Posted in Gujarat, half pant on December 15, 2006 | 1 Comment »
पिछली प्रविष्टी पर टिप्पणियां , आईं , कम से कम तीन चिट्ठों पर घटना पर केन्द्रित प्रविष्टियां आयीं और घुघुटीबसूती द्वारा एक सुन्दर चर्चा ‘परिचर्चा ‘ पर शुरु की गयी . इनमें सब कोंण ‘परिचर्चा’ में अच्छी तरह आये हैं . यहां उन्हें पूरा दिया जा रहा है . ‘परिचर्चा’ तथा सभी हिस्सेदार लोगों के प्रति [...]
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Posted in Gujarat, half pant on December 10, 2006 | 2 Comments »
गनीमत है कि द्वारिका मोदी के गुजरात में है, मथुरा या बृन्दावन नहीं . मोदी का राज यदि मथुरा-वृन्दावन में होता तब राधा-कृष्ण का क्या हाल होता ? वह भी भारतीय संस्कृति के कथित रक्षकों के हाथों . विडम्बना है कि ‘रक्षकों’ में कुछ गोपियां भी पीछे नही हैं .
काश इन ‘संस्कृति रक्षकों’ का भीम [...]
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Posted in gandhi, half pant on November 26, 2006 | No Comments »
“जहाँ एक ओर गीता अहिंसा की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ़ हिंसा को भी परिस्थिवश ज़रूरी मानती है। लेकिन गांधी जी ने गीता से केवल अहिंसा का सिद्धान्त लेकर बाक़ी सब कुछ नकारने की चेष्टा की है।” यहां
हिन्दी चिट्ठेबाजों में ऐसी समझदारी वालों की मौजूदगी के बारे में ‘एक खोजो हजार मिलेंगे,मत खोजो [...]
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Posted in gandhi, half pant on October 3, 2006 | No Comments »
संजय बेंगाणी के चिट्ठे पर टिप्पणी
गांधी की निन्दा अवश्य करें लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखें :
अपनी आत्मकथा को ‘सत्य के प्रयोग’ कहने वाला यह कहता था कि चूंकि यह प्रयोग है इसलिए यदि मेरे विचारों में एक विषय पर दो परस्पर विरोधी बातें मिलें तो बाद वाली को सही मानना.
जैसे जाति प्रथा के बारे में [...]
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