Archive for the ‘Gujarat’ Category
गुजरात नरसंहार: बकरे की मां कब तक खैर मनाएगी / लेखक- नचिकेता देसाई
Posted in communalism, Gujarat, half pant, tagged गुजरात, दंगे, नरेन्द्र मोदी, सर्वोच्च न्यायालय on सितम्बर 15, 2011 | 7 Comments »
हमने मोदी को वोट क्यों दिया : त्रिदिप सुहृद
Posted in Gujarat, politics, tagged गुजरात, गौरव, मोदी, सुहृद, Gujarat, modi, pride, suhrud on दिसम्बर 27, 2007 | 7 Comments »
हमने मोदी को वोट क्यों दिया : त्रिदिप सुहृद का यह लेख आज ‘हिन्दुस्तान’ में प्रकाशित हुआ है तथा यहाँ उसकी पी.डी.एफ़. फ़ाइल साभार प्रस्तुत है ।
इस लेख को यहाँ प्रस्तुत करते वक्त कुछ टिप्पणियाँ की जा रही हैं ।
चिट्ठेकार संजय बेंगाणी और सागरचन्द नाहर मुख्यमन्त्री नरेन्द्र मोदी से बेहतर गुजराती बोलते हैं । दोनों चिट्ठेकारों को सुना है अथवा गुजराती में चैटियाया है । मुख्यमन्त्रीश्री की ‘गुजराती’ को भी सुना है । इससे क्या फर्क पड़ता है? ओड़िसा के मुख्यमन्त्री नवीन पटनायक से मैं बेहतर ओड़िया बोल लेता हूँ और मुमकिन है कि चिट्ठेकार प्रमोद सिंह भी । अब आती है गुजरात-गौरव की बात ! त्रिदिप सुहृद के गुजरात के प्रति गौरव और मोदी की जीत पर अमेरिका में शैम्पेन की बोतलें खोलने वाले अनिवासी गुजरातियों और गुजु नवधनाढ्यों के गौरव में जो फर्क है वह इस सुन्दर आलेख से स्पष्ट है ।
त्रिदिप जी गुजरात के एक प्रमुख प्रबन्ध संस्थान में प्रोफ़ेसर हैं और गाँधी प्रेमी हैं। केन्द्र में राजग की सरकार के शासन काल में सम्पूर्ण गांधी वांग्मय के इलेक्ट्रॉनिक संस्करण को ‘सम्पादित ‘ कर दिया गया था, तब त्रिदिप जी ने इकॉनॉमिक एण्ड पॉलिटिकल वीकली में लिखे लेख में एक तालिका बना कर इस कुकृत्य के बेनकाब करने में अहम भूमिका निभाई थी । गुजरात के त्रिदिप सुहृद सरीखे सम्मानित नागरिकों से उस सूबे की लाज बचती है !
मोदी की जीत गुजरात की शर्मनाक हार है
Posted in Gujarat, half pant, politics on दिसम्बर 23, 2007 | 15 Comments »
मोदी द्वारा गुजरात की जनता का साम्प्रदायिकीकरण फिर सफलतापूर्वक प्रकट हुआ। उसका विकल्प न होना दुर्भाज्ञपूर्ण है । कांग्रेस का भोथरा सेक्यूलरवाद और मोदी की कांग्रेसी आर्थिक नीति गुजरात की जनता के लिए बुरे दूरगामी परिणाम लाएगी । हिटलर ने भी चुनाव जीता था और बहुसंख्यक की फिरकापरस्ती और उन्माद पर सवार हो कर राजीव गाँधी ने भी। एक झूठा दर्प भी हिटलर ने पैदा किया था, मोदी ने भी किया है। गनीमत है कि अभी भी हिटलर जितनी सफलता उसे नहीं मिली है । डॉ. लोहिया की बात याद आ रही है : गद्दार अपने आप में या गद्दारी भी खतरनाक नही होती , जनता का समर्थन न मिलने पर वह बेमानी साबित हो जाती है। गद्दारी खतरनाक तब हो जाती है जब उसको जनता का समर्थन मिल जाता है। राष्ट्रतोड़क राष्ट्रवाद का प्रयोग सीमित दायरे में सफल होगा- जिन सूबों में सिर्फ दो दल होंगे , लगभग एक जैसे।
अहमद पटेल के भरोसे नरेन्द्र मोदी
Posted in globalisation , privatisation, Gujarat, politics on दिसम्बर 1, 2007 | 4 Comments »
Technorati tags: गुजरात, नरेन्द्र मोदी, अहमद पटेल, साम्प्रदायिकता, कांग्रेस, narendra modi, ahmad patel, gujarat, communalism, liberalisation
नरेन्द्र मोदी के ‘विकास’ और मनमोहन सिंह अथवा बुद्धदेव के ‘विकास’ में फर्क नहीं है। स्वदेशी जागरण मंच अथवा उमा भारती का रिलायन्स फ्रेश के प्रति विरोध क्रमश: राँची और इन्दौर में होता है । अहमदाबाद , वडोदरा और सूरत में यह विकास (रिलायन्स फ्रेश टाइप) फलता – फूलता है । ‘ विशेष आर्थिक क्षेत्र ‘ और उनके लिए बनने वाले परमाणु बिजली घर यदि बंगाल के सिंगूर के निकट बनते हैं तो गुजरात के भावनगर के निकट भी बन रहे हैं ।
सिर्फ़ साम्प्रदायिकता को राजनीति का आधार बनाने की जैसे एक सीमा है वैसे ही साम्प्रदायिकता-विरोध की राजनीति करने वालो की भी एक सीमा होती है यदि वे आर्थिक नीतियों का विकल्प नहीं दे पाते ।
गुजरात से लोकसभा के लिए चुने गए सदस्यों की संख्या में भाजपा और कांग्रेस में उन्नीस – बीस (मुहावरा) का फर्क है । इसके बावजूद मोदी विरोधी सामाजिक तबके ( पटेल ) के भाजपा के विरोध में मुखर न हो पाना मोदी के हक में सब से बड़ी ताकत है । केशूभाई पटेल समर्थक कई विधायक भले ही इस बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं परन्तु स्वयं केशूभाई और कंशीराम राणा जैसे मोदी विरोधी नेताओं ने भाजपा नहीं छोड़ी है । वे अभी भी ख्वाब देख रहे हैं कि चुनाव के बाद वे ही भाजपा विधायक दल के नेता चुने जाएंगे। इस परिस्थिति का पूरा पूरा लाभ उठाने के लिए नरेन्द्र मोदी एक फिरकावाराना महीन खेल खेल रहे हैं । खुद से विमुख हो रही पटेल बिरादरी से मोदी पूछते हैं , ‘ क्या आप नरेन्द्र मोदी की जगह अहमद पटेल को मुख्यमन्त्री बनाना चाहते हैं ? ‘
नरेन्द्र मोदी के विकल्प के रूप मे किसी नेता के न प्रस्तुत होने का लाभ भाजपा को मिल रहा है । राज्य में सक्रिय दोनों प्रमुख दलों की समान आर्थिक नीतियों का खामियाजा अन्तत: गुजरात के दलित , आदिवासी , किसान और अकलियतों को भुगतना पड़ सकता है।
‘ परिचर्चा ‘ की जारी बहस
Posted in Gujarat, half pant on दिसम्बर 15, 2006 | Leave a Comment »
#18 Today 11:31:20
- neerajdiwan
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Re: अहमदाबाद में प्रेमी युगलों की पिटाई
आंख बन्द कर लेने से मुसीबतें टल नहीं जाती.. संस्कृति के ठेकेदार कल हमारे घर की दीवारें लांघकर हमें धमकाने लगेंगे कि हम अपने जीवनसाथी के साथ भी मुहूर्त देखकर ही हमबिस्तर हों.
प्यार करने के तौर-तरीक़े सीखाने के काम में इनकी कब से माहिरी हो गई जो ब्रह्मचर्य का पालन करने का दंभ भरते फिरते हैं. संघ परिवार के ये चट्टे-बट्टे कभी मुन्ना बजरंगी के तौर पर दिखते हैं तो कभी दारा सिंह के.
इनकी आलोचना करना किसी राज्य की अस्मिता का अपमान नहीं हो सकता. जो कोई इसे अस्मिता से जोड़ने की कुचेष्टा करेगा उसे यह समझना चाहिए कि सारा देश भारतवासियों का है.
घुघुति ने जो विषय उठाया था.. उसका मर्म सिर्फ़ इतना है कि व्यक्तिगत मामलों में हस्तक्षेप सदैव अनुचित होता है. ऊपर से तुक्का यह कि दंगों के आरोपी जब पुलिसिया तेवर अपना लें तो यह ख़तरनाक प्रवृति होती है.. ये हिन्दू-मुसलमान का प्रश्न नहीं है.. जिन बच्चों को मार पड़ रही थी वो भले ही कोई जुर्म कर रहें हों लेकिन सज़ा देना क़ानून का काम है.. मुन्ना बजरंगियों को दुर्गा वाहिनी की सदस्यों को नहीं… विधि का शासन देश में बना रहे.. इसलिए यह अहम विषय है.
इस तरह का बवाल खड़ा हो गया तो अपन को दुष्यंत कुमार जी की एक रचना याद आ गई..
मत कहो आकाश में कुहरा घना है
यह किसी की व्यक्तिगत आलोचना है
सूर्य हमने भी नहीं देखा सुबह से
क्या करोगे सूर्य का क्या देखना है
इस सड़क पर इस कदर कीचड़ बिछी है
हर किसी का पैर घुटनों तक सना है
पक्ष औ प्रतिपक्ष संसद में मुखर है
बात इतनी है कि कोई पुल बना है
रक्त वर्षों में नसों में खौलता है
आप कहते हैं क्षणिक उत्तेजना है
हो गयी हर घाट पर पूरी व्यवस्था
शौक से डूबे जिसे भी डूबना है
दोस्तों अब मंच पर सुविधा नहीं है
आजकल नेपथ्य में संभावना है
Last edited by neerajdiwan (Today 11:33:28)
‘ परिचर्चा ‘ से साभार
Posted in Gujarat, half pant on दिसम्बर 15, 2006 | 1 Comment »
पिछली प्रविष्टी पर टिप्पणियां , आईं , कम से कम तीन चिट्ठों पर घटना पर केन्द्रित प्रविष्टियां आयीं और घुघुटीबसूती द्वारा एक सुन्दर चर्चा ‘परिचर्चा ‘ पर शुरु की गयी . इनमें सब कोंण ‘परिचर्चा’ में अच्छी तरह आये हैं . यहां उन्हें पूरा दिया जा रहा है . ‘परिचर्चा’ तथा सभी हिस्सेदार लोगों के प्रति आभार के साथ :
#1 11-12-2006 19:42:46
- ghughutibasuti
- नवीन सदस्य
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अहमदाबाद में प्रेमी युगलों की पिटाई
अपने अहमदाबाद ने भी प्रेमी युगलों को पीटने की होड़ में किसी से पीछे रहना उचित नहीं समझा। शुरु हो गये बजरंग दल वाले और वालियाँ भी।
भाई, यदि ये प्रेमी यूँ ही प्रेम करते रहे और फिर प्रेम विवाह भी रचा लें तो फिर हम किस से दहेज समेटेंगें? कैसे अपने माता पिता होने का वर्चस्व सिद्ध करेंगे? कैसे आग लगाएंगे आने वाली पीढ़ियों की खुशियों में? कैसे बहुएं जलाएँगे? कैसे जात पात बचाएंगे? और कैसे वोट बैन्क बनाएंगे?
जब हमने नहीं किया प्यार कभी तो क्योंकर प्यार बढ़ाएंगे?
तो फिर भाइयो और बहनो चलो शुरु हो जाओ, डंडा हमारा हो सिर हमारे बच्चों का। क्या आनन्द आयेगा? जब बच्चा चिल्लाएगा। नहीं रहना इस देश में। जब बच्चा बच्चा जा विदेश बस जाएगा। क्या आनन्द आएगा,वाह क्या आनन्द आएगा।
घुघुती बासूती
घुघूती बासूतीOffline
#2 12-12-2006 17:01:32
Re: अहमदाबाद में प्रेमी युगलों की पिटाई
सही कह रही हैं आप, पता नही ये सब बाते युवाओं को कहाँ ले जा रही हैं..
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#3 12-12-2006 20:40:35
Re: अहमदाबाद में प्रेमी युगलों की पिटाई
यह सीधे सीधे सामूहिक गुण्डागर्दी का मामला है और इसके खिलाफ़ कार्यवाही होनी चाहिए। लेकिन बात है कि बिल्ली के गले में घंटी कौन बाँधे?? जब शिकायत होगी तभी तो कार्यवाही होगी ना!!
अमित गुप्ताOffline
#4 13-12-2006 00:39:32
Re: अहमदाबाद में प्रेमी युगलों की पिटाई
इस तरह का मामला कुछ समय पहले मेरठ में भी हुआ था। पता नहीं यह लोग क्या साबित करना चाहते हैं. क्या भारतीय संस्कृति में प्रेम वर्जित है ? कोई भी पुराण-काव्य-साहित्य खोल कर देख लो उसमें प्रेम का वर्णन मिलेगा। अगर पीटना है तो जाकर कॉलगर्लों को पीटो, चकलाघरों पर हमला करो, उन्हें बंद कराओ। अपनी ताकत का परिचय ये लोग वहाँ क्यों नहीं देते।
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#5 13-12-2006 07:41:03
Re: अहमदाबाद में प्रेमी युगलों की पिटाई
Shrish wrote:
अगर पीटना है तो जाकर कॉलगर्लों को पीटो, चकलाघरों पर हमला करो, उन्हें बंद कराओ। अपनी ताकत का परिचय ये लोग वहाँ क्यों नहीं देते।
उनको पीटेंगे तो फ़िर इनकी आय का एक स्रोत सूख नहीं जाएगा!! ![]()
अमित गुप्ताOffline
#6 13-12-2006 08:45:08
Re: अहमदाबाद में प्रेमी युगलों की पिटाई
गनीमत है कि द्वारिका मोदी के गुजरात में है, मथुरा या बृन्दावन नहीं . मोदी का राज यदि मथुरा-वृन्दावन में होता तब राधा-कृष्ण का क्या हाल होता ? वह भी भारतीय संस्कृति के कथित रक्षकों के हाथों . विडम्बना है कि ‘रक्षकों’ में कुछ गोपियां भी पीछे नही हैं .
काश इन ‘संस्कृति रक्षकों’ का भीम और हिडिम्बा जैसे युगल से कभी सामना हो जाता ,तब समझ में आता.
http://www.ibnlive.com/videos/28066/vhp … uples.html
Pankaj Bengani has left a new comment on your post “राधा – कृष्णों की फजीहत”: [
http://samatavadi.blogspot.com
]
यह मोदी का राज.. मोदी का राज क्या लगा रखा है आपने??? मोदी कोई तानाशाह नही है, जनता उन्हे ठुकरा देगी तो वे आसानी से चुनाव हारकर घर भी बैठ सकते हैं। आप तो ऐसा कह रहे हैं जैसे यहाँ जंगलराज है। जो भी हो जिस प्रदेश में आप निवास करते हैं उस कथित उत्तम प्रदेश से तो अच्छा है। आपको सडक छाप मजनुओं में कृष्ण नजर आते हैं!!! 600 – 700 किमी दूर बैठकर संजय दृष्टि से देखने की बजाय प्रत्यक्ष में देखिए कि कौन से कृष्ण लीला कर रहे हैं।
Last edited by अफ़लातून (13-12-2006 09:03:38)
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#7 Yesterday 03:49:57
Re: अहमदाबाद में प्रेमी युगलों की पिटाई
घुघुतिबासुति (या जो भी आप हैं),
आप बात का बतंगड ना बनाएँ। किसी प्रेमी युगल की कोई पिटाई नही की गई है।
अहमदाबाद को उत्तरप्रदेश ना समझें।
यहाँ वी.एच.पी. वालों और दुर्गा वाहिनी की महिलाओं ने कोलेज के आगे खडे होकर महिलाओं को छेडने वाले लफंगो की खबर ली है। उनका तरीका गलत हो सकता है पर कार्य सही है। यही काम तथाकथित मानवाधिकारी करते तो ठीक था, वी.एच.पी. वाले करे तो गलत!! ऐसा?
और अफलातुन महोदय,
किससे पुछकर मेरी टिप्पणी को यहाँ प्रेषित किया आपने, कृपया मुझे अवगत कराएँ।
आप सब बुद्धिजीवी लोगों से हाथ जोडकर नम्र प्रार्थना है कि गुजरात को कारण अकारण बदनाम करना बन्द करें।
- पंकज बेंगाणीOffline
#8 Yesterday 09:23:00
- srijanshilpi
- सदस्य
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Re: अहमदाबाद में प्रेमी युगलों की पिटाई
pbengani wrote:
घुघुतिबासुति (या जो भी आप हैं),
आप बात का बतंगड ना बनाएँ। किसी प्रेमी युगल की कोई पिटाई नही की गई है।
अहमदाबाद को उत्तरप्रदेश ना समझें।
यहाँ वी.एच.पी. वालों और दुर्गा वाहिनी की महिलाओं ने कोलेज के आगे खडे होकर महिलाओं को छेडने वाले लफंगो की खबर ली है। उनका तरीका गलत हो सकता है पर कार्य सही है। यही काम तथाकथित मानवाधिकारी करते तो ठीक था, वी.एच.पी. वाले करे तो गलत!! ऐसा?
और अफलातुन महोदय,
किससे पुछकर मेरी टिप्पणी को यहाँ प्रेषित किया आपने, कृपया मुझे अवगत कराएँ।
आप सब बुद्धिजीवी लोगों से हाथ जोडकर नम्र प्रार्थना है कि गुजरात को कारण अकारण बदनाम करना बन्द करें।
बात का बतंगड़ तो पहले ही बन चुका है और परिचर्चा पर इस मुद्दे को उठाकर घुघुतिबासूति ने इसमें कोई योगदान नहीं किया है। पिटाई प्रेमी युगलों की हुई या मनचलों की, यह तो अदालत में साबित होने दीजिए। एफआईआर तो दर्ज हुआ ही है और मुकदमा भी चलेगा।
मेरठ में जब इस तरह का वाकया हुआ था तब पुलिस ने इस तरह की हरकत की थी और मामला सामने आने पर कुछ दोषी पुलिसकर्मियों को निलंबित भी किया गया था। जब पुलिस द्वारा ऐसा किया जाना अनुचित था तो नागरिकों के किसी समूह द्वारा ऐसा किया जाना और भी अनुचित होगा।
उत्तर प्रदेश हो या गुजरात या कोई अन्य राज्य, कानून भारत में हर जगह एक ही है। सार्वजनिक स्थानों पर अश्लील हरकत की शिकायत यदि पुलिस को की जाए तो वह कार्रवाई कर सकती है, लेकिन उसे यह देखना होगा कि अश्लील हरकत है या नहीं और उससे दूसरों पर कोई दुष्प्रभाव पड़ने की आशंका है या नहीं। लेकिन पुलिस को भी इस मामले में पिटाई करने का अधिकार नहीं है। वह अभियुक्तों को हिरासत में ले सकती है और मुकदमा चला सकती है। ऐसे मामले में आम तौर पर थाने में ही जमानत हो जाती है।
मेरा ख्याल है कि घुघुतीबासूती पंकजजी की तुलना में कुछ कम गुजराती नहीं हैं और गुजरात की इज्जत की चिंता उन्हें भी कम नहीं होगी।
दूसरी बात, अफ़लातून जी ने यदि अपने ब्लॉग पर आपकी सार्वजनिक टिप्पणी को परिचर्चा पर उद्धृत किया तो इसमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने व्यक्तिगत मेल को सार्वजनिक नहीं किया है और जो टिप्पणी उन्होंने उद्धृत की है, वह विषय से संबंधित है।
आपका गुजरात-प्रेम स्वाभाविक और काबिलेतारीफ है, लेकिन गुजरात से संबंधित हर बहस को गुजरात के सम्मान पर आघात समझना उचित नहीं।
Last edited by srijanshilpi (Yesterday 09:35:33)
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#9 Yesterday 09:59:53
Re: अहमदाबाद में प्रेमी युगलों की पिटाई
अब वह मेरठ वाली महिला-दरोगा भी बहाल हो चुकी है और अहमदाबाद का ‘बजरंगी’( यह उसका तख़ल्लुस है,जैसे मुन्ना बजरंगी) भी गिरफ़्तार हो कर छूट चुका है.
‘लफंगई’ करने से रोकने वालों को मोदी जी की पुलिस ने पकड़ लिया! बड़ा अनर्थ हुआ !
दर-असल जिनके सींग नहीं होते वह बहस नहीं कर सकते.कुछ चौपाये भी बिना सींग के होते हैं.
पहले ‘प्रचारकों’ के विवाह पर रोक थी.गोलवलकर से ,उस दौर में, जब एक प्रचारक ने विवाह की इच्छा जतायी तो उन्होंने कहा,’यूं तो कुत्ते भी निर्वाह कर लेते हैं !नर-नारी सम्बन्धों पर यह ‘गुरुजी’ की दृष्टि है.
हिन्दू कोड बिल में जब महिलाओं को अधिकार देने के प्राविधान किये गये तब उसका भी ‘गुरुजी’ ने विरोध किया था.
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#10 Yesterday 12:04:54
Re: अहमदाबाद में प्रेमी युगलों की पिटाई
शांति-शांति मित्रों, विषय से मत भटको और परिचर्चा को अखाड़ा मत बनाओ। वैचारिक भिन्नता तो इंसानी स्वभाव है। व्यक्तिगत आक्षेप और क्षेत्रवाद आप जैसे प्रबुद्ध लोगों को शोभा नहीं देता।
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#11 Yesterday 12:11:30
Re: अहमदाबाद में प्रेमी युगलों की पिटाई
अफ़लातून wrote:
अब वह मेरठ वाली महिला-दरोगा भी बहाल हो चुकी है और अहमदाबाद का ‘बजरंगी’( यह उसका तख़ल्लुस है,जैसे मुन्ना बजरंगी) भी गिरफ़्तार हो कर छूट चुका है.
‘लफंगई’ करने से रोकने वालों को मोदी जी की पुलिस ने पकड़ लिया! बड़ा अनर्थ हुआ !
दर-असल जिनके सींग नहीं होते वह बहस नहीं कर सकते.कुछ चौपाये भी बिना सींग के होते हैं.
पहले ‘प्रचारकों’ के विवाह पर रोक थी.गोलवलकर से ,उस दौर में, जब एक प्रचारक ने विवाह की इच्छा जतायी तो उन्होंने कहा,’यूं तो कुत्ते भी निर्वाह कर लेते हैं !नर-नारी सम्बन्धों पर यह ‘गुरुजी’ की दृष्टि है.
हिन्दू कोड बिल में जब महिलाओं को अधिकार देने के प्राविधान किये गये तब उसका भी ‘गुरुजी’ ने विरोध किया था.
आप जैसे समझदार इन्सान विषय से भटके अच्छा नहीं लगता, और जिस सदस्य की तुलना आप बिना सींग के चौपाये से कर रहे हैं वह हमारे हिन्दी चिठ्ठा जगत के सम्मानित सदस्य हैं, अफ़लातून जी विषय पर ही रहें, विषय “प्रेमी युगलों की पिटाई है” ना कि गुरूजी और स्त्री पुरुष संबंधों पर उनके के विचार और ना ही हिन्दू कोड बिल। इन विषयों पर चर्चा करना ही चाहते हैं आप तो एक नया थ्रेड खोल लें और किसी सद्स्य का अपमान ना करें।
Last edited by nahar7772 (Yesterday 12:16:36)
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#12 Yesterday 12:14:42
Re: अहमदाबाद में प्रेमी युगलों की पिटाई
Shrish wrote:
शांति-शांति मित्रों, विषय से मत भटको और परिचर्चा को अखाड़ा मत बनाओ। वैचारिक भिन्नता तो इंसानी स्वभाव है। व्यक्तिगत आक्षेप और क्षेत्रवाद आप जैसे प्रबुद्ध लोगों को शोभा नहीं देता।
वैचारिक मतभेद स्वाभावाविक है पर जानबूझ कर किसी को कोई उत्तेजित करे, उकसावे और सारे लोग आशा करे कि कोई बोले भी नहीं तो यह तो सरासर ज्यादती है। कुछ लोग जानबुझ कर ऐसी ओछी हरकतें लगातार कर रहे हैं, कृपया उन्हें समझावें।
सागर चन्द नाहरOffline
#13 Yesterday 13:58:28
Re: अहमदाबाद में प्रेमी युगलों की पिटाई
बन्दर और गधे को आपसी चर्चा में लाना अनुचित है.हो सकता है इन निर्दोष जीवों का अपमान हुआ हो.पहले बन्दर के महान बनने की कोशिश पर एक साथी द्वारा इसी सन्दर्भ मे यहां ( http://www.tarakash.com/mantavya/2006/1 … st_14.html ) एक व्यंग्य लिखा गया . तब बिना सींग के पशु की याद आयी.
जब घटना में दुर्गा वाहिनी,वि.हि.प. की पहलकदमी हो तब उनके मुख्य विचारक की दृष्टि का सन्दर्भ उठाना और वह भी सन्दर्भित चर्चा की बाबत विषयान्तर नहीं हुआ .
‘ओछी हरकत’ उस दिन अहमदाबाद में हुई.इस पर बहस के लिए उकसाना ओछी हरक़त नही.
मुझे मेरे गुजरात प्रेम की मजबूती पर भरोसा है,वह छुई-मुई नहीं है . इसलिए इस बहस को क्षेत्रीय दृष्टि से देखना एक और संकीर्णता है.
तानाशाही के दौर में देवब्रत बरुआ ने ‘इन्डिया इज़ इन्दिरा,इन्दिरा इज़ इन्डिया’ कहा था .गुजरात उस दौर से फिलहाल नहीं गुजर रहा है इसलिए वह दृष्टि(बरुआ टाइप) अप्रासंगिक है.
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#14 Yesterday 14:16:52
Re: अहमदाबाद में प्रेमी युगलों की पिटाई
जरा उस लेख की अन्तिम पंक्तियों को फ़िर से देख लेते जिसका हवाला आपने यहाँ दिया है
इस बार लंगुर उछलकर दूर पेड पर जा बैठा और बन्दर को हिकारत भरी निगाह से देखने लगा और बोला “तु बन्दर नहीं हो सकता। तु बन्दर का मुखौटा लगाकर आया हुआ गुजराती गधा तो नहीं? तु जरूर “पंकज” है।
सागर चन्द नाहरOffline
#15 Yesterday 20:31:53
- ghughutibasuti
- नवीन सदस्य
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- Posts: 14
Re: अहमदाबाद में प्रेमी युगलों की पिटाई
मित्रो,
लगता है मैंने किसी की दुखती रग पर हाथ रख दिया। जबकि मैं यहाँ इतनी नयी हूँ कि अभी किसी की भी दुखती या ना दुखती किसी भी तरह की रग की जानकारी नहीं है। आगे से चेष्टा करूँगी कि अपने प्रदेश (चाहे यह मेरी जन्म भूमि न भी है पर जब यहाँ रह रही हूँ तो लगता है कि कुछ तो मेरी भी है।) के बारे में कुछ भी बोलने से पहले अनुमति ले लूँगी। वैसे,मुझे तो सारा संसार अपना सा लगता है। सच कहूँ तो इस विषय को मैंने गुजरात के संदर्भ में नहीं उठाया था। वैसे,गुजराती भाइयो, क्षमा करना, यदि मैंने आपकी भावनाओं को ठेस पहुँचाई। मेरा यह इरादा बिल्कुल न था। वैसे मैं पंकज जी की आभारी हूँ कि उन्होंने केवल यह कहा कि ‘ घुघुतिबासुति (या जो भी आप हैं),’ , उन्होंने इतना आदर तो दिया। नहीं तो एक बार यों लगा कि मैं किन्ही कीड़े मकोड़ों की जमात में खड़ी हूँ। फिर ध्यान से पढ़ने पर पाया , नहीं वे तो मुझे मनुष्यों की श्रेणी में ही गिनते हैं।अत: आभार आपका पंकज जी। मैं नहीं कहूँगी पंकज जी या जो कुछ भी आप हैं। केवल यही कहूँगी , क्षमा प्राथी हूँ। जय गुजरात। जय बाबू बजरंगी, जो हमारी अस्मिता की रक्षा करते हैं।
और नया वर्ष अंगरेजों का तो आ ही रहा है, फिर वेलेन्टाइन्सडे, क्यों न हम अपने डन्डे चमका लें। काम आयेंगे।
आपकी ही,
घुघूती बासूती या जो भी।
पुन:श्च : कृपा कर के बंदरों, लंगूरों , कुत्तों, गधों आदि को तो बक्श दें। वे अति शान्ति प्रिय जीव हैं। उनके बदले मेरा सिर हाज़िर है।
घुघूती बासूती या जो भी।
घुघूती बासूतीOffline
#16 Today 04:36:33
Re: अहमदाबाद में प्रेमी युगलों की पिटाई
बात यू पी की चली हो, या हो रही गुजरात की
मानव ही तो कर रहे और मानवों की बात थी
बंदर हो या गधा कोई, सभी अपनी मस्ती में हैं
व्यवहार आपका स्पष्ट करने, मैने उनकी बात की.
नहीं रही मंशा कभी भी, मूक का विश्वास तोडूँ
आपकी इस चाल में, मैं क्यूँ उनका नाम जोडूँ
वो दुकानें आपकी है, जो खुल गई बस्ती में हैं
लोग खुद ही जान लें, मैं क्यूँ अपना काम छोडूँ.
माफ करिये आप मुझको, मैने ये भी जान लिया है
समाज सेवा के नाम को, आपने बदनाम किया है
आपका तो पेशा यही, कुछ भी हो- विरोध करना
मैने तो बस शब्द देकर, जग से आव्हान किया है.
न जाने और कितने, बहुत ही जरुरी काम पडे हैं
आप जैसे ही तो हैं, जो विरोध में उनके खडे हैं
आपकी चलती रहे, चाहे देश का कुछ हाल हो,
आपका तो क्या कहें, आप अपनी जिद पे अडे हैं.
मै हट रहा हुँ। कोई मेरे व्यवहार से आहत हुआ हो तो मैं माफी चाहता हुँ। घुघुतिजी विशेष रूप से क्षमाप्रार्थी हुँ।
- पंकज बेंगाणीOffline
#17 Today 05:00:03
- sanjaybengani
- समझदार बंधु
- From: Ahmedabad | कर्णावती
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- Posts: 451
- Website
Re: अहमदाबाद में प्रेमी युगलों की पिटाई
मैंने अभी यह बहस देखी. मन आहत हुआ. हम किस स्तर पर उतर आएं है. जिन्हे बुद्धीजिवी समझ कर सम्मान से देखता रहा हूँ, उनसे इस प्रकार की निम्नस्तरीय बहस की उम्मिद नहीं थी.
बजरंगी मार्का लोग न तो हमारे आदर्श हैं, न ही हो सकते हैं.
मोदी की प्रसंशा मात्र इसलिए करते रहे हैं की वे अन्य मुख्यमंत्रियों से अलग है, साथ ही हमें सही बात कहते हुए साम्प्रदायिक कहलवाने से डर भी नहीं लगता.
घुघुतिबासुति के लिए मुझे नहीं लगता पंकज ने अपमान जनक कुछ लिखा है, हमारा अल्पज्ञान समझ लिजीये की ऐसा नाम पहली बार सुना है, इसलिए लिख दिया की आप जो भी है. इसका अर्थ यह नहीं की इन्हे मानव से परे कुछ माना है.
साथीगण अपने पद,स्तर तथा उम्र की गरिमा बनाए रखे.
नैतिक बल हो इतना प्रबल कि आपको सागर भी रास्ता दे.
-संजय बेंगाणी
राधा – कृष्णों की फजीहत
Posted in Gujarat, half pant on दिसम्बर 10, 2006 | 4 Comments »
गनीमत है कि द्वारिका मोदी के गुजरात में है, मथुरा या बृन्दावन नहीं . मोदी का राज यदि मथुरा-वृन्दावन में होता तब राधा-कृष्ण का क्या हाल होता ? वह भी भारतीय संस्कृति के कथित रक्षकों के हाथों . विडम्बना है कि ‘रक्षकों’ में कुछ गोपियां भी पीछे नही हैं .
काश इन ‘संस्कृति रक्षकों’ का भीम और हिडिम्बा जैसे युगल से कभी सामना हो जाता ,तब समझ में आता.
