पिछले भाग से आगे : भारत जैसे देश में जनतंत्र को चलाने के लिए हजारों ( शायद लाखों ) राजनैतिक कार्यकर्ता चाहिए । संसद , विधान सभा , जिला परिषद , ग्राम पंचायत आदि को मिला कर हजारों राजनैतिक पद हैं । प्रत्येक पद के लिए अगर दो या तीन उम्मीदवार होंगे , तब भी [...]
Archive for जुलाई, 2011
जनतंत्र का भविष्य / भाग २ / किशन पटनायक / भिक्षु , ब्राह्मण , बिशप /
Posted in corruption, election, globalisation , privatisation, kishan patanayak, tagged किशन पटनायक, बिशप, ब्राह्मण, भिक्षु, राजनीति का खर्च, समाज के अभिभावक on जुलाई 18, 2011 | 4 Comments »
जनतंत्र का भविष्य / किशन पटनायक / साभार ’दूसरा शनिवार’(सितम्बर १९९७) : सम्पादक – राजकिशोर
Posted in corruption, globalisation , privatisation, politics, tagged किशन पटनायक, जनतंत्र, दूसरा शनिवार, पूंजीपतियों पर आश्रित, भ्रष्टाचार, राजनीति का खर्च, corruption, kishan pattanayak on जुलाई 17, 2011 | 5 Comments »
[ करीब चौदह वर्ष पहले किशन पटनायक ने अपने मित्र राजकिशोर द्वारा सम्पादित पत्रिका ’दूसरा शनिवार’ (सितम्बर १९९७) में यह लेख लिखा था । यह पुराना लेख भविष्य की बाबत है इसलिए और ध्यान खींचता है । कई बातें इस दौर के लिए भी प्रासंगिक और नई हैं । लेख इन्टरनेट के लिहाज से लम्बा [...]
