इस लेख के पिछले भाग : एक , दो अंगरेजी पत्रकारिता और राजनैतिक चर्चा सदाचार को एक व्यक्तिगत गुण के रूप में समझती है । व्यक्ति का स्वभाव और संकल्प सार्वजनिक जीवन में सदाचार का एक स्रोत जरूर है , लेकिन राजनीतिक व्यक्तियों को सदाचार का प्रशिक्षण देकर या अच्छे स्वभाव के ’सज्जनों’ को राजनीति [...]
Archive for मार्च, 2011
भ्रष्टाचार / तहलका से उठे सवाल (३) / राजनैतिक समूहों में सदाचार के आधार किशन पटनायक
Posted in corruption, kishan patanayak, tagged कम्युनिस्ट, किशन पटनायक, तहलका, दल, भ्रष्टाचार, communist parties, communist party, corruption, kishan pattanayak on मार्च 31, 2011 | 2 Comments »
भ्रष्टाचार / तहलका से उठे सवाल (२) (सेना में भ्रष्टाचार)/ किशन पटनायक
Posted in corruption, kishan patanayak, tagged किशन पटनायक, तहलका, भ्रष्टाचार, सेना भ्रष्टाचार, corruption, corruption army, kishan pattanayak, tehalka on मार्च 28, 2011 | 3 Comments »
जनसत्ता और हिन्दुस्तान आदि में हिन्दी में कई लेख छपे हैं जिनमें नए प्रतिमानों को स्थापित करने की कोशिश है । एक लेख से यह साफ होता है कि तहलका के चलते हम जिस रक्षा मंत्रालय या रक्षा विभाग की बात बार-बार कर रहे हैं वह तो असल में हमारी सेना है । प्रतिरक्षा में [...]
भ्रष्टाचार/ तहलका से उठे सवाल (१) / किशन पटनायक
Posted in corruption, kishan patanayak, media, tagged किशन पटनायक, तहलका, बड़ा मीडिया, भ्रष्टाचार, big media, corruption, kishan pattanayak, tehalka on मार्च 27, 2011 | 4 Comments »
बड़े मीडिया के अधिकांश अंग्रेजी स्तम्भ लेखकों के लेखों में चालाकी का भारी पुट रहता है । चालाकी एक प्रकार की बेईमानी है । आउटलुक (१० अप्रैल , २००१) में प्रेमशंकर झा तहलका से प्रकट हुए भ्रष्टाचार पर अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए जो लिखते हैं उसके पीछे उनका सामाजिक दर्शन भी छुपा हुआ [...]
भ्रष्टाचार / असहाय सत्य (२) / किशन पटनायक
Posted in corruption, kishan patanayak, tagged असहाय सत्य, किशन पटनायक, भ्रष्टाचार, corruption, kishan pattanayak on मार्च 24, 2011 | 4 Comments »
पिछला भाग ऐसी स्थिति में बुराई का उद्घाटन या भ्रष्टाचार का भंडाफोड सिर्फ कुछ तथ्यों को दर्शाता है , जो सत्य है लेकिन असहाय सत्य है । जिस सत्य के साथ न्याय जुड़ता नहीं , वह कहने के लिए सत्य है । वह सिर्फ घटनाओं और आँकड़ों की सूची है , प्रतिभूति घोटाले पर मिर्धा [...]
भ्रष्टाचार / असहाय सत्य (१) / किशन पटनायक
Posted in corruption, kishan patanayak, tagged असहाय सत्य, किशन पटनायक, भ्रष्टाचार, शेषन, सामयिक वार्ता on मार्च 22, 2011 | 3 Comments »
” हमारे भीतर और सभी की जड़ में एक विराट सत्य है ; यह बात जो लोग अपने भीतर से उपलब्ध (ग्रहण) नहीं कर सकेंगे , वे कैसे विश्वास करेंगे कि मनुष्य का चरम लक्ष्य है : अपने भीतर छुपे हुए उस (विराट) सत्य को सभी आवरणों को भेदकर प्रकाशित करना … ।” – रवीन्द्रनाथ [...]
भ्रष्टाचार की बुनियाद कहाँ है ? (४) किशन पटनायक / राष्ट्रीय चरित्र,व्यक्ति आचरण,सांस्कृतिक आन्दोलन
Posted in corruption, kishan patanayak, tagged किशन पटनायक, भ्रष्टाचार, राष्ट्रीय चरित्र, व्यक्ति चरित्र, borruption, cultural movement, kishan pattanayak, national character on मार्च 19, 2011 | 4 Comments »
पिछले हिस्से : एक , दो , तीन सार्वजनिक आचरण तथा निजी आचरण का एक राष्ट्रीय पैमाना होता है ( यहाँ राष्ट्र का अर्थ देश है – स्वाभाविक रूप से प्रत्येक व्यक्ति और समुदाय का एक भौगोलिक-सांस्कृति-राजनीतिक अंचल होता है , वही देश है )। व्यक्ति आचरण का इस राष्ट्रीय चरित्र से दोतरफ़ा सम्बन्ध और [...]
जापान में तबाही: परमाणु ऊर्जा पर पुनर्विचार की जरूरत : -संघमित्रा देसाई
Posted in chernobyl, emergency, energy, nuclear power, tagged जापान, परमाणु दुर्घटना, परमाणु बिजली, बिजली घर, संघमित्रा on मार्च 15, 2011 | 6 Comments »
जापान के सेन्दाइ प्रांत में आई सुनामी से हुई तबाही को हम ठीक से स्वीकार भी नहीं कर पाए थे कि परमाणु बिजली-केन्द्रों के धराशायी होने की अकल्पनीय खबर आनी शुरु हो गई है. इन पंक्तियों के लिखे जाने तक उत्तर-पूर्वी जापान के तीन अणु ऊर्जा केन्द्रों – फ़ुकुशिमा, ओनागावा और तोकाई में कुल छह [...]
भ्रष्टाचार की बुनियाद कहां है ? (३) / किशन पटनायक / आर्थिक गैर बराबरी , विलासिता
Posted in corruption, tagged किशन पटनायक, गैर बराबरी, भ्रष्टाचार on मार्च 13, 2011 | 5 Comments »
पिछले भाग : एक , दो भ्रष्टाचार की उत्पत्ति के अन्य बिन्दुओं पर सचमुच मूलभूत परिवर्तन यानी क्रान्तिकारी परिवर्तन की जरूरत होगी । आधुनिक समाज में आर्थिक गैर-बराबरी भ्रष्टाचार की जननी है । जैसे – जैसे गैर-बराबरियों के स्तर अधिक होने लगते हैं , उनके दबाव से निचले स्तरों के लोग वैध तरीकों से ही [...]
भ्रष्टाचार की बुनियाद कहाँ है ? (२)पेंशन , पटवारी, जवाबदेही / किशन पटनायक
Posted in corruption, kishan patanayak, tagged accountability, administration, किशन पटनायक, जवाबदेही, पटवारी, पेंशन, प्रशासन, बुनियाद, भ्रष्टाचार, लेखपाल, corruption, kishan pattanayak, lekhpal, patwari, pension on मार्च 12, 2011 | 3 Comments »
पिछला भाग – (प्रथम) यह बात सभी को मालूम है ( जिसे मालूम नहीं है , वह सचेत नागरिक नहीं ) कि सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों को महीनों तक , सालों तक , कभी – कभी मरने तक पेंशन नहीं मिलती । ऐसी कोई प्रक्रिया या नियम अभी नहीं बना है कि सेवानिवृत्त होने एक महीने [...]
भ्रष्टाचार की बुनियाद कहां है ? (१)/ किशन पटनायक
Posted in corruption, kishan patanayak, politics, tagged किशन पटनायक, बुनियाद, भ्रष्टाचार, corruption, foundations, kishan patanayak, roots on मार्च 8, 2011 | 5 Comments »
प्रश्न : क्या भ्रष्टाचार उन्मूलन के लिए जनान्दोलन एक कारगर उपाय हो सकता है ? उत्तर : नहीं । सिर्फ भ्रष्टाचार की विशेष घटनाओं के प्रति जन आक्रोश को संगठित किया जा सकता है , किसी एक घटना को मुद्दा बनाकर एक राजनैतिक कार्यक्रम चलाया जा सकता है , जैसे बोफोर्स , बैंक घोटाला इत्यादि [...]
