अखिल भारतीय शिक्षा अधिकार मंच की ओर से 24 फरवरी 2010 को दिल्ली में रामलीला मैदान से संसद मार्ग तक कूच किया गया जो संसद मार्ग पर एक विशाल जनसभा में तब्दील हो गया। इस रैली में 16 राज्यों के लगभग 35 शिक्षक व विधार्थी संगठन,शिक्षा अधिकार समूह एवम् विभिन्न बस्तियों के संगठन शामिल हुए। [...]
Archive for फ़रवरी, 2010
माँग रहा है हिन्दुस्तान ,सबको शिक्षा एक समान
Posted in common school system, corporatisation, education bill, tagged युवजन, विद्यार्थी, शिक्षा बिल, सबको शिक्षा, समान शिक्षा on फ़रवरी 26, 2010 | 2 Comments »
केरल में राष्ट्रीय आन्दोलन की याद में
Posted in ambedkar, कपड़ा नीति, blue gold, colas, consumerism, corporatisation, dharma chikitsa, globalisation, Kerala, khadi, water, women, tagged aflatoon, ambedkar, gandhi, george joseph, keshav menon, madhavan, Mathrubhumi, mayalamma, Temple-entry, Travancore, Vaikom, veerendrakumar on फ़रवरी 19, 2010 | 1 Comment »
गाँधी : क्या आप मुझे यह साबित कर सकते हैं कि आपको उन्हें सड़क का इस्तेमाल करने से रोकने का हक है ? मुझे यह बात पक्की तौर पर लगती है कि इन दलित वर्गों के लोगों को सड़क के इस्तेमाल का आप जितना ही हक है । नम्बूदरी प्रतिनिधि : महात्माजी , आप इन [...]
एक नदी थी जहाँ अब हाइ-स्कूल ,खेल का मैदान और मछली बाजार हैं
Posted in blue gold, corporatisation, environment, tagged कक्काड नदी, कन्नूर, conservation, kakkad river, kannur on फ़रवरी 17, 2010 | 16 Comments »
बीते गणतंत्र दिवस पर केरल के कन्नूर जिले के श्री पल्लिपरम प्रसन्नन कमर तक प्रदूषित पानी में तीन घण्टे तिरंगा ले कर खड़े रहे । उनके साथी दिन भर के उपवास पर थे । यह जगह कन्नूर नगरपालिका की सरहद से केवल चार किलोमीटर दूर स्थित पुज़ाथी पंचायत के अन्तर्गत है। कन्नूर जिले की ’जिला [...]
दस नम्बरी अध्यक्ष और सैमसुन्ग – साहित्य अकादमी गठजोड़ / जनसत्ता / अफ़लातून
Posted in corporatisation, globalisation , privatisation, literature, tagged उपभोक्तावाद, दक्षिण कोरिया, नं. १०, मलावरोध, साहित्य, साहित्य अकादमी, सुनील गंगोपाध्याय, सैमसुंग on फ़रवरी 2, 2010 | 14 Comments »
भारत में खेल , संगीत और कला के क्षेत्र में उपभोक्तावाद का अनुप्रवेश ढाई -तीन दशक पहले भली-भाँति हो चुका था । संगीत सम्मेलनों ,कला-प्रदर्शनियों और खेल-कूद स्पर्धाओं को कम्पनियाँ प्रायोजित करने लगी थीं । क्रिकेट मैच में पुरस्कार ,खिलाड़ियों के लिबास , बल्लों पर लगी कम्पनियों की चिप्पियाँ हमारे देश के लिए नई नहीं [...]
