” अन्ना हजारे के नेतृत्व में चल रहे भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन ने देश में एक आशा का संचार किया है । सरकार और व्यवस्था परस्त राजनैतिक दलों को जन शक्ति के सामने झुकना पड़ा है । गत ४ दशकों से टाले जा रहे एक प्रभावी लोकपाल/लोकायुक्त संस्था के गठन संबंधी कानून को जन शक्ति के दबाव में संसद में पारित करने का फैसला करना पड़ा है । जन शक्ति की आवाज के संसद में प्रतिध्वनित होने की भारतीय लोकतंत्र के लिहाज से यह एक ऐतिहासिक घटना है । “
समाजवादी जनपरिषद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पारित राजनैतिक प्रस्ताव में उपर्युक्त विचार व्यक्त करते हुए अन्ना हजारे द्वारा अनशन तोड़ने के बाद अपने वक्तव्यों उठाए गए व्यवस्था परिवर्तन संबंधी सवालों , जैसे मानव और प्रकृति के शोषण पर आधारित व्यवस्था , किसानों और मजदूरों का शोषण , विकेन्द्रीकरण , चुनाव – सुधार , ग्राम-सभा का अधिकार , शिक्षा का घोर व्यावसाईकरण आदि को लेकर आन्दोलन जारी रखने के संकल्प को दोहराया है ।
आगामी १० से १२ अक्टूबर को बिहार के सासाराम में दल का राष्त्रीय सम्मेलन आयोजित होगा ।बैठक में सम्मेलन में पेश होने वाले राजनैतिक , सामाजिक और आर्थिक प्रस्तावों पर व्यापक चर्चा हुई और उन्हें पूर्णांग रूप दिया गया । आगामी दिनों में समाजवादी जन परिषद की पहल पर ’व्यवस्था बदलो – देश बदलो’ के आह्वान के साथ ’परिवर्तन यात्रा निकाली जाएगी’।
गत २७ से २९ अगस्त को रांची में संपन्न समाजवादी जन परिषद की कार्यकारिणी की बैठक में सर्वश्री लिंगराज (अध्यक्ष ) , सोमनाथ त्रिपाठी (महमन्त्री ) , सुनील (उपाध्यक्ष) , अजीत झा,जोशी जेकब,चंचल मुखर्जी (तीनों सचिव),रमांकांत वर्मा ,चन्द्रभूषण चौधरी, शिवपूजन सिंह,सत्येन्द्र बर्मन,शिवजी,रामकेवल चौहान ,संतू भाई व अफ़लातून प्रमुख थे ।



खबर ठीक ठाक है। कुछ खास नहीं।
अच्छी खबर है। शुभ-कामनाऍं।
अफलातून भैया , क्या आपको नहीं लगता कि सम्पूर्ण क्रांति और व्यवस्था परिवर्तन कि बात करने वाले बुद्धिजीवियों राजनैतिक संगठनों और अन्य सिविल सोसायटी के लोगो को जो ऊँची जातियों में गरीब लोग है, जो सभी तरह के सरकारी सुविधाओ से वंचित रहते है , उनके भी हक कि बात उठानी चाहिए ! मेरे समझ में तो समाज में दो ही जातियां है एक गरीब और दूसरा अमीर !इस समाजिक व्यवस्था में अगड़ी जाति के इन पिछड़े लोगो कि सुध लेने वाली ना कोई पार्टी है ही कोई समाजिक संस्था ! समाजवादी जनपरिषद ने “व्यवस्था बदलो – देश बदलो ” का जो नारा दिया उसमे उन लोगो के व्यवस्था परिवर्तन के लिए कोई अजेंडा है कि नहीं ?
pata nahin mujhse kaise yeh khabar nahin lagi.aap ranchi aaye aur chale gaye. kash main aapse mulaqat kar pata.aajkal main ranchi me hi hun.hindi akhbar bhaskar ki chakri hai.kabhi aana ho to avshy suchit kijiye.
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शाहरोज भाई , मुझे यह पता न था कि आप रांची में हैं । तीन दिन तो नामकोम में बैठक में थे,अंतिम दिन ‘प्रभात खबर’ में हमारे साथी सुनील का व्याख्यान था ।