भारत के खुदरा व्यापार में विदेशी कंपनियों को इजाजत देने का भारत सरकार का फैसला भारत राष्ट्र और भारत की जनता के प्रति एक विश्वासघात है । संविधान के तहत भारत देश की रक्षा करने की शपथ लेकर हमारे नेताओं एवं जनप्रतिधियों ने भारतीय जनजीवन पर एक और हमला किया है।
1991 में जब से वैश्वीकरण ,निजीकरण और उदारीकरण की नीतियां शुरु हुई हैं तब से भारत की जनता के ऊपर कई मुसीबतें आई हैं । मंहगाई , गरीबी , कुपोषण , बेरोजगारी , भ्रष्टाचार और घोटाले चरम सीमा पर पहुंच गये हैं । देश के किसान व बुनकर आत्महत्या कर रहे हैं । कई कारखाने एवं छोटे उद्योग बन्द हो गए हैं । खेती और उद्योग के बाद खुदरा व्यापार में इस देश में सबसे ज्यादा रोजगार मिलता है । रोजगार का यह आखिरी सहारा भी सरकार छीन लेना चाहती है । करोडो की संख्या में छोटे दुकानदारों का धंधा खतरे में आ गया है ।
सरकार यह झूठ बोल रही है कि विदेशी कंपनियां आने से रोजगार पैदा होंगे। जब 50 और 100 छोटी – छोटी दुकानों की जगह वालमार्ट जैसा एक विशाल मॉल ले लेगा जहां पर सारा काम मशीन और कम्प्यूटर से होगा तो रोजगार बढ़ेगा या घटेगा ?
अब यह साफ हो गया है कि पिछ्ले कुछ सालों से सरकारें अतिक्रमण हटाने के नाम पर पटरी – फुटपाथ पर दुकान लगाने वालों , ठेलों तथा गुमटियों वालों को हटाने का जो काम कर रही थी , वह दरअसल देशी- विदेशी कंपनियों के लिए रास्ता साफ कर रही थी । सरकारों ने उनकी रोजी रोटी छीन कर भुखमरी के कगार पर पहुचा दिया है । कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए देश की गरीब जनता पर अत्याचार करना पिछले 20 सालों में सरकारों का नियम बन गया है ।
सरकारों का दूसरा झूठ है कि इससे किसानों का फायदा होगा । खुदरा व्यापार में रिलायंस (रिलायंस फ्रेश ) ,आई.टी.सी ( चौपाल सागर ) , भारती , एन मार्ट , हरियाली जैसी बड़ी – बड़ी देशी कंपनियां तो पहले से घुस चुकी हैं । इससे भारत के किसानों को क्या फायदा हुआ ? क्या उन्हें बेहतर दाम मिले ? क्या खेती का संकट दूर हुआ ?
उल्टे सरकार के इस कदम से भारत की खेती पर दुनिया की बड़ी – बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों का कब्जा हो जाएगा । भारत का किसान इन दैत्याकार कंपनियों के चंगुल में फंसा छटपटाता रहेगा ।इस बात की पूरी संभावना है कि किसानों की उपज खरीदने के लिए कंपनियां आ चुकी हैं , यह बहाना लेकर इसके बाद सरकार समर्थन मूल्य पर कृ्षि उपज की खरीदी बंद कर दे । इसके लिए इन विदेशी कंपनियों का दबाव भी होगा , ताकि वे दाम गिराकर किसानों का माल सस्ता खरीद सकें।
सरकार का तीसरा झूठ है कि इससे व्यापार में बिचौलिए खत्म होंगे । यह ठीक है कि बिचौलिए व छोटे उत्पादकों का शोषण करते हैं । किन्तु सरकार के इस कदम से बिचौलिए खत्म कहां होंगे ? छोटे – छोटे लाखों बिचौलियों की जगह चंद बहुराष्ट्रीय बिचौलिए ले लेंगे । जिनकी बाजार को प्रभावित व नियंत्रित करने तथा शोषण करने की अपार ताकत होगी । वे किसानों , उत्पादकों और उपभोक्ताओं – सबको लूटकर मुनाफा अपने देश में ले जाएंगी ।
पिछले 20 सालों में हमारी सरकारें इस देश के जन-जीवन के हर क्षेत्र को विदेशी मुनाफाखोर कंपनियों के हवाले करती गई हैं । यह आखिरी क्षेत्र बचा था , जिसी भी सरकार उन्हें तश्तरी में परोसकर उपहारस्वरूप देना चाहती है । अमरीकी आकाओं का हुकुम बजाने तथा उन्हें खुश करने के लिए हमारी सरकार ने यह काम किया है । हजारों ईस्ट इंडिया कंपनियों को वापस बुलाया है । यह भारत की आजादी की लडाई में लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का अपमान और विश्वासघात है ।
आइए , हम सब पूरी ताकत से इस जन विरोधी और राष्ट्र विरोधी कदम का विरोध करें ।किंतु यह ध्यान रखें कि हमें वैश्वीकरण , उदारीकरण , निजीकरण की पूरी नीतियों का विरोध करना होगा जिसके तहत ये हमले हो रहे हैं । जीवन के हर क्षेत्र में देशी-विदेशी कंपनियों की घुसपैठ का भी विरोध करना होगा। देश की विपक्षी पार्टियां भी इस मामले में गुनहगार हैं ।
समाजवादी जनपरिषद इस मसले पर 1 दिसम्बर को आयोजित भारत बन्द का समर्थन करती है तथा समाज के सभी तबकों से बंद का समर्थन करने की अपील करती है। जनपरिषद से जुडा पटरी-व्यवसाई संगठन भी प्रस्तावित बंद का समर्थन करता है।
(रामजनम, प्रान्तीय महामन्त्री,सजप ) (अफलातून ,सदस्य , राष्ट्रीय कार्यकारिणी,सजप )( डॉ. सोमनाथ त्रिपाठी ,राष्ट्रीय महामन्त्री,सजप) (काशीनाथ , अध्यक्ष , पटरी व्यवसाई संगठन )(मो. भुट्टो ,मन्त्री,पटरी व्यवसाई संगठन )
भारत की जनता पर एक और हमला: खुदरा व्यापार में विदेशी कम्पनियां
नवम्बर 30, 2011 Aflatoon अफ़लातून द्वारा

देखिए इस पर हमारे नए महान अवतार अन्ना चुप हैं, रहेंगे ही शायद। …अब आदमी को खुलेआम बाजार में दासों की तरह बेचने भी आएंगी विदेश बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ और हमारी सरकार महान है।
yeh wakaee jalata mudda hai…is vishay per poori bahas ki zaroorat hai …nahak hi sarkar thel-thalkar ise lagoo karne per amaada hai. hamare kisan kaise labhanvit honge, chhote aur bahut chhote dukandaar kaise iski maar se bach jayenge iska sahi sahi byora sarkar ki taraf se aana chahiye…per yaad rakhen…commonwealth khelon per kharabon ki rakam uda denewali sarkar ne kabhee humse raay li thee kya…?
आपकी तमाम बातों से सहमत! इस योजना में बीच के तमाम लोगों को हटाकर कुछ बड़े बिचौलिये आ जायेंगे बस्स!