गांधी जी और कांग्रेस ने दूसरी गोलमेज वार्ता के बाद पहली बार डॉ. अम्बेडकर को दलितों के प्रतिनिधियों के रूप में मान्यता दी । इसी लिए पूना करार में डॉ. अम्बेडकर को एक पक्ष बनाया गया । ये दोनों विभूतियाँ दलित समस्या के प्रति एक दूसरे के दृष्टिकोण से अच्छी तरह वाकिफ़ थीं । [...]
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जहाँ तक मनुस्मृति , गीता आदि ग्रन्थों के दलित विरोध को पुष्ट करने का प्रश्न है , गांधी जी का दृष्टिकोण स्पष्ट है ।उन्हें यह विश्वास था कि वे हिन्दू धर्म का एक सुधरा स्वरूप भारतीय समाज से ग्रहण करवा लेंगे । उनके दृष्टिकोण को प्रकट करने वाला निम्नलिखित पत्र अलीगढ़ विश्वविद्यालय के संस्कृत के [...]
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Posted in chikitsa on March 11, 2008 | 9 Comments »
आपात-काल के आखिरी दौर में लोकनायक जयप्रकाश के गुर्दों के बिगड़ने के बाद उन्हें कुछ दिन चंडीगढ़ के स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान में रखा गया फिर मुम्बई ले आया गया ।जसलोक अस्पताल में डाइलिसिस होती और गैर-डाइलिसिस दिनों में वे अपने मित्र अखबार मालिक रामनाथ गोयनका के एक अतिथि गृह में आराम करते । दोनों ही [...]
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