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Archive for the ‘dharma chikitsa’ Category

      गांधी जी और कांग्रेस ने दूसरी गोलमेज वार्ता के बाद पहली बार डॉ. अम्बेडकर को दलितों के प्रतिनिधियों के रूप में मान्यता दी । इसी लिए पूना करार में डॉ. अम्बेडकर को एक पक्ष बनाया गया । ये दोनों विभूतियाँ दलित समस्या के प्रति एक दूसरे के दृष्टिकोण से अच्छी तरह वाकिफ़ थीं । [...]

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जहाँ तक मनुस्मृति , गीता आदि ग्रन्थों के दलित विरोध को पुष्ट करने का प्रश्न है , गांधी जी का दृष्टिकोण स्पष्ट है ।उन्हें यह विश्वास था कि वे हिन्दू धर्म का एक सुधरा स्वरूप भारतीय समाज से ग्रहण करवा लेंगे । उनके दृष्टिकोण को प्रकट करने वाला निम्नलिखित पत्र अलीगढ़ विश्वविद्यालय के संस्कृत के [...]

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