[ २८ , २९ , ३० अक्टूबर २००९ को धनबाद में समाजवादी जनपरिषद का द्विवार्षिक सम्मेलन सम्पन्न हुआ । सम्मेलन का उद्घाटन दल से जुड़े चिन्तक सच्चिदानन्द सिन्हा ने किया । प्रस्तुत है उनका उद्घाटन भाषण ] झारखण्ड , जहाँ हम सम्मेलन में बैठे हैं , एक अर्थ में मानव इतिहास की समेकित प्रतिछाया प्रस्तुत [...]
Archive for अक्टूबर, 2009
इलाहाबाद गोष्ठी / स्फुट झलकियाँ /स्फुट विचार
Posted in blogging, media, politics, tagged इलाहाबाद, नामवर, ब्लागिंग, ब्लॉग, ब्लॉगिंग.ब्लाग, वि्भूती, हिन्दी ब्लॉग, हिन्दी ब्लॉगिंग on अक्टूबर 25, 2009 | 30 Comments »
प्रियंकर साहित्य , काम – काज की भाषा और चिट्ठेकारी इन सभी मोर्चों पर हिन्दी-सेवा में लगे हैं । अपने तजुर्बे से उन्हों ने मुझे बताया था कि तदर्थवाद ने हिन्दी का नुकसान किया है । विभूति राय प्रशासनिक अधिकारी रहते हुए सिर्फ़ साहित्य से नहीं जुड़े रहे उनके स्पष्ट , प्रतिबद्ध सामाजिक सरोकार भी [...]
एक शिक्षक कैसे पढ़ाएगा पांच कक्षाओं को?/उजड़े उखड़े गाँव की कहानी/बाबा मायाराम
Posted in विस्थापन, displacement, environment, madhya pradesh, tiger, tribal, tagged adivasi, अभयारण्य, आदिवासी, कोरकू, धाई, नई धाईं, बाघ, बाबा मायाराम, मायाराम, विस्थापन, baba mayaram, bori, displacement, nayi dhain, sanctuary, tiger reserve on अक्टूबर 22, 2009 | 5 Comments »
[मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले में वन्य प्राणियों के लिए तीन सुरक्षित उद्यान/अभयारण्य बनाए गए है– सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान, बोरी अभयारण्य और पचमढ़ी अभयारण्य। तीनों को मिलाकर फिर सतपुड़ा टाईगर रिजर्व बनाया गया है। तीनों के अंदर कुल मिलाकर आदिवासियों के लगभग 75 गांव है और इतने ही गांव बाहर सीमा से लगे हुए है। इन [...]
सिंथेटिक वस्त्र : एक महिला सामाजिक कर्मी का नोट / नीला हार्डीकर
Posted in कपड़ा नीति, gandhi, khadi, textile policy, women, tagged कपड़ा नीति, खादी, गरीबों का कपड़ा, सिन्थेटिक कपड़े, synthetic cloth on अक्टूबर 12, 2009 | 9 Comments »
[ ' खादी की राखी ’ पर मेरी एक पोस्ट पर नीला हार्डीकर ने एक गंभीर टिप्पणी डाक से भेजी थी । इसे मैंने अलग पोस्ट के रूप में प्रकाशित किया था । इसके साथ ही नीलाजी ने ’सिंथेटिक वस्त्रों’ पर एक सुन्दर नोट भी भेजा था। इसे आज प्रकाशित किया जा रहा है । [...]
जयप्रकाश : जन्मजात योद्धा : महात्मा गांधी
Posted in jayaprakash narayan, tagged गांधी, गांधी मैदान, जयप्रकाश नारायण, जेपी, पटना, सम्पूर्ण क्रान्ति, gandhi, jayaprakash narayan, jp on अक्टूबर 11, 2009 | 2 Comments »
गांधीजी की नजर में जेपी जयप्रकाश जमजात योद्धा है , उसने अपने देश की मुक्ति के लिए सबकुछ का त्याग किया है । परिश्रम और प्रयत्न करने से वह कभी चूकता नहीं । कष्त और यातना सहने की उसकी क्षमता का कोई जवाब नहीं । – महात्मा गांधी यह संघर्ष केवल सीमित उद्देश्यों के लिए [...]
मों ब्लां कलम-कम्पनी से तुषार गांधी ने ७२ लाख रुपये लिए हैं
Posted in corporatisation, gandhi, tagged bapu, fountain pen, gandhi, gopalkrishna, pen, taj hotel, tushar on अक्टूबर 5, 2009 | 16 Comments »
फाउन्टेन पेन बनाने वाली जर्मन कम्पनी मों ब्लां द्वारा ’डांडी यात्रा से प्रेरित हो कर’ कुल २४१ की संख्या में गांधी-छाप फाउन्टेन पेन बनाने की खबर आप सब जानते हैं । इस कलम की कीमत भारत में ११.३९ लाख है ,यह भी जानते हैं। गांधी के प्रति समझदारी और आदर से प्रेरित हो कर भारत [...]
डाक से प्राप्त दो महत्वपूर्ण टिप्पणियों को सलाम
Posted in blogging, environment, gandhi, industralisation, khadi, tagged ambani, अंबानी, कृपलानी, खादी, गांधीजी, नारायण देसाई, नीला हार्डीकर, बुनकर, रंगरेज, वस्त्र नीति, सिंथेटिक वस्त्र, स्वावलंबन, gandhi, khadi, narayan desai, neela hardikar, self reliance, synthetic cloth, textile policy on अक्टूबर 4, 2009 | 8 Comments »
ब्लॉगिंग का एक मूल स्वरूप रोजनामचा लिखने का रहा है । वेब + लॉग में ’लॉग’ के लिए हिन्दी शब्द फादर कामिल बुल्के के अनुसार – रोजनामचा , यात्रा – दैनिकी , कार्य- पंजी भी है । इस हिन्दी सेवी ऋषि की जन्म-शताब्दी वर्ष पर उनके कोश का उपयोग करते हुए ,पुण्य स्मरण के साथ [...]
