महिलाएँ
आज महिलाओं की असुरक्षा बढ़ी है आजादी के इकसठ साल में भी महिलाओं को समाज में बराबरी का दर्जा नहीं मिला पाया है । न सिर्फ महिलाओं को दहेज के लिए जलाना बल्कि भ्रूण हत्या के जरिए उन्हें मां के पेट में ही मार डालने का काम हमारे सभ्य समाज में हो रहा है । महिलाओं के साथ बलात्कार , छेड़छाड़ की घटना भी बढ़्ती जा रही हैं । कानून के बावजूद सरकार , आफिसों में अफसर बन बैठे व्यभिचारियों पर पर कार्रवाई नहीं करती । उदाहरण के लिए हरदा जिले में तो आखिरकार स्कूल की लड़कियों को अपने व्यभिचारी प्रिंसीपल को हटाने के लिए रास्ते पर उतरना पड़ा ।
समाजवादी जनपरिषद महिला और पुरुष के लिए समाज में बराबरी के दर्जे में विश्वास करती है । जब तक स्त्री पुरुष में बराबरी नहीं होगी तब तक अत्याचार नहीं रुकेंगे । साथ ही महिलाओं से संबंधित कानूनों का कड़ाई से पालन करना होगा ।
युवा
युवा किसी भी देश का भविष्य होते हैं लेकिन आज हमारे देश में पार्टियां न तो युवाओं के सामने कोई आदर्श पेश कर पा रही है ना कोई देश के प्रति भावना । आज युवाओं के सामने देश के सर्वांगीण विकास का कोई सपना नहीं है । युवा बेरोजगारी का शिकार है । सत्ताधारी पार्टियां युवा का उपयोग अपनी गंदी राजनीति में कर रही हैं या फिर उन्हें धर्म और जाति के नाम पर भड़काने का ।
समाजवादी जनपरिषद मानती है कि युवाओं की क्रांतिकारी राजनीति में एक विशेष भूमिका है । युवाओं को भगत सिंह , गांधी , लोहिया , के असली आदर्शों को समझाने उसे उनके सामने लाने के लिए समाज में एक अभियान चलाया जाना चाहिए । युवाओं की उर्जा का उपयोग देश के विकास में होना चाहिए । हमारे संसाधन कंपनियों पर लुटाने की बजाए उन्हें देश के युवाओं के हवाले करना चाहिए ।
सामाजिक सेवाएँ
सरकार का मुख्य काम है जनता की राशन , पानी , बिजली , शिक्षा , इलाज जैसी सबसे जरूरी चीजों का इंतजाम करे । यह सब आम जनता को आसानी से मिलना चाहिए । लेकिन सरकार विश्व बैंक के इशारे पर इसे खत्म करने में लगी है ।
गरीबी रेखा और राशन सरकार ने राशन व्यवस्था से बचने के लिए गरीबों के नाम ही गरीबी रेखा से काट दिए । जिन लोगों के नाम गरीबी रेखा में बने हैं उन्हें ये नियमानुसार ३५ किलो गेहूँ देने की बजाए १८ किलो गेहूँ दे रहे हैं । सभी गरीबों को गरीबी रेखा कार्ड मिले तथा न सिर्फ़ ३५ किलो गेहूँ हर परिवार को मिले तथा इन परिवारों की सदस्य संख्या से मिले ।
राशन - गरीब इतना भी नहीं कमा पाते कि वो अपने पेट भर सकें । उन्हें वृद्धावस्था पेंशन , निराश्रित पेंशन जैसी अनेक योजनाओं पर निर्भर रहना पड़ता है । इन योजनाओं का लाभ तो सही लोगों तक पहुंच ही नहीं पाता है । इन सारी योजनाओं पर गरीबों को निर्भर न रहना पड़े ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए लेकिन तब तक इन योजनाओं का पूरा पूरा लाभ सही लोगों को मिलना चाहिए ।
शिक्षा आजादी के इकसठ साल बाद भी हमारी तीन चौथाई आबादी को नाम के वास्ते ही शिक्षा मिलती है । शिक्षा में भेदभाव बढ़ता जा रहा है । आज जरूरत है कि निजी स्कूलों की बजाए समान स्कूल प्रणाली को बढ़ावा दिया जाए । जहां गरीब और अमीर , दलित और सवर्ण , सब बच्चे साथ – साथ पढ़ सकें । सरकार शिक्षा के बजट को प्राथमिकता दे और इतना बजट रखे कि स्कूलों में पर्याप्त संख्या में गुणवत्ता वाले शिक्षक हों । हमारी शिक्षा व्यवस्था जो अंग्रेजों के ढांचे पर चली आ रही है उसमें आमूल परिवर्तन हो ।
स्वास्थ्य – आज आम लोगों को साधारण इलाज भी उपलब्ध नहीं है । सरकारी अस्पतालों की हालत बद से बदतर होती जा रही है । डाक्टरों की निजी अस्पतालों में अनाप शनाप कमाई है । सरकार को अस्पतालों में डाक्टरों और मुफ़्त दवाई की पर्याप्त व्यवस्था करना चाहिए । इलाज के अभाव में न तो कोई मौत हो न कोई कर्ज में डूबे ।
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[जारी]

मेरा निजी तौर पर मानना है की कोई भूखा न सोये. और खाना काम के बदले मिले. सरकार, समाज,व्यक्ति हर एक को इस ओर काम करना चाहिए.