उनकी हत्या के सप्ताह भर पहले मैं उनके साथ कुछ समय था । होशंगाबाद जिले में गिरफ़्तार हमारे साथी के समर्थन में वे आए थे। होशंगाबाद स्टेशन पर अपना सीधा-सादा एयर बैग पलिटफार्म पर छोड़कर उन्होंने कहा ,’चलो चाय पीते हैं’।मैंने बैग का ध्यान दिलाया तो बोले कि देश भर में इतना भय फैला रखा [...]
Archive for सितम्बर, 2011
शहीद शंकर गुहानियोगी : रचना और संघर्ष का बेमिसाल मेल
Posted in politics, Trade Union, tagged गुहा नियोगी, छत्तीसगढ़, मुक्ति मोर्चा, राजनीति on सितम्बर 28, 2011 | 6 Comments »
फेसबुक पर लिखने पर नीतीशराज में दो लेखकों का निलम्बन / प्रमोद रंजन
Posted in तानाशाही dictatorship, blogging, tagged baitha, dictatorship, musafir, nitish, right to express, suspension on सितम्बर 17, 2011 | 6 Comments »
”पहले वे आए यहूदियों के लिए और मैं कुछ नहीं बोला, क्योंकि मैं यहूदी नहीं था/ फिर वे आए कम्यूनिस्टों के लिए और मैं कुछ नहीं बोला, क्योंकि मैं कम्यूनिस्ट नही था/ फिर वे आए मजदूरों के लिए और मैं कुछ नहीं बोला क्योंकि मैं मजदूर नही था/ फिर वे आए मेरे लिए, और कोई [...]
समाजवादी जनपरिषद के साथी प्रवीण वाघ नहीं रहे
Posted in ambedkar, brahminism, communalism, globalisation, obituary, tagged advocate pravin vagh, औरंगाबाद, प्रवीण वाघ, मृत्यु, pravin vagh on सितम्बर 15, 2011 | 7 Comments »
सामाजिक न्याय के प्रखर प्रवक्ता , औरंगाबाद उच्च न्यायालय के वरिष्ट वकील , समाजवादी जनपरिषद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सक्रिय सदस्य साथी प्रवीण वाघ हमारे बीच नहीं रहे । युवक क्रांति दल (युक्रांद) से अपनी राजनीति की शुरुआत करने वाले समाजवादी जनपरिषद के संस्थापकों में प्रमुख थे। मराठवाडा विश्वविद्यालय का नाम बाबासाहब अम्बेडकर के नाम [...]
गुजरात नरसंहार: बकरे की मां कब तक खैर मनाएगी / लेखक- नचिकेता देसाई
Posted in communalism, Gujarat, half pant, tagged गुजरात, दंगे, नरेन्द्र मोदी, सर्वोच्च न्यायालय on सितम्बर 15, 2011 | 7 Comments »
उच्चतम न्यायालय ने २००२ के गुजरात में हुए नरसंहार के लिए मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी जिम्मेदार हैं कि नहीं इस बात की जांच अहमदाबाद के मेजिस्ट्रेट की अदालत को सुपुर्द कर दी है. उच्चतम न्यायालय ने यह भी निर्देश दिए कि इस जांच में उसके द्वारा नियुक्त स्पेशियल इन्वेस्टिगेशन टीम एवं एमिकस क्यूरी (वरिष्ट अधिवक्ता) की [...]
अराजनीति के खतरे
Posted in corruption, ngoisation, politics, tagged depoliticisation, ngo, ngoisation, non political on सितम्बर 6, 2011 | 2 Comments »
चुनावों के करीब जाति-संगठनों के सम्मेलनों में जो प्रस्ताव पारित किए जाते हैं उनमें – ‘हमारी जाति के लोगों को सभी दल अधिक-से-अधिक टिकट दें ‘ टाइप प्रस्ताव प्रमुख होता है । इन संगठनों का एक मुख्य दावा रहता है कि वे अराजनैतिक हैं । सभी दलों से बिरादरी के लोगों के लिए टिकट मांगना [...]
