राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने पिछले साल नवम्बर की छह तारीख को पश्चिम बंगाल के नन्दीग्राम में हुई मौतों के लिए राज्य की बुद्धदेव सरकार की ढील को जिम्मेदार ठहराया है। इस सम्बन्ध में अपनी रिपोर्ट जारी करते हुए एनएचआरसी ने कहा है कि राज्य सरकार को खुद उस हिंसा की जिम्मेदरी लेनी चाहिए और [...]
Read Full Post »
Posted in consumerism, corporatisation, industralisation, sez, tagged buddhadev bhattacharya, industralisation, nandigram, prabhat patanayak, sez, singur on January 3, 2008 | 1 Comment »
पिछले भाग : प्रथम , द्वितीय
सोवियत संघ जैसी व्यवस्था की वकालत करने वाले प्रभात पटनायक को इस बात का भी जवाब देना होगा कि आखिर क्यों सोवियत संघ एवं अन्य साम्यवादी देश ताश के पत्तों की तरह बिखर गए ? उनमें क्या अन्तर्विरोध थे ?क्या ऐसा नहीं है कि पूंजीवादी देशों जैसा ही औद्योगीकरण करने के [...]
Read Full Post »
Posted in industralisation, sez on January 1, 2008 | No Comments »
Technorati tags: वामपंथ, व्यामोह, बुद्धदेव, प्रभात पटनायक, औद्योगीकरण
भाग एक यहाँ पढ़ें
पश्चिम बंग की सरकार जिस प्रकार का औद्योगीकरण कर रही है , उसके खिलाफ यह एक स्पष्ट बयान है । पश्चिम बंग सरकार और माकपा नेतृत्व के इस तर्क को पटनायक अस्वीकार कर देते हैं कि पश्चिम बंगाल के विकास के लिए एवं बेरोजगारी की [...]
Read Full Post »
मानव समाज में खेती का स्थान तीन कारणों से महत्वपूर्ण रहा है और रहेगा ।
एक , अमरीका-यूरोप में खेती का स्थान गौण हो सकता है , लेकिन तमाम औद्योगीकरण और विकास के बावजूद आज भी मानव जाति का बड़ा हिस्सा गांवों में रहता है और अपनी जीविका के लिए खेती , पशु - [...]
Read Full Post »
भारत की खेती और भारत के किसान ,आज इस औद्योगिक सभ्यता के प्रमुख निशाने पर हैं । बहुराष्ट्रीय कंपनियों को इसमें अपने मुनाफों की नयी संभावनाएं दिखाई दे रही हैं । भूमण्डलीकरण का जो चौतरफा हमला भारत के किसानों पर हो रहा है, सीधे जमीन का अधिग्रहण और विस्थापन उस हमले का सिर्फ एक हिस्सा है ।आम किसानों [...]
Read Full Post »
Posted in gandhi, industralisation on September 2, 2007 | 3 Comments »
पूंजीवादी और औद्योगिक सभ्यता के इस विनाशकारी पहलू का अहसास उन्नीसवीं शताब्दी में मार्क्स सहित यूरोपीय विचारकों को नहीं होना स्वाभाविक था ,लेकिन गांधी ने इसे बहुत पहले ताड़ लिया था ।इसीलिए गांधी ने इसे राक्षसी सभ्यता कहा था । यूरोप - अमेरिका में हाल में दो - तीन दशक पहले , जब प्रदूषण [...]
Read Full Post »
Technorati tags: पूंजी, रोज़ा लक्समबर्ग, लोहिया, capital, rosa luxemberg, lohia
निश्चित रूप से कार्ल मार्क्स का ध्यान इस ओर गया था और उन्होंने अपने ग्रन्थ ‘पूंजी’ में औपनिवेशिक लूट का विस्तृत वर्णन किया है । लेकिन इस महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य को उन्होंने अपने विश्लेषण का अंग नहीं बनाया । बाद में रोज़ा लक्ज़मबर्ग ने कुछ हद [...]
Read Full Post »