भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष न्यायमूर्ती गानेन्द्र नारायण रे ने आम चुनाव में मुष्टीमेय समाचार पत्रों द्वारा चुनाव रिपोर्टिंग की बाबत प्रेस परिषद के दिशा निर्देशों के खुले आम उल्लंघन को गंभीरता से लिया है । न्यायमूर्ती रे आज लखनऊ में हिन्दी समाचार-पत्र सम्मेलन के मीडिया सेन्टर के नवनिर्मित भवन का उद्घाटन करने पधारे थे । इस अवसर पर हिन्दी समाचार-पत्र सम्मेलन के अध्यक्ष श्री उत्तम चन्द शर्मा ने प्रेस परिषद के अध्यक्ष का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि प्रेस परिषद के चुनाव-रिपोर्टिंग सम्बन्धी दिशा निर्देशों का कुछ प्रमुख हिन्दी अखबारों ने खुले आम उल्लंघन किया है । श्री शर्मा ने कहा है व्यावसायिकता के मोह में इन अखबारों द्वारा चुनाव के दौर में खबरों और विज्ञापन के बीच की सीमा रेखा का लोप कर दिया गया है । यह पाठकों और मतदाताओं के प्रति अन्याय है।
इस ब्लॉग के पाठक जानते हैं कि हिन्दी के दो प्रमुख दैनिक – हिन्दुस्तान तथा दैनिक जागरण द्वारा मौजूदा आम चुनाव के दौरान उम्मीदवारों से १० से २० लाख रुपये ले कर विज्ञापननुमा खबरें छापने की एक नई अलोकतांत्रिक परम्परा की शुरुआत की गई है । इस सन्दर्भ में १६ अप्रैल के वाराणसी हिन्दुस्तान के वाराणसी तथा चन्दौली-मुगलसराय संस्करण के मुखपृष्ट पर मुख्य सम्पादक के स्पष्टीकरण की छवि प्रस्तुत की गई थी । पता चला है कि कि समाजवादी जनपरिषद द्वारा चुनाव आयोग तथा सम्पादक को लिखे जाने के अलावा इस बाबत कांग्रेस के महामंत्री श्री राहुल गांधी ने हिन्दुस्तान टाइम्स समूह की प्रमुख सुश्री शोभना भरतिया से फोन पर शिकायत की थी ।
बहरहाल प्रेस परिषद के अध्यक्ष के लखनऊ के आज के दौरे में अखबारों द्वारा चुनाव में निभाई जा रही भूमिका का मुद्दा छाया रहा । हिन्दी समाचार पत्र सम्मेलन के अध्यक्ष उत्तम चन्द शर्मा के अलावा कई पत्रकारों ने इस सवाल को उठाया । कार्यक्रम में न्यायमूर्ती रे का स्वागत सम्मेलन की ओर से जुगलकिशोर शरण शास्त्री ने किया । कार्यक्रम का संचालन दैनिक जनमोर्चा की सुमन गुप्ता ने किया । सुश्री सुमन गुप्ता प्रेस परिषद की सदस्य भी हैं तथा प्रेस परिषद की आगामी बैठक में इस मसले को उठाने का उन्होंने आश्वासन दिया है । आज के कार्यक्रम में मुख्य रूप से पत्रकार अरविन्द सिंह और जनमोर्चा के सम्पादक शीतला सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए । कार्यक्रम के अन्त में वाराणसी से प्रकाशित सांध्य दैनिक गाण्डीव के सम्पादक तथा हिन्दी समाचार पत्र सम्मेलन के महामन्त्री राजीव अरोड़ा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
प्रेस परिषद चुनाव में मीडिया के -अतिव्यावसायी करण पर गंभीर
अप्रैल 28, 2009 अफ़लातून अफलू द्वारा

प्रेस की समाज में भूमिका का प्रश्न प्रधान है, केवल चुनाव का ही नहीं। जनता सब समझती है। उस के क्रोध का गुबार जिस दिन निकलेगा। सब को ठीक कर देनी है।
ये रोग सिर्फ़ इस आम चुनाव में हुआ हो ऎसा नहीं है । मध्यप्रदेश में नवम्बर में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान तो अखबार मालिकों ने एक तरह से खुले आम अखबार के पन्नों की बोलियाँ लगाई थीं । एक पार्टी के उम्मीदवार ने तो बाकायद भोपाल में प्रेस कॉन्फ़्रेंस की थी कि किस तरह समाचार पत्र में जगह खरीदने में नाकामी के चलते उसे मैदान से बाहर होना पड़ा । इलेक्ट्रानिक मीडिया भी तो यही करता आ रहा है । चुनाव आयोग की ही तरह बिना नाखून और दाँतों वाली प्रेस परिषद भी भला क्या कर लेगी ? लोकतंत्र के सभी खंबे एकजुट हो चुके हैं और इन पर भ्रष्टाचार की मज़बूत छत पड़ चुकी है । ऎसे में अब इस लोकतंत्र का तो भगवान ही मालिक है ।
Dear Aflatoon ji,
chunav mein media ki bhomika par apki tippni bahut mahtwapurn hai. Hum Varta ka agla ank media par kendrit kar rahe hain. aapse anurodh hai ki aap is prakran par apna lekh bhejen.
Saadar
Medha
Associate Editor,
Medha
मेधाजी ,
ब्लॉग पर टिप्पणी के लिए धन्यवाद । मैं अब ’वार्ता’ को लेख नहीं भेजता क्योंकि यह समाजवादी जनपरिषद का मुखपत्र नहीं रही। कोई भी मेरे ब्लॉग से स्रोत का उल्लेख कर मेरी टिप्पणियां ले सकता है ।
सविनय,
अफ़लातून.
इस ओर ध्यान देना जरूरी है। शुक्रिया।
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