गांधीजी की नजर में जेपी
- जयप्रकाश जमजात योद्धा है , उसने अपने देश की मुक्ति के लिए सबकुछ का त्याग किया है । परिश्रम और प्रयत्न करने से वह कभी चूकता नहीं । कष्त और यातना सहने की उसकी क्षमता का कोई जवाब नहीं ।
- महात्मा गांधी
यह संघर्ष केवल सीमित उद्देश्यों के लिए नहीं हो रहा । इसके उद्देश्य तो बहुत दूरगामी है: भारतीय लोकतंत्र को ’ रीयल ’ याने वास्तविक तथा सुदृढ़ बनाना है ,जनता का सच्चा राज कायम करना है , समाज से अन्याय , शोषण आदि का अन्त करना , एक नैतिक , सांस्कृतिक तथा शैक्षणिक क्रान्ति करना , नया बिहार बनाना और अन्ततोगत्वा नया भारत बनाना है । यह सम्प्पूर्ण क्रान्ति है – total revolution है । और इसके आप अगुआ हैं । यह बड़ा कठिन है , परन्तु आपकी सफलता निश्चित है , क्योंकि यह युगधर्म की पुकार है ।
- ( ५ जून ’७४ को पटना के गांधी मैदान में आयोजित विराट जन-सभा में दिए गए ऐतिहासिक भाषण की टेप – ट्रान्स्क्रिप्ट से )
( दोनों चित्र राजनारायण लाल )



क्या जे पी ने गलत लोगो के साथ सम्पूर्ण क्रान्ति का सपना देखा जो ढाई साल में विखर गया ? या सत्ता का वायरस अच्छे अच्छे को संक्रमित कर देता है .
जे पी ने जो धार दी उसके कारन हे आज सत्ता धारी कांग्रेस कहलाने वाली पार्टी को चुनाव और लोकतंत्र का चोल पहनना पड़ रहा है वरना आज की कांग्रेस के लोग सीधा देश को बेच चुके होते |