हिन्दी में चिट्ठेकारी करने वाले समस्त मित्रों,
हिन्दी चिट्ठेकारी में फिलहाल सर्च इंजनों की तुलना में ब्लॉगवाणी से अधिक पाठक पहुँचते हैं । ब्लॉगवाणी शुरु करते वक्त मैथिलीजी ने घोषित किया था कि यह प्रकल्प धन्धे के लिए नहीं , हिन्दी के लिए है । यह वचन नहीं उनकी निष्ठा है और उन्होंने इसे निभाया है । नए चिट्ठेकारों को यह भी बताना जरूरी है कि हिन्दी टायपिंग के लिए सब से ज्यादा इस्तेमाल में आने वाला ‘कृति देव’ भी मैथिलीजी की देन है , इसके लिए भी उन्होंने व्यावसायिकता को दरकिनार कर राष्ट्र भाषा प्रेम को ही तरजीह दी ।
मित्रों , युवा कम्प्यूटर सॉफ़्टवेयर विशेषज्ञ सिरिल की औपचारिक शैक्षिक योग्यता पर आपने गौर किया ? तरुणों के समक्ष एक आदर्श के रूप में सिरिल हैं । स्वावलम्बन का नमूना है , यह तरुण !
हिन्दी में चिट्ठेकारी करने वाले मित्रों आप यहाँ पंजीकृत हो कर वोट देंगे , और यह नहीं भूलेंगे कि परिणाम मतगणना का नहीं जनगणना का आएगा ! हिन्दी वालों की गिनती कराएं ।

krwa aaye ginti….waise saichhanik yogyata se jyada pratibha ki jarurat hai IT chhetra me….siril jee ki safalata yahi sabit karti hai
बहुत बहुत धन्यवाद अफलातून साहब;
और कुछ हो या ना हो लेकिन इस कयावद से हिन्दी से दूर रहने वाले लोगों का ध्यान जरूर जायेगा और इतना ही बहुत है.
कृतिदेव फांट मैथिली जी की देन है, यह जानकर सुखद आश्चर्य हुआ।
ऐसे अच्छे लोगों के परिवार से जुड़कर गर्व की अनुभूति हो रही है। इसी गर्व के साथ आज ब्लॉगवाणी के लिए मतदान किया। देबाशीष जी के पॉडभारती के लिए तो कल ही वोट डाल दिया था।
जब मैं मैथिली जी, सिरिल जी, आलोक जी, देबाशीष जी, अनूप जी आदि द्वारा किए जा रहे काम के बारे में सोचता हूं तो मेरे मानसपटल पर भारतेन्दु युग जीवंत होने लगता है। शायद ऐसा ही उत्साह व समर्पण उस युग के साहित्य मनीषियों के अंदर रहा होगा।