Posted on October 22, 2008 by अफ़लातून
दुनिया के सबसे अमीर लोगों में से एक लक्ष्मीनारायण मित्तल । इन्हें इस्पात-नरेश भी कहा जाता है । भारतीय मूल का होने के कारण उन पर कई मध्यम वर्गीय भारतीय फक्र करते हैं । शायद इन मध्यम वर्गीय नागरिकों से ज्यादा फक्र हमारी सरकारों को है – इन पर और इनके जैसे अनिवासियों पर [...]
Filed under: corporatisation, globalisation , privatisation, industralisation | Tagged: globalisation, jindal, mittal, privatisation, public sector, vedanta | 6 Comments »
Posted on October 21, 2008 by अफ़लातून
गतांक से आगे :
स्विस बैंकों जैसे दुनिया में ७७ ‘कर-स्वर्ग’ हैं , जहाँ दुनिया के अमीर अपना काला धन जमा करके ऐश कर सकते हैं । वहाँ का भी हिसाब मिलाएं , तो भारतीय अमीरों द्वारा भारत की लूट का यह मीजान और ज्यादा विकराल हो जाएगा । हाल ही में , जर्मनी की [...]
Filed under: swiss banks | Tagged: black money, indian black money, indian deposits, swiss banks | 5 Comments »
Posted on October 20, 2008 by अफ़लातून
स्विस बैंकों में कैद सोने की चिड़िया
भारत एक गरीब देश है । अपनी गरीबी का रोना अक्सर हम रोते हैं । गरीबी पर सेमिनार करते हैं , गरीबी दूर करने की योजनाएं बनाते हैं और विदेशी दान मांगते हैं। पुराने जमाने को याद करते हुए नि:श्वास छोड़ते हैं और कहते हैं कि कभी भारत [...]
Filed under: capitalism, swiss banks | Tagged: black money, black money account, indian black money, indian deposits, swiss banks | 11 Comments »
Posted on October 13, 2008 by अफ़लातून
बचपन में एटलस देखते वक्त दो देशों के रंग जरूर आपको भी याद होंगे – बड़े-से द्वीप ग्रीनलैण्ड का हरा और उसके पड़ोस के छोटे-से द्वीप आइसलैण्ड का सफ़ेद । लगता था कि आइसलैण्ड में बर्फ़ ही बर्फ़ होगी । दुनिया पर मँडरा रहे वित्तीय संकट के दौर में फिर चर्चा में आया है जब उसके [...]
Filed under: globalisation , privatisation | Tagged: aluminium, bankruptcy, iceland, odisha | 12 Comments »
Posted on October 11, 2008 by अफ़लातून
प्रकृति और पर्यावरण को हक़ देने वाला इक्वाडोर पहला देश बन गया है । २८ सितम्बर २००८ को देश के ६८ फीसदी जनता ने मतदान द्वारा इस देश के लिए एक नया संविधान मंजूर किया है। कॉलेज अथवा विश्वविद्यालय के तीसरे साल तक की मुफ़्त शिक्षा , सबके लिए मुफ़्त चिकित्सा के अलावा नदियों [...]
Filed under: environment | Tagged: correa, ecuador, new constitution, referendum | 10 Comments »
Posted on October 3, 2008 by अफ़लातून
इस अहिंसक युद्ध में स्त्रियों का योगदान पुरुषों से कहीं अधिक होगा । स्त्री को अबला कहना अपराध है ; यह पुरुष का स्त्री के प्रति अन्याय है । यदि शक्ति का अर्थ बर्बर शक्ति है तो अवश्य ही स्त्री पुरुष की अपेक्षा कम बर्बर है । यदि शक्ति का अर्थ नैतिक शक्ति है तो [...]
Filed under: women | Tagged: gandhi, women, dowry, abala | 7 Comments »
Posted on October 1, 2008 by अफ़लातून
स्रोत, साभार :
मंगलवार, 30 सितंबर, 2008 को 18:42 GMT तक के समाचार
‘नाजुक दौर में है अमरीकी अर्थव्यवस्था’
अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने चेतावनी दी है कि अमरीकी अर्थव्यवस्था अत्यंत ‘नाजुक दौर’ में है और इसे बचाने की सरकार की योजना को पारित करना ही होगा.
उल्लेखनीय है कि सरकार ने अमरीकी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए 700 अरब [...]
Filed under: capitalism, globalisation, globalisation , privatisation | Tagged: america, bail-out, bbc, bush, economy, senate, usa | 2 Comments »