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Archive for the ‘corporatisation’ Category

देश हित से ऊपर विदेशी पूंजी
    विदेशी पूंजी का मोह इतना ज्यादा है कि देश हित , जन स्वास्थ्य , पर्यावरण सबको धता बताई जा रही है । शीतल पेय की कोका कोला - पेप्सी कंपनी की बोतलें नुकसानदायक हैं , यह प्रमाणित हो चुका है । फिर भी उन्हें प्रतिबन्धित करने की हिम्मत भारत [...]

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     निजीकरण-उदारीकरण के घोटाले
    निजीकरण के पीछे एक और दलील थी कि सरकारी काम में काफी भ्रष्टाचार है । लेकिन जिस तरीके से निजीकरण और उदारीकरण हो रहा है , उसने तो भ्रष्टाचार की सारी मर्यादाएं तोड़ दी हैं ।पिछले कुछ सालों में इतने घोटाले हुए हैं और इतने बड़े घोटाले हुए हैं कि ‘घोटाला’ शब्द के मायने बदल गये [...]

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विदेशी कंपनियों का हड़पो अभियान
गतांक से आगे : दूसरे प्रकार की विदेशी पूंजी-प्रत्यक्ष विदेशी निवेश- वास्तव में देश के अन्दर आती है । इसे दो भागों में बांटा जा सकता है - (एक) विलय और अधिग्रहण ( Merger & Acquisition ) तथा (दो) हरित निवेश ( Greenfield investment ) । भारत में प्रत्यक्ष पूंजी निवेश [...]

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विदेशियों का हुक्म सिर-आँखों पर ( गत प्रविष्टी से आगे )
    देशप्रेम के स्थान पर विदेश प्रेम तथा आम जनता के स्थान पर कंपनियों के हितों को बढ़ाना - यही भूमंडलीकरण की नई व्यवस्था का मर्म है । इस अंधे विदेश प्रेम ने हमारे मंत्रियों , अधिकारियों , विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों की सोचने की शक्ति को भी [...]

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    लगभग सात वर्ष पहले की बात है । दूरसंचार क्षेत्र में निजी कंपनियों को लाइसेन्स दिये हुए कुछ वर्ष हो चुके थे । किन्तु इन कंपनियों ने सरकार को लाइसेन्स शुल्क का नियमित भुगतान नहीं किया था और उनके ऊपर अरबों रुपया बकाया हो गया था । जब उनको नोटिस दिए जाने लगे , [...]

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[ विशेष आर्थिक क्षेत्रों के कारण सिर्फ भारत सरकार को अगले चार वर्षों में लगभग ९३,००० करोड़ रुपए के कर - राजस्व का नुकसान होगा । एक तरफ तो भारत सरकार पैसे की तंगी का रोना रोती है और अपना घाटा व अनुदान कम करने के लिए गरीबों व आम जनता के लिए राशन , [...]

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 गत प्रविष्टी से आगे : आन्ध्रप्रदेश में काकिनाडा में तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग के विशेष आर्थिक क्षेत्र एवं तेलशोधक कारखाने के लिए १०,००० एकड़ खेती की उपजाऊ भूमि ली जा रही है , जिसे छोड़ने के लिए किसान तैयार नहीं है। हरियाणा में रिलायन्स का विशेष आर्थिक क्षेत्र भी विवादों से घिर गया है। हरियाणा [...]

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[मुम्बई के पास नवी मुम्बई से लगा ३५००० एकड़ का रिलायन्स का ' महामुम्बई विशेष आर्थिक क्षेत्र ' तो इतना विशाल है कि यह मुम्बई महानगर के एक तिहाई क्षेत्रफल के बराबर है। ]
गतांक से आगे
    इसी प्रकार  , विशेष आर्थिक क्षेत्र कानून में विनिर्माण की परिभाषा इतनी व्यापक रखी गयी है कि उसमें रेफ्रिजरेशन ( [...]

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[ महानगरों के पास सस्ती जमीन , करों में छूट और बाहर से सीमेंट, इस्पात , लिफ़्ट , बिजली उपकरण आदि नि:शुल्क आयात करने की सुविधा के कारण कई जमीन - जायदाद का धन्धा करने वाली निर्माण कंपनियों के लिए भी ' विशेष आर्थिक क्षेत्रों ' का आकर्षण बढ़ गया है। ]
पिछली प्रविष्टि से आगे :
    [...]

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सामयिक वार्ता/नवंबर,२००६ से लिया गया .
व्यंग्य
मुझे लगता है , भारत सरकार हमेशा अधूरा काम करती है . उसने राजनीतिक आजादी दी , पर आर्थिक आजादी देना भूल गयी .दलितों और पिछड़ों को आरक्षण दिया , पर पिछड़े वर्गों को इससे वंचित रखा . हिन्दी को राजभाषा बनाया , पर अंग्रेजी को छुआ तक नहीं . [...]

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