Feeds:
पोस्ट
टिप्पणियाँ

Archive for मई, 2009

जब बुनियादी सवालों पर प्रमुख दलों में वैचारिक अन्तर न रह गया हो तब हार – जीत के नकली कारण प्रकट होने लगते हैं । उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की आशा से अधिक सफलता से प्रफुल्लित मनमोहन सिंह से लगायत छुटभैय्ये कांग्रेसी और उनकी मस्केबाजी करने वाले टेवि चर्चाकार बेशर्मी से क्या-क्या कह रहे हैं [...]

Read Full Post »

इस लेख का – भाग एक , भाग दो     ईसाई कानूनों की स्थिति दिलचस्प है । ईसाई विवाह अधिनियम ( 1872 ) व ईसाई तलाक अधिनियम ( 1869 ) अंग्रेजों द्वारा बनाये गये हैं । ये एक सदी से ज्यादा पुराने हो चुके हैं । इस सदी में हमारा पूरा समाज बदल चुका है [...]

Read Full Post »

पिछला भाग – एक हिंदु विवाह अधिनियम (1955 ) सतही तौर पर ’समता’ पर आधारित है । वह अदालत से तलाक मांगने का अधिकार स्त्री-पुरुष दोनों को देता है । 1976 के अधिनियम में तलाक के साधारण स्थापित कारकों के अलावा , क्रूरता (मानसिक/शारीरिक ), परित्याग करना व परस्पर रजामंदी भी तलाक के लिए पर्याप्त [...]

Read Full Post »

[ वरिष्ट अधिवक्ता एवं लोकप्रिय चिट्ठेकार दिनेशराय द्विवेदी ने कल सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एक नि:संतान हिन्दू विधवा द्वारा अर्जित सम्पत्ति पर विवाह के तीन माह बाद गुजर गये पति के वारिसों का हक मुकर्रर करने के फैसले का विवरण अपने चिट्ठे पर दिया था । दिनेशजी ने उक्त पोस्ट में फैसले की बारीकियों को अत्यन्त [...]

Read Full Post »

पिछले हिस्से से आगे ए. काकबर्न नामक विद्वान ने दुनिया के मांस-इतिहास पर एक पेपर लिखा है, जिसमें संयुक्त राज्य अमरीका के एक प्रमुख सूअर-मांस उत्पादक राज्य उत्तरी केरोलीना के बारे में बताया है- “बदबूदार खाडियों के चारों और सूअरों के अंधेरे गोदाम बने हुए है, जिनमें उन्हें धातु के कटघरों में रखा जाता है [...]

Read Full Post »

पशुजन्य बिमारियो का नया आतंकवाद औद्योगिक पशुपालन से पैदा होती महामारियां दुनिया में अचानक एक नया आतंकवाद पैदा हो गया है। स्वाईन फ्लू या सुअर-ज्वर नामक एक नयी संक्रामक बीमारी से पूरा विश्व बुरी तरह आतंकित दिखाई दे रहा है। कई देशो में हाई-अलर्ट कर दिया गया है। हवाई अड्डो पर विशेष जांच की जा [...]

Read Full Post »

Technorati tags: प्रजातंत्र, लोकतंत्र, जनतंत्र, धनतंत्र, किशन पटनायक, चुनाव    ( जून , २००४ )। भारत में चुनाव आता है तो धनतंत्र की स्थिति देखकर मन में एक प्रकार की मायूसी आती है । क्या इस चक्रव्यूह का भेदन किया जा सकता है ? कभी भेद लेंगे तो सही सलामत लौट भी पायेंगे ? मूलभूत [...]

Read Full Post »

स्विट्जरलैण्ड के सबसे बड़े बैंक यूबीएस ने एक अमेरिकी अदालत से कहा है कि वह स्विस बैंकों में खाता रखने वाले ५०,००० ग्राहकों पर चल रहे मुकदमे को आगे न बढ़ाये । यूबीएस ने फ़्लोरिड़ा की एक संघीय अदालत को बता दिया है कि यदि वह अपने ग्राहकों के बारे में सूचनाएं प्रदान करेगा तो [...]

Read Full Post »

Follow

Get every new post delivered to your Inbox.

Join 302 other followers