From समाजवादी नेता एवं पूर्व सांसद श्री सुरेन्द्र मोहन का निधन (17 दिसंबर 2010) भारत के समाजवादी आंदोलन एवं जन आंदोलनों के लिए बड़ी क्षति है। उनकी मृत्यु से देश ने एक ईमानदार राजनेता, प्रखर विचारक और समर्पित समाजवादी खो दिया। उन्होंने अपना दीर्घ जीवन समाजवादी आदर्षो के लिए सतत् प्रयास में पूरी तरह समर्पित [...]
Archive for दिसम्बर, 2010
सुरेन्द्र मोहन को समाजवादी जनपरिषद की श्रद्धान्जलि
Posted in obituary, tagged mohan, obituory, surendra on दिसम्बर 18, 2010 | 3 Comments »
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- मुनादी / धर्मवीर भारती अगस्त 22, 2011खलक खुदा का, मुलुक बाश्शा का हुकुम शहर कोतवाल का हर खासो-आम को आगह किया जाता है कि खबरदार रहें और अपने-अपने किवाड़ों को अन्दर से कुंडी चढा़कर बन्द कर लें गिरा लें खिड़कियों के परदे और बच्चों को बाहर … Continue reading → […]
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यही है वह जगह- श्यामबहादुर ‘नम्र’ नहीं रहे , उनकी तीन कवितायें जनवरी 3, 2012श्यामबहादुर ‘नम्र’ आज सुबह गुजर गए | अविश्वसनीय | सम्पादक , कवि , क्रान्तिधर्मी सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में हमारे दिलों में वे हमेशा रहेंगे | अमन , अनुराग और अनुराधा बहन के कष्ट और शोक में हम सब शरीक हैं | नन्हे -से अमन को हल्की सी चपत लगा कर ‘मार खाओ’ कहने पर [...] […]
- प्रशान्त भूषण के बहाने एक बहस दिसम्बर 27, 2011फेसबुक पर वीरेंद्र यादव , अशोक कुमार पांडे और मैंने प्रशांत भूषण द्वारा हिमाचल प्रदेश में सरकार द्वारा दी गई इजाजत से खरीदी गई जमीन पर चर्चा की है |हिमाचल में अन्य राज्यों के नागरिक बिना सरकारी अनुमति के भूमि नहीं ले सकते | सामाजिक काम के नाम पर वहां की भाजपा सरकार ‘संघ’ को भी [...] […]
- यह तो कुमार विकल को भी नहीं पता था / हम नाहक़ दोस्तों को कोसते रहे/लाल्टू दिसम्बर 10, 2011यह तो कुमार विकल को भी ठीक ठीक नहीं पता था कि वह पीता क्यों था हम नाहक़ दोस्तों को कोसते रहे पीने के वजहें सबसे अधिक तब मिलती हैं जब पास कोई न हो अनजान किसी ग्रह से वायलिन की आवाज़ आती है आँखों में छलकने लगता है जाम उदास कविताएँ लिखी जाती हैं [...] […]
- श्यामबहादुर ‘नम्र’ नहीं रहे , उनकी तीन कवितायें जनवरी 3, 2012
सुरे-बेसुरे गीतों का ब्लॉग : आगाज़- नये और मधुर गीतयह प्लेलिस्ट खासकर अपने अनिवासी मित्रों के लिए । हांलाकि आज-कल कई फिल्में तो पहले विदेशों में रिलीज की जा रही हैं । यह गीत मुझे कर्णप्रिय लगते हैं और नये भी हैं । […]
- देव आनन्द : दिल अभी भरा नहींफेसबुक-युग में देव आनन्द का न रहना । कुछ मित्रों ने उन्हें उन्हींकी फिल्मों के गीतों को याद कर श्रद्धांजलि दी है। 'तेरी दुनिया में जीने से,बेहतर है कि मर जाएं'से शुरु कर ,'बादल,बिजली,चंदन,पानी जैसा अपना प्यार,लेना होगा जनम हमें कई-कई बार' से होते हुए 'बहुत दूर मुझे चले जाना है' तक।बड़ी बहन की लेडीज साइकिल और घर से इजाजत लेकर जिन […]
- सुमन कल्याणपुर की मेरी प्लेलिस्टसुमन कल्याणपुर चर्चा की हकदार हैं। वे उन गायिकाओं में प्रमुख हैं जिनके साथ भारत-रत्न ने राजनीति और तिकड़म की। होश संभालने के बाद मेरे मन पर छाप छोड़ गए तथा उनसे लगायत तरुणाई की दहलीज पर ये गीत मैंने सुने। पसंद किए होंगे इसलिए याद भी रह गये। आपको कैसे लगे ? […]
- रस के भरे तोरे नैन , आपकी याद आती रही रात भरयह दो गीत मैंने काफी पहले पोस्ट किए थे । मित्रूं ने पसन्द भी किए थे । कल उस पोस्ट की लिंक फिर से दी तो पता चला कि इनमें से एक यूट्यूब ने हटा लिया है। सुबह से क्रोम में शॉकवेव का प्लग - इन क्रैश कर गया है । अब प्रयास कर रहा हूं कि उन दो गीतों को नये सिरे से पोस्ट करूं। मित्र इन्द्रनाथ मोदक ने ध्यान दिलाया कि मूल पोस्ट में यूट्यूब इसे हटा चुका है। मित्र का आभा […]
- चार भाषाओं में क्रांति गीत /समाजवादी जनपरिषद , जलपाईगुड़ी - राष्ट्रीय परिषदइन गीतों की झलकियां मैं अपने नन्हे से कैमेरा में कैद कर सका । अवसर था समाजवादी जनपरिषद की उत्तर बंग के जलपाईगुड़ी में हुई राष्ट्रीय परिषद । उम्मीद है पसन्द करेंगे और टिप्पणी भी करेंगे ।सम्बलपुरी समूह गीतबांग्ला लोक शैली ’बाऊल’ पर आधारित राजनैतिक गीत / राधाकान्त बहिदारएडवोकेट जेमन का गाया मलयालम गीतमहात्मा फुले रचित अभंग - स्त्री पुरुष सर्व / स्वर संजीव सानेनो […]
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