प्रतिबन्धित पुस्तिकायें,एक किस्सा और एक खेल
Posted in emergency on June 20, 2007 | No Comments »
यह तीन पुस्तिकायें लिखी गयीं थीं , ’दु:शासन पर्व’ के दौरान । ’तानाशाही को कैसे समझें’ पुस्तिका छपी, बार-बार छपी , तीन भाषाओं (गुजराती,हिन्दी,अंग्रेजी) में छपी । पुस्तिका के लेखक की गिरफ़्तारी के लिए तीन शहरों में गिरफ़्तारी वॉरण्ट जारी हुए । ’सुरुचि छापशाला’ , बारडोली के संस्थापक मोहन परीख ने बहादुरी से सरकारी दबावों का [...]

