मो |
40 |
 |
| भोगवाद और ‘ वामप |
40 |
 |
| ‘चरखा’ वाले अमन |
39 |
 |
| जल्दी में : कुंव |
39 |
 |
| कोला कम्पनियों |
39 |
 |
| उपभोक्तावाद का |
37 |
 |
| मिथुन दर्शनं म |
37 |
 |
| अमृत घूंट (३)[चा |
37 |
 |
| ‘खुले विश्व’ के |
37 |
 |
| उपभोक्तावादी स |
35 |
 |
| सेज विरोधी आन् |
35 |
 |
| म.प्र. राज्य सुर |
35 |
 |
| युद्ध पर तीन कव |
34 |
 |
| फिर न हों हिरोश |
33 |
 |
| कोला कम्पनियों |
32 |
 |
| दो वर्षों में य |
32 |
 |
| गांधी , अम्बेडक |
31 |
 |
| जे.पी. और राष्ट् |
31 |
 |
| तत्वज्ञानी महा |
30 |
 |
| दिल्ली चिट्ठाक |
30 |
 |
| मीडिया प्रसन्न |
30 |
 |
| क्या, फिर इन्डि |
30 |
 |
| मेरी चिट्ठाकार |
30 |
 |
| अमृत घूंट (२) : ले |
28 |
 |
| हम इस आवाज का मत |
27 |
 |
| कोला कम्पनियाँ |
27 |
 |
| वामपंथ का व्या |
27 |
 |
| पानी की जंग : गो |
27 |
 |
| गांधी गीता और ग |
26 |
 |
| प्रकाश व ऊष्मा , |
26 |
 |
| पानी की जंग , ले.- |
24 |
 |
| उसका सौन्दर्य |
23 |
 |
| सीख वाले खेल और |
23 |
 |
| गांधी – सुभाष : भ |
22 |
 |
| खाद्य संकट पर प |
22 |
 |
| राजनीति में मू |
22 |
 |
| तीन बागी गायक |
21 |
 |
| उपभोक्तावादी स |
21 |
 |
| भारत भूमि पर वि |
21 |
 |
| भाषा पर गांधी ज |
21 |
 |
| निजी जेल कंपनि |
20 |
 |
| क्या वैश्वीकरण |
20 |
 |
| अयोध्या , १९९२ : |
19 |
 |
| ‘दो तिहाई आबादी |
19 |
 |
| गांधी पर बहस : प |
18 |
 |
| क्रांतिकारी दि |
18 |
 |
| गीकों की ‘गूँगी |
18 |
 |
| ‘विकास’ बनाम वू |
18 |
 |
| अमृत घूंट (४) : ले |
18 |
 |
| महादेव देसाई (२) |
18 |
 |
| आयात – निर्यात औ |
17 |
 |
| नन्दीग्राम की |
17 |
 |
| मौजूदा चुनाव क |
17 |
 |
| सर्वत्र भारतीय |
17 |
 |
| वैश्वीकरण : देश |
17 |
 |
| भारत भूमि पर वि |
17 |
 |
| भारत और उपभोक् |
16 |
 |
| राजनीति में मू |
16 |
 |
| राधा – कृष्णों क |
16 |
 |
| गांधी – सुभाष : भ |
15 |
 |
| जंगल पर हक़ जतान |
15 |
 |
| साल-भर की चिट्ठ |
15 |
 |
| चिट्ठेकारी का |
15 |
 |
| परिचर्चा पर बह |
15 |
 |
| वस्तुओं को जमा |
14 |
 |
| ” आप चिट्ठाजगत प |
14 |
 |
| क्या वैश्वीकरण |
14 |
 |
| चेर्नोबिल यत्र |
14 |
 |
| जगतीकरण क्या ह |
13 |
 |
| उपभोक्तावादी स |
13 |
 |
| गांधी – नेहरू ची |
13 |
 |
| राज्य आयोग का ई- |
13 |
 |
| ‘चिट्ठाजगत’ का प |
12 |
 |
| अपठित महान : महा |
12 |
 |
| राष्ट्रपिता : ग |
12 |
 |
| मैथिली गुप्तजी |
11 |
 |
| विदेशी पूँजी स |
11 |
 |
| चिट्ठे इन्कलाब |
11 |
 |
| क्या वैश्वीकरण |
11 |
 |
| कुछ और विशेष क् |
11 |
 |
| ये परदेसी जिन् |
10 |
 |
| आदिवासियों ने |
10 |
 |
| कचरा खाद्य : मान |
10 |
 |
| प्रतिबन्धित पु |
10 |
 |
| विदेशी पूंजी स |
10 |
 |
| गांधी पर |
10 |
 |
| बैंक बीमा और पे |
9 |
 |
| प्लाचीमाडा की |
9 |
 |
| विदेशी पूंजी स |
9 |
 |
| क्या वैश्वीकरण |
9 |
 |
| क्या वैश्वीकरण |
9 |
 |
| आदमी का अकेलाप |
9 |
 |
| आर्थिक संप्रभु |
9 |
 |
| ब्लागवाणी क्यो |
9 |
 |
| भाषा पर गांधी औ |
8 |
 |
| क्या वैश्वीकरण |
8 |
 |
| चिट्ठेकारी सम् |
8 |
 |
| ‘ गन – कल्चर ‘ पर च |
8 |
 |
| विदेशी पूंजी स |
8 |
 |
| बातचीत के मुद् |
8 |
 |
| श्रमिकों की हत |
8 |
 |
| सलमान खुर्शीद |
7 |
 |
| भारत भूमि पर वि |
7 |
 |
| उपभोक्तावादी स |
7 |
 |
| ” डबल जियोपार |
7 |
 |
| समाजवादी कल्पन |
7 |
 |
| ‘ परिचर्चा ‘ से स |
7 |
 |
| पानी की जंग पर र |
7 |
 |
| विधानसभा में व |
6 |
 |
| बनारस तुझे सला |
6 |
 |
| गीता पर गांधी |
6 |
 |
| पानी की जंग ( गत |
6 |
 |
| अकाल तख़्त को मा |
5 |
 |
| विदेशी पूंजी स |
5 |
 |
| स्कूलों में शी |
5 |
 |
| शैशव में अतिक् |
4 |
 |
| पूँजीवाद के सं |
4 |
 |
| अखबारनवीसी – सल |
4 |
 |
| गांधी – नेहरू ची |
4 |
 |
| रविजी , आप भी न भ |
4 |
 |
| दोषसिद्ध रंगभे |
4 |
 |
| भारत भूमि पर वि |
3 |
 |
| गुलामी का दर्श |
3 |
 |
| इन्टरनेट पर गा |
3 |
 |
| कोला कम्पनियों |
3 |
 |
| चीन और विदेशी प |
3 |
 |
| आगाज़ |
3 |
 |
| भारत भूमि पर वि |
2 |
 |
| हत्यारों का गि |
2 |
 |
| रामगोपाल दीक्ष |
2 |
 |
| विदेशी पूंजी स |
2 |
 |
| ‘ परिचर्चा ‘ की ज |
1 |
 |
|
1 |
 |
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बधाई स्वीकारें. आँकड़े तो और भी नए नए जुड़ते जाएगें….
मुबारक हो जी
अरे सर आपके पास तो दूसरे साल में ही कमाल के आंकड़े हैं। आगे तो, आप और कमाल करेंगे। गहरा शोध है।
बहुत बधाई एवं शुभकामनाऐं.
अफलातून जी आपको बधाई -
वँदे मातरम !
– लावण्या
विश्वास कीजिये, जल्द ही आप आंकडों से उपर निकल जाएंगे!
कितने आएं से अधिक अच्छे पाठक आएं पर फ़ोकस बढता जाएगा.
बस यूंही लिखते रहिये. शुभकामनाएं.
bahut bahut badhai aur shubh kaamnayen, Aankare jabardast hain aur puri details ke saath. Koi plugin use karte hain ya koi aur tool.
मुबारक हो
बधाई।
आपने बहुत अच्छा आँकड़ा उपलब्ध कराया है। मैं इन्हीं बातों को लेकर शोध कर रहा हूँ। यह आँकड़े अपने-आप बढ़ेंगे जब हिन्दी में सर्चिंग हैबिट्स बढ़ेगी।
धन्यवाद , यह एक उपयोगी पोस्ट
मलयालम रहते हैं
[...] चिट्ठेकारी का दूसरा साल [...]
[...] चिट्ठेकारी का दूसरा साल [...]
[...] पर मैंने इन आंकडों को प्रस्तुत किया - इन्हें । १५ अगस्त की तारीख चुनने के पीछे १९४२ [...]
सबसे पहले तो सबसे कम पढ़े गये लेखों को ही पढ़ेंगे अब। जरा 2011 का आँकड़ा भी देते तो।
इस बार कुछ अलग आंकडे देखिए । शुरु से अब तक । प्रतिक्रिया सादर आमंत्रित ।
[...] चिट्ठेकारी का दूसरा साल [...]