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Archive for अप्रैल, 2011

पिछला भाग आधुनिकतावादियों का संकत यह है कि वे पारिवारिक वफादारी से तो मुक्त नहीं हो पाते लेकिन आधुनिकता के नाम पर अपने समाज के उन परंपरागत मूल्यों को नकार देते हैं जो हमारे समाज में कभी वैयक्तिक महत्त्वाकांक्षा पर अंकुश का काम करते थे । एक अंकुश तो था एक सीमा के बाद भौतिक [...]

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हमारे देश में भ्रष्टाचार एक अन्तहीन रुदन का विषय बन गया है – इस हद तक कि इसकी चर्चा सिर्फ रस्मी रह जाए और इसके मिटने की संभावना असंभव लगने लगे । यह बढ़ता हुआ विश्वास कि सभी भ्रष्ट हैं लोगों के मन में यह भाव भी पैदा करता है कि चूँकि सभी भ्रष्ट ही हैं [...]

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