साम्राज्यवाद को चुनौती सिर्फ मुसलमानों से : किशन पटनायक

 
परसों ( २७ सितम्बर ) मेरे दल के नेता साथी किशन पटनायक की मृत्यु तिथि थी । देश में जो कुहासा और कड़ुवाहट फैलाने की कोशिश हो रही है उससे व्यापक स्तर पर अवसाद फैले यह मुमकिन है । राजनीति करने वालों का एक बुनियादी दायित्व है कि वह लोगों में लोकतंत्र के प्रति बुनियादी यक़ीन को मजबूत करें [...]

मुसलिम नौजवानों-’भागो मत , दुनिया को बदलो !’

 
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    १९६७ -६९ की कुछ राजनैतिक घटनाओं की तस्वीरें मेरी याददाश्त का हिस्सा बन गयी है। मेरी उमर आठ – दस साल की । ‘६७ में गैर कांग्रेसवाद की कई सूबों में सफलता और १९६९ में गाँधी की जन्म शताब्दी । गांधी की जन्म शती के मौके पर दुनिया के [...]

राष्ट्रतोड़क – राष्ट्रवाद को और पहचानें

कुश के चिट्ठे पर हमारे मित्र संजय बेंगाणी ( जिनसे हमारी भी कोई व्यक्तिगत शिकायत नहीं है) ने कहा -
अफ्लातुनजी से व्यक्तिगत कोई शिकायत नहीं, हम में मित्रता है. उन्हे मैं बताना चाहुंगा की आतंकवादियों में और हिन्दु संगठनो में जो सबसे बड़ा फर्क है वह है भारत के प्रति निष्ठा. अगर आपको यह नजर नहीं आता तो [...]

इंग्लैण्ड और अमरिका जैसा बनाने का मतलब

गांधी की कलम से
*…… भारत को इंगलैण्ड और अमरीका के जैसा बनाने का मतलब है ऐसे नए देशों की तलाश करना जिनका शोषण किया जा सके । अभी तक तो लगता है कि पश्चिमी राष्ट्रों ने योरोप के बाहर के देशों का , शोषण के लिए , आपस में बंटवारा कर लिया है और तलाश [...]

इन्स्टीट्यूट ऑफ़ साइन्स बैंगलोर में गांधी

[ गत दिनों मशहूर गीतकार गुलज़ार बैंगलोर स्थित राष्ट्रीय महत्व के संस्थान इण्डियन इन्स्टीट्यूट ऑफ़ साइन्स गए थे । 'साहित्य के झरोखे से विज्ञान' विषयक प्रवचन तथा युवा वैज्ञानिकों से सवाल जवाब भी हुए । इसकी सुन्दर रिपोर्ट वहाँ के शोध छात्र श्रीराम यादव ने यहाँ दी है । इस पोस्ट से मुझे कुछ याद [...]

एक हिटलर-प्रेमी ‘गुरुजी’

राष्ट्र की हिटलरी कल्पना फासीवाद के नाम से कुख्यात है । हिटलर ने ‘नस्ल’ की कथित शुद्धता और यहूदी विद्वेष की विक्षिप्तता को फैलाकर जर्मनी को भीषण बर्बरता और रक्तपात में डुबो दिया और विश्व भर की लांछना का पात्र बना दिया । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का धर्म आधारित राष्ट्र भी उसी प्रकार का एक [...]