गतांक से आगे :
स्विस बैंकों जैसे दुनिया में ७७ ‘कर-स्वर्ग’ हैं , जहाँ दुनिया के अमीर अपना काला धन जमा करके ऐश कर सकते हैं । वहाँ का भी हिसाब मिलाएं , तो भारतीय अमीरों द्वारा भारत की लूट का यह मीजान और ज्यादा विकराल हो जाएगा । हाल ही में , जर्मनी की सरकार के हाथ में ऐसे ही एक कर-स्वर्ग लीचेन्स्टाईन के दो नंबरी खातों की जानकारी आई थी , जो उसने सम्बन्धित देशों की सरकारों को देने का प्रस्ताव किया था । कई सरकारों ने इसका उपयोग किया और काले धन वालों के विरुद्ध कार्यवाही भी शुरु की . लेकिन भारत सरकार ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई । आखिर कैसे करती , क्योंकि यह जानकारी उजागर होने पर शायद बड़ी – बड़ी जगहों पर बैठे लोग बेनकाब हो जाते , तूफान आ जाता । वर्ष १९९१ में हवाला काण्ड में भी तो सत्तादल से लेकर तमाम विपक्षी नेताओं के नाम थे । बोफोर्स , जर्मन पनडुब्बी जैसे तमाम सौदों में दलाली व कमीशन की राशि भी ऐसे ही बैंकों में जमा होती है ।
स्विस बैंकों और अन्य कर-स्वर्गों जमा यह विशाल संपदा वह लूट है , जो १९४७ से इस देश में चल रही है । मानवता के इतिहास की सबसे बड़ी लूटों में यह एक है । हम तैमूर लंग , नादिरशाह , मुहम्मद गोरी जैसे विदेशी लुटेरों की बात करते हैं । अंग्रेजी राज में कैसे भारत की धन – संपदा का प्रवाह बाहर की ओर हो रहा है , यह दादाभाई नौरोजी ने ‘ड्रेन थ्योरी’ के साथ बताया था । लेकिन इन सबको पीछे छोड़ते हुए खुद आजाद भारत के भारतीय लुटेरों ने लूट के नए कीर्तिमान कायम किए हैं । भारत में काले धन की विशाल समानांतर अर्थव्यवस्था की आखिरी मंजिल स्विस बैंक जैसे कर-स्वर्ग ही होते हैं , जहाँ के बारे में हमें पता पता भी नहीं चलता है । देश के मेहनतकश स्त्री – पुरुष खून – पसीना एक करके जो पैदा करते हैं , उसे अलग – अलग तरीकों से पूँजीपति-उद्योगपति , ठेकेदार , दलाल , मंत्री , नेता , आई ए एस – आई पी एस अफ़सर हथियाते हैं और लोगों की नजरों से बचाने के लिए इन बैंकों में करते जाते हैं । इसका मतलब यह भी है कि भारत गरीब नहीं है । इस लूट ने उसे गरीब बना कर रखा है । देश का खजाना तो स्विट्जरलैण्ड में छुपा है ।
लूट की इस सम्पदा पर भारत के आम आदमी का हक है । सूचना के अधिकार के इस जमाने में सबसे पहले इसे नामों सहित सार्वजनिक किया जाए । फिर इसे वापस लाने की कार्यवाही की जाए , दोषियों पर सार्वजनिक मुकदमा चलाया जाए , तथा इससे जुड़ी देश के अंदर की काले धन की अर्थव्यवस्था को भी ध्वस्त किया जाए । इस विशाल रकम को देश के विकास में लगाया जाए और आम आदमी के हित में इस्तेमाल किया जाए , तो भारत की गरीबी , बेरोजगारी , भूख , बीमारी , कुपोषण , अशिक्षा आदि दूर हो सकती है । तब हमें विदेशों से कर्ज लेने की जरूरत नहीं होगी , विदेशी पूंजी मंगवाने के लिए बहुराष्ट्रीय कंपनियों को आमंत्रित करने की भी जरूरत नहीं होगी ।
लेकिन यह कैसे होगा ? भारत की मौजूदा सरकारें तो यह कभी नहीं करने वाली हैं , क्योंकि उनमें बैठे लोग भी इस लूट में शामिल होंगे । एक नई क्रांतिकारी सरकर ही , जनमत के दबाव के साथ , यह कर सकती है । तब भारत एक बार फिर सोने की चिड़िया बन जाएगा ।
( लेखक समाजवादी जनपरिषद का राष्ट्रीय अध्यक्ष है । पता : समाजवादी जन परिषद , ग्राम/पोस्ट – केसला , वाया इटारसी , जिला- होशंगाबाद ( म. प्र. )- ४६११११ , ई-पता sjpsunil@gmail.com )

mitra, main samajwadi nahi hoon, lekin aapki baat se poorntaya sahmat hoon, kaale angrejon ne hame loot liya
अमरीका जैसे पूँजीपति व्यापार वाणिज्य से लैस देश की धन सँपत्ति भी आसपास के टापु देशोँ मेँ
जो स्वीट्ज़रलैन्ड की तरह
” कर स्वर्ग “= Tax Heavens हैँ वहाँ
जमा हो कर स्थानाँतरण की जाती है -
भारत की समस्या तो और भी विकट है
जहाँ, गरीब भूख से तडपते हुए
जान गँवाता है और जो
ऐसे पैसे हथियाते हैँ
वे व्याभिचार मेँ लिप्त रहते हैँ –
मध्यवर्ग आँखेँ मूँद कर
कोल्हू के बैल की तरह काम करता रहता है –
आज ना तो जे.पी. हैँ ना तो गाँधी जी !
भारत के आवाम को प्यार करे
वैसे नेता कहाँ हैँ ?
- लावण्या
बिलकुल सही कहा है । वर्तमान व्यवस्था तो सब कुछ छुपाने में ही लगी है । ये बडे नाम सार्वजनिक हो जाएं तो नई जन-सरकार का रास्ता स्वत: खुल जाए । तब लोग जान सकेंगे कि उनके वास्तविक अपराधी कौन हैं ।
हम इन नामों को सार्वजनिक कराने के लिये क्या कर सकते हैं?
[...] (ख) आज़ाद भारत के भारतीय लुटेरों का कर-स्वर… [...]
[...] आज़ाद भारत के भारतीय लुटेरों का कर-स्वर… [...]
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