नर्मदा बचाओ आन्दोलन का २८ अक्टूबर का ज्ञापन
प्रति,
श्री शिवराजसिंह चौहान,
मुख्यमंत्री,
मध्य प्रदेश शासन,
भोपाल म.प्र.
विषय : इंदिरा सागर परियोजना व औंकारेश्वर बाँध प्रभावितों के पुनर्वास बाबत्
द्वारा : जिला कलेक्टर, खण्डवा, म.प्र.
माननीय,
नर्मदा घाटी में बन रहे इंदिरा सागर और औंकारेश्वर बाँध के हजारों प्रभावित आज
खण्डवा जिला मुख्यालय पर एकत्र होकर नर्मदा घाटी में लाखों प्रभावितों की दुर्दशा की ओर
आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहते है। नर्मदा घाटी के विस्थापितों के लिये बनी पुनर्वास
नीति के अनुसार विस्थापितों का जमीन के बदले जमीन, वयस्क पुत्रों को जमीन एवं सभी को
पुनर्वास की अन्य सुविधाऐं देकर बसाना था। परंतु इस नीति का खुला उल्लंघन करते हुए,
विस्थापितों को धोखे एवं दमन के आधार पर ही उजाडा गया है।
इतना ही नहीं विस्थापितों के हक में दिये गये सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय
के फैसलों पर भी अमल नही किया जा रहा है। प्रदेश व देश के विकास के नाम पर त्याग
करने वाले लाखों विस्थापित आज दर दर की ठोकरे खाने पर मजबूर है जबकि दूसरी ओर
इंदिरा सागर और औंकारेश्वर बाँध बनाने वाली कम्पनी एन.एच.डी.सी. ने गत् ४ वर्षों में १२००
करोड़ रु. से अधिक का शुध्द लाभ कमाया है।
आज खण्डवा में एकत्र हम हजारों प्रभावित राज्य सरकार से मांग करते है कि : -
इंदिरा सागर परियोजना
१. माननीय मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने नर्मदा बचाओ आंदोलन द्वारा दायर याचिका में
पहले ८ सितम्बर २००६ ओर फिर २ सितम्बर २००९ को यह आदेश दिया है कि किसानों
के समस्त वयस्क पुत्र और अविवाहित पुत्रियों को ५.५ एकड़ कृषि जमीन दी जाए,
इसका पालन करते हुए वयस्क पुत्रों को तुरंत जमीन दी जाय।
२. विस्थापित मजदूर परिवारों को डूब से खुलने वाली हजारों एकड़ तलक की जमीन
बाँटी जाए तथा सिंचाई की सुविधा मुहैया कराई जाय ताकि पानी खुलने पर, हर साल
गेहूँ व गर्मी की फसल कमाकर विस्थापित मजदूर परिवार भी इज्जतदार रोजगार कर
सके।
३. इंदिरा सागर डूब क्षेत्र में विस्थापित मछुआरों के साथ गुंडागर्दी एवं मारपीट की जा रही
हैं। इसे तत्काल रोका जाय और इंदिरा सागर में मछली मारने का अधिकार ठेकेदार
को नहीं, विस्थापित को दिया जाय।
४. कृषि जमीनों को एन.एच.डी.सी. ने मृट्ठी भर मुआवजा देकर कब्जा कर लिया, जिससे
किसान दोबारा जमीन नहीं खरीद पाया। इसलिए जमीन के लिए दी जाने वाले विशेष
पुनर्वास अनुदान ¼बढ़त राशि½ को हरदा कमाण्ड के अच्छे रेट १.५ से २ लाख रूपए
एकड़ दिया जाय।
५. अभी भी डूब क्षेत्र में छूटे हुए हजारों घर, जो मुआवजे से छूटे है, उनका भू-अर्जन
करके मुआवजा दिया जाय।
६. जहाँ जमीन डूब चुकी है और अब जीने का कोई जरिया बचा ही नही है, उन गाँवों के
सभी घरों का भू-अर्जन करके विस्थापितों को मुआवजा तथा पुनर्वास दिया जाय।
७. इंदिरा सागर डूब क्षेत्र विशेषत: हरदा जिले में भयावह भ्रष्टाचार फैला है। प्रभावितों के
अनुदान दलालों द्वारा अधिकारियों की मिलीभगत से निकाले जा रहे है। इस पर रोक
लगाई जाय और स्वतंत्र जाँच कर दोषियो को दण्डित किया जाय।
८. सभी पुनर्वास स्थलों पर विस्थापितों के लिए पूर्ण रोजगार मुहैया किया जाय सभी
विस्थापितों के बी.पी.एल. राशन कार्ड बनाया जाय और पुनर्वास स्थल पर स्कूल,
अस्पताल, पेयजल आदि सभी सुविधाऐं प्रदान की जाय।
९. बहुत से गाँवों में अभी तक परिवार सूची ही नही बनी है और वे पुनर्वास के समस्त
लाभों से वंचित है, उन गाँव की परिवा सूचियाँ बनाकर, सभी विस्थापितों को पुनर्वास
के लाभ दिये जाय।
१०. हंडिया नेमावर तक के पीछे के इंदिरा सागर के डूब में आने वाले छूटे हुए गाँव का
सर्वे करके परिवारों को मुआवजा और पुनर्वास दिया जाय।
११. २५ प्रतिशत् से कम बची जमीन के भू-अर्जन के साथ परिसम्पत्तियों का भी अर्जन
किया जाय।
१२. जहाँ घर डूब है और जमीने बची है वहाँ १ किलो मीटर के अंदर पुनर्वास स्थल का
निमार्ण किया जाय।
१३. इंदिरा सागर बाँध स्थल पर जल स्तर सूचित करने वाला स्केल मिटा दिया गया है,
जो कि अत्यंत गंभीर है। बाँध का जल स्तर बताने वाला सार्वजनिक स्केल पुन: लिखा
जाय।
औंकारेश्वर परियोजना
१. उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुसार विस्थापितों को सिंचित
एवं उपजाऊ जमीन देकर बसाया जाय।
२. विस्थापितों को जमीन आवंटन के लिये अतिक्रमित जमीनों को न दिया जाय, ताकि
अन्य गरीब परिवारों की रोटी न छिने और विस्थापित की सुरक्षति बसाहट हो सके।
३. उच्च न्यायालय के दिनांक २३ सितम्बर २००९ एवं अन्य सभी आदेशों का तत्काल पालन
किया जाय।
४. न्यायालयीन आदेश तथा पुनर्वास नीति के अनुसार कमाण्ड एरिया में विस्थापितों की
इच्छा अनुसार घर प्लॉट दिये जाय।
५. छूटे हुए मकानों का भू-अर्जन किया जाय।
६. किसानों को अपर्याप्त मुट्ठी भर मुआवजा दिया गया है। कृषि जमीन का विशेष
पुनर्वास अनुदान ¼बढ़त राशि½ कम से कम १.५ से २ लाख रूपए एकड़ दिया जाय।
७. तालाब में मछली ठेकेदार को नहीं दी जाय। मछली मारने का सम्पूर्ण अधिकार
विस्थापित को दिया जाय।
८. पुनर्वास के लाभों से मनमानी पू्र्वक वंचित सभी परिवारों को घर प्लॉट, अनुदान व
समस्त लाभ दिया जाय।
९. सन् २००४ में धाराजी प्रकरण में सैकड़ो लोगों को एन.एच.डी.सी. द्वारा पानी छोड़ने से
बह जाना तथा पिछले महिने गांव कामनखेड़ा में नन्ही हरिजन बालिका का
एन.एच.डी.सी. द्वारा पानी बढ़ाने से मौत के लिए जिम्मेदार एन.एच.डी.सी. को दण्डित
किया जाय।
आशा है आप उपरोक्त पर तत्काल एवं गंभीरता से कारवाई करेंगे।
दिनांक : २८ अक्टूबर २००९
भवदीय,
इंदिरा सागर एवं औंकारेश्वर बाँध
प्रभावित हजारों विस्थापित
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उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायलय द्वारा पुनर्वास के लिए दिए गए निर्देशों और फैसलों को लागू किए जाने के लिए उपर्युक्त मांगें की गई हैं । इन मांगों के समर्थन में पूर्वघोषित कार्यक्रम के अनुसार हजारों विस्थापित जिला मुख्यालय पर लोकतांत्रिक तरीके से धरना दे रहे थे । जिला प्रशासन के समस्त अधिकारी लगता है इस पूर्व सूचना के कारण ही एक साथ ’बीमार’ पड़ गये थे । इन परिस्थितियों में धरनारत कुछ आन्दोलनकारी जिला कलेक्टर के दफ़्तर में दरियाफ़्त करने जा रही थीं । यही पुलिस द्वारा आन्दोलन की प्रमुख नेता चित्तरूप पालित , रामकुँवर रावत तथा कमला यादव को पुलिस द्वारा बर्बर तरीके से पीटा गया एवं फर्जी धाराएं लगा कर गिरफ़्तार कर दिया गया । इसके पश्चात खंडवा स्थित नर्मदा बचाओ आन्दोलन के दफ़्तर में बिना किसी वारंट छापा मार कर कम्प्यूटर आदि की छानबीन की गई तथा आन्दोलन के एक अन्य नेता आलोक अग्रवाल को भी पीट कर गिरफ़्तार कर लिया गया ।
समाजवादी जनपरिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुनील ने खण्डवा का दौरा करने के बाद कहा है कि म.प्र. की भाजपा सरकार ने शान्तिपूर्ण आन्दोलनकारियों पर बर्बर दमन चक्र चला कर अपने जन विरोधी स्वरूप को उजागर कर दिया है । सुनील ने विस्थापित आन्दोलनकारियों की समस्त मांगे तत्काल मानने तथा गिरफ़्तार लोगों को रिहा करने की मांग की है ।
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बहुत शर्मनाक है। जनतांत्रिक कहे जाने वाले दलों की सरकारें जनता का अधिक दमन करती हैं और उन्हें चंदा देकर खरीद लेने वाले धनिकों के लिए स्वर्ग का निर्माण करती हैं।
What else could you expect from such fascist governments? And in this no colour bar, whether it be Bhagva, Tiranga, or Lal – When they are in power, they behave in a very similar fashion.
Hansa and Daniel Mazgaonkar