मित्रों ,
इस ब्लॉग पर आप मणिपुर की जुझारू महिला सत्याग्रही इरोम शर्मिला के ऐतिहासिक अहिंसक प्रतिकार के बारे में पढ़ चुके हैं । इरोम शर्मिला की मांगों के प्रति नैतिक एकजुटता प्रकट करने के लिए समाजवादी जनपरिषद की इकाइयों ने कार्यक्रम भी लिए ।
इरोम शर्मिला चानू द्वारा अन्न-जल छोड़े हुए नौ साल पूरे हो चुके हैं । इस मौके पर तहलका की शोमा चौधरी ने उनके बारे में एक अच्छा आलेख लिखा है ।
इस बाबत हिन्दी चिट्ठों के पाठकों का समर्थन उनकी टिप्पणियों के द्वारा प्रकट हुआ है ।
आप सब से सादर अनुरोध है कि इस जुझारू महिला के प्राण रक्षा के लिए तथा ’आफ़्स्पा’ हटाने की उनकी मांग के सन्दर्भ में राष्ट्रपति को सम्बोधित ऑनलाईन प्रतिवेदन में हस्ताक्षर करें , समर्थन जतायें ।
प्रतिवेदन पर साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता हिन्दी लेखिका अलका सरावगी ने कहा है ,
” अपने ही देश के नागरिकों के अहिंसक सत्याग्रह और अति-मानवीय साहस को अनदेखा कर दमन की संस्कृति फैलाने वाली सरकार की भर्त्सना करती हूँ । “
ऑनलाईन प्रतिवेदन में हिन्दी में नाम ,टिप्पणी तथा संगठन का नाम दिया जा सकता है ।
सविनय ,
अफ़लातून ,
सदस्य राष्ट्रीय कार्यकारिणी , समाजवादी जनपरिषद .

ऐसी सभी तरह की अमानवीयता का सख्त प्रतिकार करता हूँ!
हस्ताक्षर कर आया हूँ । प्रविष्टि महत्वपूर्ण है । आभार ।
अहिंसक लड़ाई, हिंसक लड़ाई की अपेक्षा साहस का काम है. हमें अहिंसक के साथ खड़े होना चाहिए. मगर उसकी माँग के दूरगामी परिणाम क्या होंगे इसका खयाल भी करना होगा. भारत की अखण्डता की कीमत पर “अव्यवहारू सत्य” के साथ खड़ा नहीं हो सकता.
एक साहसी भारतीय के लिए तमाम शुभकामनाएं.
thik hai. sir