‘आधुनिक तीर्थों’ के ‘पण्डा’ ?

  दुनिया के सबसे अमीर लोगों में से एक लक्ष्मीनारायण मित्तल । इन्हें इस्पात-नरेश भी कहा जाता है । भारतीय मूल का होने के कारण उन पर कई मध्यम वर्गीय भारतीय फक्र करते हैं । शायद इन मध्यम वर्गीय नागरिकों से ज्यादा फक्र हमारी सरकारों को है – इन पर और इनके जैसे अनिवासियों पर [...]

आज़ाद भारत के भारतीय लुटेरों का कर-स्वर्ग : ले. सुनील

गतांक से आगे :
    स्विस बैंकों जैसे दुनिया में ७७ ‘कर-स्वर्ग’ हैं , जहाँ दुनिया के अमीर अपना काला धन जमा करके ऐश कर सकते हैं । वहाँ का भी हिसाब मिलाएं , तो भारतीय अमीरों द्वारा भारत की लूट का यह मीजान और ज्यादा विकराल हो जाएगा । हाल ही में , जर्मनी की [...]

आइसलैण्ड ही क्यों हुआ लगभग दिवालिया?नवीन पटनायक,समझें

  बचपन में एटलस देखते वक्त दो देशों के रंग जरूर आपको भी याद होंगे – बड़े-से द्वीप ग्रीनलैण्ड का हरा और उसके पड़ोस के छोटे-से द्वीप आइसलैण्ड का सफ़ेद । लगता था कि आइसलैण्ड में बर्फ़ ही बर्फ़ होगी । दुनिया पर मँडरा रहे वित्तीय संकट के दौर में फिर चर्चा में आया है जब उसके [...]

प्रकृति को हक़ देने वाला पहला देश : इक्वाडोर

 
    प्रकृति और पर्यावरण को हक़ देने वाला इक्वाडोर पहला देश बन गया है ।  २८ सितम्बर २००८ को देश के ६८ फीसदी जनता ने मतदान द्वारा इस देश के लिए एक नया संविधान मंजूर किया है। कॉलेज अथवा विश्वविद्यालय के तीसरे साल तक की मुफ़्त शिक्षा , सबके लिए मुफ़्त चिकित्सा के अलावा नदियों [...]

अबला कहना अपराध है : महात्मा गांधी

इस अहिंसक युद्ध में स्त्रियों का योगदान पुरुषों से कहीं अधिक होगा । स्त्री को अबला कहना अपराध है ; यह पुरुष का स्त्री के प्रति अन्याय है । यदि शक्ति का अर्थ बर्बर शक्ति है तो अवश्य ही स्त्री पुरुष की अपेक्षा कम बर्बर है । यदि शक्ति का अर्थ नैतिक शक्ति है तो [...]

‘नाजुक दौर में है अमरीकी अर्थव्यवस्था’ : बुश

स्रोत, साभार : 

मंगलवार, 30 सितंबर, 2008 को 18:42 GMT तक के समाचार

‘नाजुक दौर में है अमरीकी अर्थव्यवस्था’

अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने चेतावनी दी है कि अमरीकी अर्थव्यवस्था अत्यंत ‘नाजुक दौर’ में है और इसे बचाने की सरकार की योजना को पारित करना ही होगा.
उल्लेखनीय है कि सरकार ने अमरीकी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए 700 अरब [...]